इजराइल-ईरान युद्ध के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव बढ़ा। जानिए क्यों इस अहम समुद्री मार्ग पर ईरान का दबदबा ज्यादा है और इसका वैश्विक असर क्या होगा।
इजराइल-ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग चार सप्ताह से बाधित है। इस संकरे समुद्री रास्ते पर सिर्फ ईरान का अधिकार नहीं है। यह समुद्री मार्ग ईरान और ओमान के जलक्षेत्र के बीच बंटा हुआ है। यानी इस पर ओमान और ईरान दोनों का समान रूप से अधिकार है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दोनों देश अपनी तटरेखा से 12 समुद्री मील तक स्थानीय समुद्री जलक्षेत्र पर नियंत्रण रखते हैं। इसके बावजूद इस क्षेत्र में ईरान का प्रभाव अधिक है। इसकी कई वजहें हैं, लेकिन प्रमुख कारण ईरान की सैन्य ताकत का ओमान से कहीं ज्यादा होना है।
ग्लोबल मिलिट्री इंडेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान वैश्विक सैन्य सूचकांक में 13वें स्थान पर है, जबकि ओमान 54वें स्थान पर आता है। ईरान के पास 6,50,000 सक्रिय सैनिक हैं, जबकि ओमान के पास 47,000 सैनिक हैं, जो ईरान की तुलना में काफी कम हैं। इसके अलावा, ईरान के पास 3,50,000 रिजर्व सैनिक और 40,000 अर्धसैनिक बल भी हैं।रक्षा बजट की बात करें तो ईरान करीब 8 अरब डॉलर खर्च करता है, जबकि ओमान का रक्षा बजट लगभग 6 अरब डॉलर है। वायु सेना में ईरान के पास 627 विमान हैं, जिनमें 286 लड़ाकू जेट शामिल हैं, जबकि ओमान के पास 126 विमान हैं, जिनमें 35 लड़ाकू विमान हैं।
समुद्री बेड़े की बात करें तो ईरान के पास 97 जहाज हैं, जिनमें 6 पनडुब्बियां शामिल हैं, जबकि ओमान के पास 21 जहाज हैं और उसके पास कोई पनडुब्बी नहीं है। इससे साफ है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का प्रभाव ज्यादा क्यों है।
चोकपॉइंट पर ईरान की मजबूत पकड़
एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर कई मायनों में ईरान का पलड़ा भारी है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसके पक्ष में है। शिपिंग एनालिटिक्स फर्म वॉर्टेक्सा के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अपने सबसे संकरे बिंदु पर लगभग 24 मील चौड़ा है और लगभग सारा यातायात दो मुख्य शिपिंग लेन से होकर गुजरता है, जो इससे भी अधिक संकरी हैं।इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (IISS) के नौसेना और समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञ निक चाइल्ड्स के अनुसार, इसे “चोकपॉइंट” कहना बिल्कुल सही है। दुनिया में ऐसे कई चोकपॉइंट हैं, लेकिन यह एक अनूठा और चुनौतीपूर्ण मार्ग है, क्योंकि इसका कोई विकल्प नहीं है।
भौगोलिक स्थिति से मिलता है फायदा
ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अन्य नौसैनिक शक्तियों की तुलना में इसलिए मजबूत है, क्योंकि वह अपरंपरागत युद्ध तकनीकों का इस्तेमाल करता है। इनमें सस्ते ड्रोन, समुद्री माइंस और तेज गति से हमला करने वाले छोटे जहाज शामिल हैं।रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर किसी भी जहाज या युद्धपोत पर सटीक हमला कर सकता है। इससे अमेरिका या अन्य देशों के लिए जहाजों की सुरक्षा करना मुश्किल हो जाता है।
मार्ग बदलना नहीं है आसान
रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ केविन रोलैंड्स के अनुसार, खुले समुद्र में जहाज मार्ग बदल सकते हैं, लेकिन संकरे समुद्री मार्ग में यह संभव नहीं होता। इसका मतलब है कि ईरान को अपने लक्ष्य खोजने की जरूरत नहीं होती, बल्कि वह रणनीतिक रूप से इंतजार कर सकता है।अगर ईरान बारूदी सुरंगें बिछाने का फैसला करता है, तो उन्हें साधारण नावों से भी समुद्र में डाला जा सकता है। हालांकि अमेरिका ने ईरान की कुछ पारंपरिक नौसैनिक क्षमताओं को कमजोर किया है, लेकिन गैर-पारंपरिक हथियार अब भी बड़ा खतरा बने हुए हैं।
1,000 मील लंबी तटरेखा से बढ़ी ताकत
ईरान के पास करीब 1,000 मील लंबी तटरेखा है, जहां से वह जहाज रोधी मिसाइलें दाग सकता है। ये मिसाइल बैटरियां लगातार सक्रिय रहती हैं, जिससे इन्हें नष्ट करना मुश्किल होता है। इसके अलावा, उत्तरी ईरानी क्षेत्र में पहाड़, घाटियां, शहरी इलाके और द्वीप मौजूद हैं, जिससे दुश्मन के लिए खतरे का पता लगाना और भी कठिन हो जाता है।
फारस की खाड़ी में बढ़ते हमले
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के पास कम से कम 19 जहाजों को निशाना बनाया है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और बहरीन जैसे देश इस जलमार्ग की सुरक्षा के लिए रणनीति बना रहे हैं, लेकिन यह काम आसान नहीं माना जा रहा है।