इजराइल-ईरान संघर्ष के बीच भारत ने ईरान को चिकित्सीय सहायता भेजी। दवाइयों और उपकरणों की पहली खेप पहुंची, मानवीय और कूटनीतिक संतुलन का उदाहरण।
पश्चिम एशिया में इजराइल, प ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे भयंकर संघर्ष के बीच भारत ने एक बार फिर कूटनीतिक परिपक्कता और मानवीय संवेदना का परिचय दिया है। ईरान में मची तबाही और स्वास्थ्य सेवाओं के चरमराने के बीच भारत द्वारा भेजी गई चिकित्सीय सहायता की पहली खेप का वहां पहुंचना, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में 'मानवता पहले' के सिद्धांत को रेखांकित करता है। भारत ने हमेशा ही अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को प्राथमिकता दी है।
जब ईरान का पूरा हेल्थकेयर सिस्टम संघर्ष के कारण भारी दबाव में है, ऐसे समय में भारत द्वारा जीवनरक्षक दवाइया और चिकित्सा उपकरण भेजना एक साहसिक और आवश्यक कदम है। यह मदद ईरानी रेड क्रिसेंट सोसायटी को सौंपी गई है, जो सीधे तौर पर युद्ध से प्रभावित नागरिकों तक पहुंचेगी। यह पहल केवल दो देशों के बीच के संबंध नहीं, बल्कि लोगों से लोगों के जुड़ाव को मजबूत करती है। ईरान में फंसे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ, वहां की आम जनता के लिए चिकित्सा सहायता भेजना भारत की एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में छवि को और पुख्ता करता है।
यह दर्शाता है कि भारत युद्ध के माहौल में भी कूटनीतिक संयम रखते हुए मानवीय आधार पर फैसले ले सकता है। ईरान के दूतावास ने भारत की इस मदद के लिए 'उदार और दयालु भारतीय लोगों' का शुक्रिया अदा किया है, जो इस बात का सबूत है कि इस कदम को वहां सराहना मिल रही है। इससे पहले, ईरान की तरफ से भारतीय नागरिकों से चंदे या सहायता की अपील भी की गई थी, जिसे भारत ने समझदारी और तत्परता से पूरा किया। भारत का यह कदम स्पष्ठ करता है कि वह क्षेत्र में शांति और स्थिरता का समर्थक है और संघर्ष की स्थिति में प्रभावितों को राहत पहुंचाने में पीछे नहीं हटेगा। यह केवल दवाइयों की खेप नहीं है, बल्कि संकट के समय में एक भरोसेमंद दोस्त की तरफ बढ़ाया गया हाथ है, जो युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी इंसानियत को जीवित रखता है।
एक तरफ जहां दुनिया के कई हिस्सों में तनाव और संघर्ष रहा है तो वहीं दूसरी तरफ भारत ने एक बार फिर दुनिया को इंसानियत का सबसे बड़ा संदेश दिया। भारत द्वारा संकट बढ़ हाथ बढ़ाए, उससे एक बात तो साफ है कि के समय जिस तरह ईरान के लिए मदद के दोनों देशों के संबंधों में मिठास घुली है। ईरान सरकार ने खुले दिल से भारतवासियों का आभार जताया है। दरअसल, भारत में ईरानी ने एक्स पर एक ट्विट करके जानकारी दी कि भारत के लोगों की ओर से भेजी गई चिकित्सीय सहायता की पहली किश्त सफलतापूर्वक ईरान पहुंच चुकी है। इस सहायता को सिर्फ सरकार की मदद नहीं बल्कि भारत की जनता की ओर से एक मानवीय सहयोग माना जा रहा है।
विशेषज्ञ इस मदद को सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि एक गहरी कूटनीतिक भाव के तौर पर देख रहे हैं। जो यह बताता है कि जब कोई देश मुश्किल समय में साथ खड़ा होता है तो उसके द्वारा दी गई सहायता सिर्फ राजनीतिक नहीं रहती बल्कि मानवीय रिश्तों में बदल जाती है। अब अगला सवाल ये है कि ईरान को भारत की मदद की जरूरत क्यों पड़ीं? इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। पहला स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव। किसी भी आपदा संकट या संघर्ष के दौरान चिकित्सीय संसाधनों की भारी कमी हो जाती है और इस वक्त ईरान, अमेरिका और इजराइल के युद्ध से जूझ रहा है। जहां अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान पर टूट पड़े हैं।
दूसरा है आर्थिक प्रतिबंधों का असर। ईरान पर लंबे समय से लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का असर उसकी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है और तीसरा है आपातकालीन जरूरतें। अचानक बढ़ती बीमारियों या आपदाओं के कारण दवाइयों और उपकरणों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में जब ईरान जंग से जूझ रहा है तब भारत की यह मदद बेहद अहम बन जाती है।