केंद्रीय बजट 2026-27 में पर्यटन पर खास फोकस से जम्मू-कश्मीर में रोज़गार, इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटकों का भरोसा बढ़ने की उम्मीद।
जम्मू-काश्मीर, जिसे 'घरती का कहा जाता है.दशकों से अनिश्चितता के बाद अब आर्थिक विकास की नई राह पर है, और इसमें सबसे बड़ी भूमिका पर्यटन क्षेत्र निभा रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट ने इस विकास को और गति देने के लिए पर्यटन क्षेत्र को विशेष प्रोत्साहन दिया है। यह पहल न केवल घाटी में सैलानियों की संख्या बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि जमीनी स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। केंद्रीय बजट
2026-27 की घोषणा में, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पर्यटन को बढ़ाने के लिए दो-तरफा प्रभावकारी योजनाओं को शामिल किया। इंस्टीट्यूशनल कैपेसिटी बिल्डिंग और ट्रेल्स और हेरिटेज साइट्स को विकसित करना सरकार ने प्राथमिकता में शामिल किया है। वित्त मंत्री ने जम्मू और कश्मीर में इकोलॉजिकली सस्टेनेबल पहाड़ी रास्तों के विकास का भी जिक्र किया, जो अच्छा है क्योंकि फॉर्मल रास्तों में बेहतर प्रबंधन होता है, जिसमें टिकटिंग, परमिट, रेंजर्स की तैनाती और चिकित्सीय सुविधाएं शामिल हैं और 'कश्मीर एक्सपीरियंस में विविधता लाकर नाजुकता कम होती है।
सरकार जिस तरह धीरे-धीरे किंतु लगातार कश्मीर के विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से कल्याणकारी योजनाओं को ला रही है. उससे एक बात तो साफ है कि आने वाले समय में कश्मीर पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगा। जम्मू-कश्मीर के पारंपरिक स्थलों जैसे गुलमर्ग, पहलगाम के अलावा, कम प्रसिद्ध स्थानों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। हाल के कुछ वर्षों में शांति और बेहतर सुरक्षा माहौल ने पर्यटकों को वापस कश्मीर की ओर मोड़ा है। 2024 में 2.35 करोड़ से अधिक पर्यटकों का रिकॉर्ड आना यह दर्शाता है कि यात्रियों का विश्वास बहाल हो चुका है।
बजट में बुनियादी ढांचा सुधारों (सड़क, हवाई मार्ग) को प्रोत्साहन देकर सरकार इस आत्मविश्वास को और मजबूत कर रही है। पर्यटन केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। बजट में की गई घोषणाओं का सीधा लाभ होटलव्यवसाथियों, शिकारा वालों, टैक्सी चालकों और हस्तशिल्प उद्योग से जुड़े स्थानीय लोगों को मिलेगा। इसे 'उद्योग का दर्जा मिलने से इसके विकास में आ रही बाधाएं कम हुई हैं। सकारात्मक पहलुओं के बावजूद, यह आवश्यक है कि विकास टिकाऊ हो। पर्यावरण को नुकसान पहुंचार बिना पर्यटन को बढ़ावा देना एक बड़ी चुनौती है। साथ ही, बजट में की गई घोषणाओं को समय पर जमीन पर उतारना आवश्यक है, ताकि इसका लाभस्थानीय निवासियों तक तुरंत पहुंच सके।
कुल मिलाकर, यह बजट कश्मीर में पर्यटन के लिए आशाजनक है। यह न केवल पर्यटकों के लिए सुरक्षित और आकर्षक गंतव्य का वादा करता है, बल्कि निवासियों के लिए आर्थिक समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त करता है। यह देखना उत्साहजनक होगा कि कैसे वह वित्तीय प्रोत्साहन, घाटी को एक वैश्विक पर्यटन पावरहाउस के रूप में फिर से स्थापित करता है। स्थानीय लोगों को फायदा पहुंचाने वाला पर्यटन, 'टेररिस्ट इकोसिस्टम का अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले ने भारत को यह सच मानने पर मजबूर कर दिया कि पर्यटनतभी ठीक होता है जब यात्री यह अंदाजा लगा सकें कि उनके साथ क्या होगा और स्थानीय समुदाय को सोशल मीडिया पर भरोसेमंद फायदे दिखें।
हमले के बाद, स्थानीय प्रशासन ने सरकार से मजूर 48 पर्यटकों की साइट्स को बंद कर दिया, बाद में उन्हें चरणबद्ध तरीके से दोबारा फिर से खोला, जिसमें 16 फरवरी को 14 साइट्स शामिल थीं। पर्यटकों ने कश्मीर घाटी को कुलमिलाकर काफी सुरक्षित बताया है, हालांकि अभी सुरक्षा कारणों पर विस्तार से चिंतन-मनन की आवश्यकता है।