होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव और अमेरिकी नाकेबंदी के बीच ईरान के तेल संकट ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। सैटेलाइट तस्वीरों में समुद्र में तेल फैलने के संकेत मिले हैं।
अमेरिका और इजराइल के साथ जारी युद्ध के बीच ईरान गंभीर तेल संकट का सामना कर रहा है। ईरान हर दिन 30 लाख बैरल से ज्यादा कच्चे तेल का उत्पादन करता है, जिसका अधिकांश हिस्सा खार्ग द्वीप स्थित उसके मुख्य एक्सपोर्ट टर्मिनल से भेजा जाता है। लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी के कारण फारस की खाड़ी से तेल टैंकर बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
इस कारण ईरान अपना तेल दूसरे देशों को नहीं बेच पा रहा है और उत्पादन जारी रहने की वजह से उसके पास तेल स्टोर करने की जगह भी नहीं बची है। सैटेलाइट तस्वीरों में खार्ग द्वीप के पास समुद्र की सतह पर बड़े काले धब्बे दिखाई दिए हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि ईरान जिस तेल को स्टोर नहीं कर पा रहा, उसे समुद्र में छोड़ रहा है।
होर्मुज ब्लॉकेड का भारत समेत दुनिया पर असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है। दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और गैस सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। भारत समेत कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर हैं। नाकेबंदी और तनाव के चलते वैश्विक तेल कीमतों में पहले ही बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे ईंधन, परिवहन और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो रही हैं।
सैटेलाइट तस्वीरों में दिख रही बड़ी तेल की परतें
यूरोपियन स्पेस एजेंसी के सेंटिनल सैटेलाइट डेटा और अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास हाल के हफ्तों में पानी पर तेल की परतें (ऑयल स्लिक्स) देखी गई हैं। 5 मार्च को कुवैत तट के पास, 10 अप्रैल को लावन द्वीप के आसपास, 22 अप्रैल को केशम द्वीप के पास और 6 मई को खार्ग द्वीप के पश्चिम में समुद्र की सतह पर तेल के बड़े धब्बे दिखाई दिए।खार्ग द्वीप के पास दिखाई दिया तेल का एक धब्बा करीब 120 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला था, जो किसी बड़े शहर के आकार के बराबर माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स ने रडार डेटा की मदद से इसका विश्लेषण किया।समुद्र की सतह पर तैरता तेल लहरों को शांत कर देता है, जिससे रडार तस्वीरों में काले और चिकने हिस्से दिखाई देते हैं। प्रोसेस्ड तस्वीरों में ऐसे संकेत मिले हैं, जो तेल रिसाव या तेल छोड़े जाने से मेल खाते हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर यह पूरी तरह साबित नहीं किया जा सकता कि ये धब्बे तेल ही हैं। कभी-कभी शैवाल, तलछट, सूरज की रोशनी या प्राकृतिक परतें भी ऐसे दृश्य बना सकती हैं। लेकिन तेल ढुलाई के समुद्री मार्गों और प्रमुख तेल फैसिलिटी के पास इन धब्बों का दिखना, साथ ही हालिया हमलों के बाद उनका सामने आना, तेल रिसाव या जानबूझकर समुद्र में तेल छोड़े जाने की आशंका को मजबूत करता है।
भारत समेत कई देशों की जरूरतें इस क्षेत्र पर निर्भर
फारस की खाड़ी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख केंद्र है। भारत, चीन, जापान और यूरोप के कई देश यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस आयात करते हैं। ऐसे में क्षेत्र में बढ़ता तनाव दुनिया की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता है।
पर्यावरण और समुद्री जीवन के लिए बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समुद्र में तेल छोड़ा जा रहा है, तो इससे समुद्री जीवन और पर्यावरण को भारी नुकसान हो सकता है। फारस की खाड़ी के समुद्री इलाकों में बड़ी संख्या में मछुआरे, कोरल रीफ और समुद्री जीव रहते हैं, जिन पर लाखों लोगों की आजीविका निर्भर करती है। समुद्र की सतह पर फैला तेल मछलियों के लिए जहर का काम कर सकता है, समुद्री पक्षियों को नुकसान पहुंचा सकता है और संवेदनशील समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर सकता है।इसी बीच ओमान के दक्षिणी धोफार इलाके के समुद्र तटों पर बड़ी संख्या में मरे हुए झींगे बहकर आने की खबरें भी सामने आई हैं। वैज्ञानिकों ने इसकी वजह समुद्र के पानी में ऑक्सीजन लेवल कम होने और समुद्री धाराओं को बताया है। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण को लेकर चिंता और बढ़ गई है।