ईरान-अमेरिका तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य संकट गहराया। तेल सप्लाई प्रभावित होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर, सैन्य कार्रवाई और धमकियों से हालात गंभीर।
अमेरिका अपनी सैन्य रणनीति के बल पर ईरान की धरती से अपने दोनों पायलटों को भले ही सुरक्षित उठा लाया हो, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संकट अभी तक अमेरिका सहित पूरी दुनिया के सामने बड़ी मुसीबत बनकर खड़ा है और अमेरिका इस संकट का कोई समाधान नहीं खोज पाया है। दरअसल शनिवार की रात ईरान में अमेरिका ने एक ऐसा ऑपरेशन अंजाम दिया, जिसने पूरी दुनिया को उसकी सैन्य ताकत का एहसास करा दिया।
शुक्रवार को ईरान की जमीन पर गिराए गए एफ-15-ई फाइटर जेट के दूसरे क्रू मेंबर को भी अमेरिका ने खोज निकाला है। अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने खतरनाक हालात में रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया, लेकिन दक्षिणी इस्फहान में अमेरिका के इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान ईरान के सुरक्षा बलों ने दो अमेरिकी एफ-130 मिलिट्री एयरक्राफ्ट और दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर्स को मार गिराया। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने यह दावा रविवार को किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस ऑपरेशन को इतिहास का सबसे साहसी रेस्क्यू ऑपरेशन करार दिया, लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ना तो होर्मुज खुलवा पाए हैं और ना ही ईरान को झुका पाए हैं। दुनिया के लिए होर्मुज का संकट अब और गंभीर हो गया है।
एक तरफ ट्रंप नाटो पर युद्ध में उतरने का दबाव बना रहे हैं, तो दूसरी तरफ यूरोप इस जंग से बचने का रास्ता खोज रहा है। फ्रांस साफ कह रहा है कि नाटो का काम इस इलाके में ऑपरेशन करना नहीं है, जबकि ब्रिटेन समिट के जरिए कोई बीच का रास्ता निकालने में जुटा है। यानी यूरोप अब अमेरिका के साथ खड़ा तो दिखना चाहता है, लेकिन उसकी जंग नहीं लड़ना चाहता।
इसी बीच ट्रंप ने चीन को भी घसीट लिया है। उन्होंने कह दिया है कि जिसे तेल चाहिए, वो खुद होर्मुज की सुरक्षा करे। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए ईरान को बार-बार धमका भी रहे हैं।
होर्मुज खोलने के लिए ट्रंप की 10 दिन की डेडलाइन सोमवार 7 अप्रैल को खत्म होने वाली है, जबकि बातचीत बेनतीजा रही। इसी क्रम में रविवार को ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को आखिरी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मंगलवार 7 अप्रैल तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला गया, तो ईरान को नरक बना दिया जाएगा।
अमेरिकी और इजरायली सेना ईरान के पावर प्लांटों और पुलों पर हमले करेगी। ट्रंप ने इस दिन को पावर प्लांट डे और ब्रिज डे नाम दिया है। ईरान के सैन्य अधिकारियों ने भी कड़े शब्दों में कहा है कि अगर अमेरिका और इजरायल ने उनके इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले जारी रखे, तो उनके लिए जहन्नुम के दरवाजे खुल जाएंगे।
दूसरी तरफ आईआरजीसी ने एक बार फिर दावा किया है कि होर्मुज से गुजरने वाला रास्ता पूरी तरह उसके नियंत्रण में है और उसकी मर्जी के बिना यहां से कोई आ-जा नहीं सकता। आईआरजीसी ने ट्रंप के बयानों को बेहूदा और भद्दा बताते हुए कहा कि होर्मुज पूरी तरह उसके नियंत्रण में है।विदेश मंत्री अरागची का कहना है कि होर्मुज का भविष्य केवल ईरान और ओमान तय करेंगे, कोई बाहरी ताकत नहीं। यानी ना अमेरिका, ना यूरोप।
ईरान होर्मुज को चोक करके अमेरिका सहित यूरोप और एशिया पर प्रेशर बढ़ा रहा है। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप इस युद्ध में जीत का एकतरफा ऐलान कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इसी युद्ध की वजह से दुनिया की 20 प्रतिशत तेल सप्लाई का रिमोट कंट्रोल आज ईरान के हाथ में है।
नतीजा, समंदर के बीचों-बीच 400 से ज्यादा विशालकाय तेल टैंकर खड़े हो गए हैं। यूरोप और एशिया की तेल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसका ग्लोबल इकोनॉमी पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है, क्योंकि जब तेल की सप्लाई रुकती है, तो असर सिर्फ एक देश पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ता है।