नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विशेष विश्लेषण। संसद में महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाला यह विधेयक भारत की राजनीति और समाज को कैसे बदलेगा?
नितिन नवीन
निश्चित ही यह अवसर ऐतिहासिक है। आज से भारतीय संसद का तीन दिवसीय सत्र में एक ऐसे युगांतरकारी विधेयक पर चर्चा कर रही है, जो हमारे विकसित राष्ट्र के सपने को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा। नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार की यह पहल सभी राजनीतिक दलों के समर्थन की उम्मीद रखती है। यह उम्मीद इसलिए है क्योंकि यह विधेयक केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया मात्र नहीं है, बल्कि हमारे समाज की बुनियादी सोच को नया आयाम देने वाला एक ऐतिहासिक समय है। सितंबर 2023 में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के रूप में जिस यात्रा का श्रीगणेश हुआ था, वह अब निर्णायक मोड़ पर है। यह अधिनियम सुनिश्चित करेगा कि अगले आम चुनाव से देश की सर्वोच्च पंचायत, संसद एवं तमाम विधान मंडलों में नारी शक्ति की पूर्ण सहभागिता हो और नीति-निर्धारण में उनका स्वर एक-तिहाई भागीदारी के साथ मजबूती से सम्मिलित हो।
प्रधानमंत्री बनने के बाद श्री नरेंद्र मोदी जी ने महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सम्मान को अपनी नीतियों के केंद्र में रखा है। उन्होंने महिलाओं की गरिमा और उनके सशक्तिकरण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया। हमारी सरकार ने महिलाओं के जीवन के हर चरण में उनके सशक्तिकरण के लिए योजनाओं का एक व्यापक तंत्र तैयार किया है: बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ-बेटियों के प्रति सोच बदली, उनका आत्मविश्वास और अवसर दोनों बढ़े।
मुद्रा योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाया। प्रधानमंत्री आवास योजना-घर की लक्ष्मी को घर का मालिकाना अधिकार मिला। सुकन्या समृद्धि योजना - बेटियों का भविष्य आर्थिक रूप से सुरक्षित हुआ। प्रधानमंत्री उज्वला योजना महिलाओं को धुएं से मुक्ति मिली, जीवन स्तर बढ़ा। मिशन इंद्रधनुष टीकाकरण से माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ और सुरक्षित जीवन की नींव मजबूत हुई। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना गर्भवती माताओं को पोषण और आर्थिक सहारा मिला, जिससे उनका स्वास्थ्य सुदृढ़ हुआ। ट्रिपल तलाक मुस्लिम महिलाओं को अन्याय से मुक्ति मिली और उनका आत्मसम्मान व अधिकार मजबूत हुए। नल से जल घर तक जल पहुंचने से महिलाओं का जीवन अधिक सहज हुआ लखपति दीदी महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनीं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ीं। यह सब उदाहरण, महिला सशक्तिकरण के प्रति हमारी सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का ही प्रमाण है।
अब नीति-निर्धारण में उनकी सक्रिय भूमिका के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' लेकर आए हैं। यह केवल आश्वासन नहीं है, उनको स्पष्ट दृष्टि है कि वर्ष 2029 से संसदीय प्रणाली में महिलाओं की 33 प्रतिशत मौजूदगी रहे, वे सशक्त हों, नीति निर्धारण में उनकी सशक्त भूमिका हो और वे देश की मुखर आवाज बनें। ध्यान दिया जाए तो पता लगेगा कि यह संसद में महिलाओं की संख्या को बढ़ाने मात्र का ऊपरी प्रयास नहीं है, बल्कि हमारी सामाजिक, सांस्कृतिक, दार्शनिक, ऐतिहासिक परम्परा और एक शब्द में कहें तो उस आधुनिक सनातनी विचार प्रणाली में एक शोधन है, जिसकी बुनियाद में गार्गी, मैत्रेयी, अरुंधती, अपाला, घोषा, विश्ववारा, सुलभा, सीकता और शाश्वती आदि अनेक ऋषि-नारियों ने वेद संहिताओं के रचने से लेकर जीवन के अनेक क्षेत्रों में अपनी सूक्ष्म दृष्टि, उदात्त चिन्तन और विलक्षण मेधा का परिचय दिया है। आधुनिक भारत के निर्माण की पृष्ठभूमि में जहां अहिल्याबाई जैसी उदार चेता राजमहिषों ने अपने और प्रशासनिक कौशल जनकल्याण के मानक स्थापित किए वहीं झांसी की रानी ने मातृभूमि और राष्ट्र प्रेम के लिए अपने प्राणोत्सर्ग से विश्व इतिहास में भारतीय नारियों के बलिदान-भाव की मिसाल कायम की। वर्तमान भारत के निर्माण में भी हमारी बेटियों का योगदान अद्वितीय है।
सावित्रीबाई फुले के समाज सुधार, डॉ. आनंदी गोपाल जोशी के चिकित्सा संघर्ष से, 'मिसाइल वुमन' टेसी थॉमस के वैज्ञानिक पराक्रम तक, हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी योग्यता का लोहा मनवाया है। खेल के मैदान में पी.वी. सिंधु, मैरीकॉम और मिताली राज और साइना नेहवाल ने तिरंगे की शान बढ़ाई है, तो कला और संगीत के संसार में लता मंगेशकर और आशा भोंसले जैसी सुर साम्राजियों ने अपनी स्वर साधना से विश्व में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। यह सूची अनंत है, जो प्रमाणित करती है कि स्वी शक्ति जीवन के हर क्षेत्र में निर्णायक भूमिका में है। संसद में महिलाओं के लिए स्थान आरक्षित करने का यह निर्णय 'वैदिक गरिमा' और 'आधुनिक प्रगति' का सुंदर संगम है। इसमें 'सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास और सबका विश्वास' की पवित्र भावना शामिल है। यह विधेयक उन करोड़ों माताओं-बहनों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक है, जिन्होंने परिवार और समाज के निर्माण में स्वयं को खपा दिया।
इस बदलाव का क्रांतिकारी प्रभाव हमारे ग्रामीण भारत पर पड़ेगा, जहां महिलाएं अब नेतृत्वकारी भूमिका में उभरेंगी। यह सक्रिय भागीदारी सामाजिक रुड़ियों को तोड़ेगी और आने वाली पीढयििों के लिए ऐसा वातावरण बनाएगी जहां बेटियां केवल सपने नहीं देखेंगी, बल्कि उन्हें साकार करने का सामर्थ्य और वैधानिक अधिकार भी रखेंगी। इस विधेयक को लेकर सरकार की मंशा कितनी पवित्र है इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री जी ने स्पष्ट किया कि यह अधिनियम किसी एक पार्टी के एजेंडा की जीत नहीं, बल्कि सभी के प्रयासों की जी है।है सारा क्रेडिट हिंदुस्तान के सभी राजनीतिक दलों को है, जो पिछले तीन-चार दशकों से लगातार इस दिशा में काम कर रहे है। हमारी संसद देश के प्रबुद्ध और उत्तरदायी जनप्रतिनिधियों का मंदिर है। राष्ट्र की जनता हमारी हर गतिविधि और सरोकार को सूक्ष्मता से परखती है। माननीय सांसदों से यह विनम्र अपेक्षा है कि वे राष्ट्र के सामूहिक मन को समझें।
आज समय की मांग है कि हम दलगत सीमाओं से ऊपर उठें। एक विनम्र कार्यकर्ता और इस महान संस्था के सदस्य के नाते मेरी अपील है कि इस नारीशक्ति के सामर्थ्य और स्वालंबन के 'अभिषेक अनुष्ठान' में अपने समर्थन की आहूति अर्पित करें। यह सामूहिक प्रयास हो यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य का भारत न केवल आर्थिक रूप से, बल्कि सामाजिक न्याय और नारी गौरव के मामले में भी विश्व का नेतृत्व करने में सक्षम है। हमारा सामूहिक प्रयास ही समर्थ और सशक्त भारत के निर्माण में मातृशक्ति की निर्णायक भूमिका तय करेगा।