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Iran Executions Raise Global Human Rights Concerns

ईरान में जारी है अपने ही युवाओ का कत्लेआम: आखिर क्यों नहीं उठ रही इन हत्याओं पर आवाज?

सोनाली मिश्रा


ईरान में जारी है अपने ही युवाओ का कत्लेआम आखिर क्यों नहीं उठ रही इन हत्याओं पर आवाज

मिडल ईस्ट में इन दिनों युद्ध का माहौल है। अमेरिका और ईरान दोनों ही युद्ध कर रहे हैं, मगर ईरान की जनता युद्ध की विभीषिका के साथ एक और विभीषिका का सामना कर रही है और वह है ईरान की सरकार द्वारा अपने ही युवाओं को फांसी पर चढ़ाने की।

ईरान में दिसंबर और जनवरी में सरकार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले युवाओं और किशोरों को मौत के घाट उतारना जारी है। अब वहाँ पर एक उन्नीस वर्षीय कॉलेज विद्यार्थी और उसके साथ ही एक और व्यक्ति को फांसी पर चढ़ा दिया गया है। इन दोनों पर ही यह आरोप था कि इन दोनों ने दिसंबर और जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया था।

नॉर्वे स्थित मानवाधिकार संगठन 'हेंगाव' के अनुसार, 19 वर्षीय मोहम्मद-अमीन बिग्लारी और 30 वर्षीय शाहिन वाहेदपरस्त कालौर को कराज की एक जेल में इस्लामिक स्टेट द्वारा फाँसी दे दी गई। ये उन हालिया प्रदर्शनकारियों में शामिल थे जिन पर अल्लाह के खिलाफ जंग छेड़ने' का आरोप लगाया गया था—जो कि ईरान में एक मृत्युदंड योग्य अपराध है।

इन दोनों पर यह आरोप था कि इन्होनें तेहरान में एक ऐसे बेस को जलाया है, जो ईरान के बसीज वालन्टीर बल से जुड़ा था और उन्होनें इस परिसर में घुसने का प्रयास किया था। इसके साथ ही 4 अप्रेल को भी 2 और लोगों को ईरान की सरकार ने फांसी पर चढ़ा दिया था। शनिवार को यह फांसी दी गई थी। राजनीतिक कैदी—66 वर्षीय आर्किटेक्ट अबुलहसन मोंताज़ेर और मैनेजमेंट में मास्टर डिग्रीधारी 33 वर्षीय वाहिद बानियामेरियन—को फाँसी दे दी गई।

इन दोनों पर आरोप था कि वे दोनों ही ईरान के पीपल्स मोजाहिदीन ऑर्गनाइज़ेशन नामक प्रतिबंधित संगठन के सदस्य थे। इन दोनों को फांसी देने से कुछ दिन पहले ही इस संगठन के चार और सदस्यों को फांसी पर लटका दिया गया था।

1 अप्रेल की nytimes की रिपोर्ट के अनुसार इस संगठन के चार सदस्यों को 48 घंटों के भीतर फांसी दे दी गई थी। नेशनल काउंसिल ऑफ रेसिस्टेंस ऑफ ईरान की फ़ॉरेन अफेयर्स कमिटी के अध्यक्ष मोहम्मद मोहद्दिसिन ने कहा कि इन चार लोगों की फांसी एक मजहबी और बहुत ही दमनकारी शासन की ओर से धमकाने का और नियंत्रण स्थापित करने का कदम है।

उन्होनें एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा कि उस समय में, जब ईरान बाहरी लोगों के साथ युद्ध लड़ रहा है, उस समय अपने ही देश के राजनीतिक कैदियों को फांसी देना उसके डर का प्रतीक है। यह बताता है कि शासन अपने ही लोगों को और संगठित विरोध को अपने लिए सबसे बड़ी चुनौती समझता है और उसके लिए बाहरी कारक कुछ नहीं है।

5 अप्रेल को जिन दो लोगों को फांसी पर लटकाया गया, उनपर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ अपराध करने के आरोप थे। 19 वर्षीय बिगलारी एक छात्र है और वह कम्यूटर साइंस पड़ रहा था। बिगलारी के वकील का कहन था कि उन्हें अपने क्लाइंट के बचाव का भी मौका नहीं दिया गया, न ही उन्हें उस केस की फ़ाइल दी गई।

ऐसा दावा किया जा रहा है कि 19 वर्षीय युवक ने अपने अपराध को “कुबूल” कर लिया था। हालांकि मीडिया के अनुसार उसका कबूलनामा स्पष्ट नहीं है और ईरान पर यह आरोप लगातार लगते आ रहे हैं कि वह कैदियों से जबरन अपराधों को कुबूल करवाता है।

दो ही दिनों में इतनी फाँसियों से यह नहीं समझ आ रहा है कि ईरान अपने ही देश के राजनीतिक कैदियों को इस संकट काल में क्यों मौत के घाट उतार रहा है? और वह भी ऐसे कि लोगों को उनके परिवारों से अंतिम बार मिलने भी नहीं दिया जा रहा है।

बिगलारी के पिता तब चर्चा में आए थे, जब वे 8-9 जनवरी को सरकार द्वारा किये गए नृशंस क्रैकडाउन के बाद लाशों के ढेर में से अपने बेटे की लाश खोजने के लिए आए थे, और उन्हें अपने बेटे की लाश नहीं मिली थी। उसके तीन सप्ताह बाद उन्हें यह पता चला कि उनका बेटा कैद में है और अब 5 अप्रेल को उनके बेटे को फांसी दे दी गई।

लेखिका- सोनाली मिश्रा

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