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PM Modi Diplomacy Amid Israel Iran Conflict

पेट्रोल, गैस को लेकर पेनिक होने की जरूरत नहीं

इजराइल-ईरान तनाव के बीच भारत सतर्क, पीएम मोदी की सक्रिय कूटनीति। वैश्विक नेताओं से बातचीत, ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन पर फोकस।


पेट्रोल गैस को लेकर पेनिक होने की जरूरत नहीं

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत चिंतित जरूर है और भविष्य में आने वाली हर समस्या से निपटने की तैयारी में भी जुट गया है। पिछले तीन चार दिनों से प्रधानमंत्री ने जिस तरह से इन संकटों से निपटने के लिए कमान संभाली है वो काबिले तारीफ है। वे बार-बार इस बात को लेकर आगाह भी कर रहे हैं कि फिलहाल किसी प्रकार का सकट नहीं है लेकिन इस बीच वे इसरो निपटने की तैयारियों में भी जुट गए हैं। वे लगातार अंतस्राष्ट्रीय स्तर पर अनेक देशों से सतत संवाद कर रहे हैं। 

उनका पहला उद्देश्य तो यही है कि किसी भी तरह से यह युद्ध खत्म हो और विश्व में शांति कायम हो। लेकिन इसके इतर वे इस पर भी काम कर रहे हैं कि यदि यह युद्ध नहीं थमता है तो क्या ट्रेजडी अपनायी जानी चाहिए जिससे देशवासियों को किसी प्रकार की समस्या से न जूझना पड़े। सरकार की ओर से बार-बार इस बात की ताकीद की जा रही है कि उन्हें पेनिक होने की जरूरत नहीं है जिस तरह से कोविड के समय देशवासियों ने धैर्य व संयम का परिचय दिया, ठीक उसी तरह से धैर्य बनाएं रखें। 

वास्तव में देखा जाए तो अभी ऐसा कोई संकट नहीं है जिससे लोग पेनिक हो और हड़‌बड़ी में कोई कदम उठाएं। इस समय कुछ लोग अफवाहें भी फैला रहे हैं जिससे लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार वैश्विक नेताओं से बातचीत कर संकट का हल 'डायलॉग और डिप्लोमेसी के जरिए निकालने पर जोर दे रहे हैं। इजराइल-ईरान-अमेरिका के बीच टकराव शुरू होने के बाद से पीएम मोदी कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों के संपर्क में हैं। उनका फोकस साफ है- तनाव कम हो, शांति बहाल हो और वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित न हो। 

प्रधानमंत्री मोदी युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों से सीधा संवाद कर चुके हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी से बात की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी के बीच बातचीत में पश्चिम एशिया के हालात और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की सुरक्षा अहम मुद्दा रहे। दोनों नेताओं ने माना कि इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है। दोनों नेताओं ने माना कि अगर तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

मंगलवार 24 मार्च को ही प्रधानमंत्री मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायका के बीच टेलीफोनपर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लाइनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर चर्चा की, जिसमें वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करने वाली बाधाओं पर विशेष जोर दिया गया। दोनों नेताओं ने पूरी दुनिया के हित में शिपिंग लाइनों को खुला और सुरक्षित रखने के महत्य को दोहराया। प्रधानमंत्री ने भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति और 'महासागर' विजन के अनुरूप, साझा चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करने की भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराया। 

प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से बात की। उन्होंने क्षेत्रीय घटनाक्रमों और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाने पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने उम्मीद जताई की कि यह त्योहारी मौसम पश्चिम एशियाई क्षेत्र के लिए शांति, स्थिरता और समृद्धि का दौर लेकर आएगा। पीएम मोदी ने क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हाल कहा ही में हुए हमलों की निंदा की। उन्होंने कि ऐसे कृत्य क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालते हैं और महत्वपूर्ण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करते है। प्रधानमंत्री ने नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के अत्यधिक महत्व को दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्ग खुले और सुरक्षित रहें। प्रधानमंत्री ने बहरीन के शाह हमद बिन ईसा अल खलीफा से बात की। बातचीत के दौरान, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने ऊर्जा और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा की। कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी की यह सक्रिय कूटनीति भारत को एक जिम्मेदार और संतुलित वैश्विक खिलाड़ी के तौर पर मजबूत कर रही है।

 

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