इफको का नैनो उर्वरक अभियान किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर मिट्टी स्वास्थ्य की दिशा में ले जा रहा है। जानिए इस पहल के फायदे और प्रभाव।
भारत में हरित क्रांति के दौरान रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बिना विचारवान उपयोग के परिणामस्वरूप, देश के कई राज्यों में व्यापक रूप से फसलों में फूल और फल नहीं आने की समस्या उत्पन्न हुई है। किसान इसे 'फसलों का बांझपन' कहते हैं और यह समस्या धीरे-धीरे आम होती जा रही है। इसके परिणामस्वरूप, देश की बड़ी कृषक आबादी को जैविक खेती और रासायनिक खाद-कीटनाशक रहित फसल उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इसी क्षेत्र में, भारतीय कृषक उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको) ने हाल ही में नैनो तरल उर्वरकों के विषय में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक राष्ट्रीय महाअभियान शुरू किया है। यह कार्यक्रम इफको सदन, नई दिल्ली में हुआ, जिसमें इफको के अध्यक्ष दिलीप संचणी और प्रबंध निदेशक केजे पटेल ने इस जागरूकता पहल पर व्यापक रूप से प्रकाश डाला। यह पहल भारतीय कृषकों की समस्याओं के समाधान के लिए समय की मांग है।
इफको नैनो उर्वरक जागरूकता महाअभियान का उद्देश्य नैनो उर्वरकों के बड़े पैमाने पर प्रचार करना, किसानों को सही तरीके से उपयोग करने का प्रशिक्षण देना, और आखिरी आदमी तक पहुंच पक्का करना है। इस अभियान के अंतर्गत, नैनो उर्वरक क्रांति को भारतीय कृषि के लिए एक परिवर्तनकारी क्षण माना जा रहा है।
इफको द्वारा बनाए गए नैनो उर्वरक, जैसे कि नैनो यूरिया प्लस, नैनो डीएपी, नैनो एनपीके, नैनो जिंक और नैनो कॉपर, पारंपरिक उर्वरकों के तुलना में अधिक कार्यक्षमता प्रदान करते हैं। इन उर्वरकों का उपयोग करने से मृदा स्वास्थ्य क्षरण, जल प्रदूषण और भारत की उर्वरक आयात निर्भरता की चुनौतियों को दूर किया जा सकता है।
इफको ने अब तक 218 लाख से अधिक बोतलें नैनो यूरिया प्लस लिक्विड और 64.26 लाख से अधिक बोतले नैनो डीएपी लिक्विड की बिक्री की है। इनके अलावा, इफको के नैनो जिंक और नैनो कॉपर उत्पादों ने भी पहले वर्ष में क्रमशः 57 लाख और दो लाख बोतलों की प्रभावशाली बिक्री की।
कुल मिलाकर, आज की आवश्यकता और चुनौतियों के आलोक में, कृषि की समृद्धि और धरती की सुरक्षा के लिए नवाचारों की आवश्यकता है, और इसमें नैनो उर्वरकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।