मध्यप्रदेश की राजनीति में महिलाओं पर फोकस, उमा भारती की सक्रियता, कमलनाथ का राज्यसभा से इनकार और अफसर-मंत्री टकराव चर्चा में।
अनुराग उपाध्याय
मोहन का महिलाओं के लिए बड़ा प्लान
मुख्यमंत्री मोहन यादव मध्यप्रदेश में महिलाओं के लिए कुछ खास और बड़ा करने की योजना पर काम कर रहे हैं। संसद में महिला आरक्षण की बात सामने आने से पहले ही मोहन सरकार आधी आबादी के लिए बड़े प्लान पर विचार कर चुकी है। मोहन यादव मध्यप्रदेश को महिलाओं के लिए एक आदर्श राज्य बनाना चाहते हैं। हर क्षेत्र में महिलाओं को ज्यादा नेतृत्व कैसे मिले इसके लिए फाइलें दौड़ रही हैं। माना जा रहा है देश में एक बार फिर लाड़ली लक्ष्मी और लाडली बहाना के बाद मध्यप्रदेश से महिला सशक्तिकरण का नया सन्देश देश में जाने के साथ महिलाएं कैसे निर्णायक भूमिका में आएं इसके सुझाव भी होंगे। मुख्यमंत्री की इच्छा है मध्यप्रदेश अहिल्याबाई से अब तक महिलाओं की उन्नति के सर्वोत्तम कार्यों की भूमि बने। मुख्यमंत्री का सोच अपनी जगह है लेकिन यह भी सच है भाजपा को इस समय सबसे ज्यादा वोट महिलाएं ही दे रही हैं।
उमा की पोहा राजनीति
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती वर्तमान राजनीति में भले ही बिसरा दी गई हों लेकिन वे अपने होने का अहसास गाहे बगाहे करवा ही देती हैं। टीकमगढ़ में गरीब गुरबों के अतिक्रमण हटाए जाने थे ताकि बड़े लोग वहां अपने कारोबार कर सकें। उमा भारती को जब ये बात पता चली तो वे एक ठेले पर पहुंच गईं और सारे मसले को समझा और उस ठेले से प्रशासन के खिलाफ पोहे बेच कर अपनी आवाज बुलंद की। उमा भारती का यह अंदाज सोशल मीडिया की सुर्खियां बन गया और प्रशासन को भी उनकी बात पर गौर करना पड़ा। उमा भारती ने स्पष्ट किया अतिक्रमण हटाना, स्वच्छता बनाये रखना जरूरी है लेकिन इसकी शुरुआत उन लोगों से होना चाहिए जिन्होंने बड़े स्तर पर नियमों का उल्लंघन किया है। अतिक्रमण हटाने में चयनात्मक कार्रवाई ठीक नहीं है। इस सब को आप उमा की पोहा पॉलटिक्स कह सकते हैं। लेकिन कई बार ऐसा लगता है उमा भारती अपने लिए भाजपा में नई भूमिका तलाश रही हैं।
कमलनाथ की भी न
खबर पुख्ता है पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बाद कमलनाथ ने भी राज्यसभा जाने से इंकार कर दिया है। मध्यप्रदेश के कांग्रेसी चाहते हैं कि राज्य सभा के लिए कमलनाथ का नाम आने से चुनाव में कोई गड़बड़ी नहीं होगी। लेकिन सच्चाई यही है कि अब कमलनाथ का मूड राज्यसभा जाने का नहीं हैं। उन्होंने नकुलनाथ के लिए यह विकल्प खुला रखा है लेकिन स्थानीय नेता इसके लिए तैयार नहीं हैं। इस बार एमपी से राज्यसभा की तीसरी सीट कांग्रेस के खाते में जाना है। किन्तु कांग्रेस को यह सीट अपने हाथ से जाती दिख रही है और उसने हॉर्स ट्रेडिंग' का हौवा खड़ा कर दिया है। जबकि भाजपा के कुछ नेताओं का दावा है कई कांग्रेस विधायक खुद भाजपा के संपर्क में हैं।
बेशर्म अधिकारी और बेचारे मंत्री
मोहन सरकार के कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह कुशवाह को आमतौर पर गुस्सा नहीं आता है। लेकिन लगता है अब उनके साथ अति हो रही है। इस कारण मंत्री जी कभी कभार गुस्से में नजर आ रहे हैं। निवाड़ी में जब अफसरों की नाफरमानियां सामने आयीं तो मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने प्रशासन को आगाह किया। वैसे भी एक अफसर के कारण कार्यक्रम बिगड़े इसे ठीक नहीं माना जा सकता। पिछले दिनों कुशवाह ग्वालियर में थे। वहां भी नगर निगम के दो अधिकारी मौके से गायब थे। बस फिर क्या था मंत्री जी ने सीधे नगर निगम कमिश्नर को फोन लगा कर बता दिया कि नगर निगम कैसे चल रहा है। वैसे आपको बता दें कुछ अफसरों ने हर जगह बेशर्मी की चादर ओढ़ ली है। ये अलग बात है ये बेशर्म अधिकारी मंत्री तक से आम आदमी जैस व्यवहार करने लगे हैं।
प्रदर्शन में कुत्ता कलेक्टर
कांग्रेस के प्रदर्शन में कोई मूर्खता न हो ये हो ही नहीं सकता। सीहोर में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के प्रदर्शन में एक कुत्ते को कलेक्टर मान लिया गया। पता नहीं किसी की सलाह पर एक कुत्ते को कलेक्टर कहने पर कांग्रेसियों में सहमति बन गई, किसानों के हित में एक ज्ञापन कलेक्टर की बजाए कुत्ते को सौंप दिया गया। नेता प्रतिपक्ष पद की अपनी गरिमा है और उनके आयोजन में इस तरह की ओछी हरकत यह साबित करती है कि कांग्रेस के पास अब विचार करने वाली लोगों की टीम नहीं है। एक दौर था कांग्रेस के पास' थिंक टैंक हुआ करते थे और वे पार्टी की गाइडलाइन तय कर रणनीतिक तैयारियां करवाते थे। लेकिन अब कांग्रेस रसातल की तरफ है। इस प्रदर्शनों के बाद लोगों का कांग्रेस के प्रति गुस्सा ही नजर आया। लेकिन कांग्रेस भी गजब है उसका कहना है ऐसा करने से उनके प्रदर्शन की चर्चा तो हो रही है।
मकवाना की विदाई दिसंबर में
डीजीपी कैलाश मकवाना इस साल दिसंबर में सेवानिवृत हो जायेंगे। उनकी जगह कौन लेगा इसकी चर्चा मंत्रालय में शुरू हो चुकी है। इस साल पुलिस मुख्यलय से कई चर्चित अफसरों की विदाई होगी। अजय कुमार शर्मा, आलोक रंजन, सोनाली मिश्रा, संजीव शमी, ए साई मनोहर, आशुतोष राय, अंशुमान सिंह, अरविन्द सक्सेना, मिथलेश शुक्ला, शशिकांत शुक्ला, महेंद्र चंद्र जैन इन चर्चित अफसरों में शामिल है। जनवरी से दिसंबर तक कुल 16 आईपीएस अफसर पुलिस मुख्यालय