रायपुर और छत्तीसगढ़ में बढ़ता नशे का नेटवर्क, डराते आंकड़े और युवा पीढ़ी पर खतरा। क्या राज्य ‘उड़ता पंजाब’ बनता जा रहा है?
दिनेश यदु
उडता पंजाब की तरह कहीं उडता छत्तीसगढ़ न बन जाए। नशे का बढ़ता नेटवर्क, युवा पीढ़ी पर खतरा और प्रशासनिक अनदेखी क्या छत्तीसगढ़ भी उसी राह पर है, जहां से लौटना मुश्किल हो जाता है। उड़ता पंजाब कभी केवल एक फिल्म का नाम नहीं था, बल्कि एक राज्य की कड़वी सच्चाई का आईना था। वह सच्चाई, जिसमें नशा धीरे-धीरे समाज की नसों में घुल गया और पूरी पीढ़ी को अपनी गिरफ्त में ले लिया। आज वही डर छत्तीसगढ़ के संदर्भ में उभरता नजर आ रहा है। फर्क बस इतना है कि पंजाब ने देर से ही सही, अपनी समस्या को स्वीकार किया, जबकि छत्तीसगढ़ अभी भी नशे को इक्का-दुक्का घटनाओं और पुलिस की कार्रवाइयों तक सीमित मान रहा है। यही सोच अगर बनी रही, तो आने वाले समय में राज्य के लिए हालात संभालना बेहद मुश्किल हो सकता है।
- 2024 में रायपुर में 24,000 किग्रा गांजा एक दिन में नष्ट किया।
- 239 मामलों में दुर्ग में 83 आरोपियों को सजा हुई।

पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ में नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में लगातार इजाफा हुआ है। शुरुआत गांजा और शराब तक सीमित थी, लेकिन अब हेरोइन, सिंथेटिक ड्रग्स और इंजेक्शन के जरिए लिए जाने वाले नशे भी सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और पुलिस की कार्रवाई यह संकेत देती है कि छत्तीसगढ़ अब सिर्फ स्थानीय स्तर पर नशे की समस्या से नहीं जूझ रहा, बल्कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा बनता जा का है। सूत्रों और मामलों से यह बात सामने आती रही है कि हेरोइन और अन्य खतरनाक नशीले पदार्थ पाकिस्तान से पंजाब के रास्ते भारत में दाखिल होते हैं। वहां से यह नेटवर्क मध्य भारत की और फैलता है और छत्तीसगढ़ इसमें एक अहम कड़ी बनता जा रहा है। दूसरी ओर उड़ीसा, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल से गांजे की सप्लाई पाहले से ही जारी है। इन दोनों रूट्स के मिलने से छतीसगढ़ नशे के जाल में बुरी तरह फंसता दिखाई दे रहा है। यह वही पैटर्न है, जिसने कभी पंजाब को अंदर से खोखला कर दिया था। ऑपरेशन निश्चय और अन्य अभियानों के तहत रायपुर पुलिस ने बीते महीनों में करोड़ों की ड्रग्स जब्त की है, लेकिन अधिकारी मानते है कि डिमांड बनी रहने तक सप्लाई नए रास्ते खोजती रहेगी।
पुरानी घटनाओं से मिलते संकेत
बीते वर्षों में रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर और बस्तर जैसे इलाकों से नशे की खेप पकड़े जाने की कई घटनाएं सामने आई। कॉलेज छात्रों की गिरफ्तारी, स्कूल के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री और ग्रामीण इलाकों तक गांजे की पहुंच ये सभी घटनाएं बताती है कि समस्या अब सतह पर नहीं, बल्कि जड़ों में उतर चुकी है। कई मामलों में यह भी देखा गया कि छोटे कारोबारी, बेरोजगार युवक और यहां तक कि नाबालिग भी इस नेटवर्क का हिस्सा बनाए जा रहे हैं।
रायपुर ड्रग संकट के डराते आंकड़े
जब्ती और गिरफ्तारियां
(जनवरी 2024 दिसंबर 2024)-ड्रग्स से जुड़े मामलेः 120+, गिरफ्तार आरोपी 85 से अधिक, महिला आरोपी : 7, विदेशी नागरिकः 2 (नाइजीरियन)
बरामद प्रमुख नशा
एमडीएम / एक्स्टसीः करीब 5.2 किलोग्राम, हेरोइन / चिट्टा : 3 किलोग्राम से अधिक, गांजाः 900 किलोग्राम+, कोडीन सिरप : 15,000 से अधिक शीशियां
अनुमानित नशा कारोबार
ड्रग्स का मासिक कारोबार: 20-25 करोड़ रुपए, वार्षिक अनुमानः 250 300 करोड़ रुपए
किस आयु के सर्वाधिक चपेट में?
पुलिस विश्लेषण के अनुसार-18-25 वर्ष - 42 फीसदी, 26-35 वर्ष 38 फीसदी
प्रभावित वर्ग और दायरा
निजी विश्वविद्यालयों के छात्र, हॉस्टल /पीजी में रहने वाले युवक, नाइट पार्टी और क्लब कल्चर से जुड़े युवा
डिजिटल पेमेंट से नशा खरीदी
हर तरह के नशों के लिए क्यूआर कोड और वर्चुअल नंबर के जरिए सौदे किए जा रहे हैं, जिससे ट्रैक करना मुश्किल हो रहा है
ट्रांजिट से कंज्यूमर स्टेट बनने का खतरा
सबसे चिंताजनक बात यह है कि छत्तीसगढ़ अब केवल च्छ्रजिट स्टेट नहीं रहा। पहले माना जाता था कि यहां से नशा दूसरे राज्यों की ओर भेजा जाता है, लेकिन अब खपत स्थानीय स्तर पर तेजी से बढ़ रही है। गांव, करवे, शहरी बस्तियां, स्कूल और कॉलेज हर जगह नशे की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ एक 'कंज्यूमर स्टेट' बनता जा रहा है। इसका सीधा असर युवा पीढ़ी पर पड़ रहा है, जो किसी भी समाज का भविष्य होती है।
सिर्फ पुलिस कार्रवाई काफी नहीं
अब तक की रणनीति अधिकतर तस्करों की गिरफ्तारी और नशे की खेप पकड़ने तक सीमित रही है। यह जरूरी तो है, लेकिन पर्याप्त नहीं। नशा करने वाले और नशा बेचने वाले के बीच फर्क करना होगा। नशे की लत में फंसा युवक अपराधी से ज्यादा एक मरीज है, जिसे इलाज, परामर्श और पुनर्वास की जरूरत है। दूसरी ओर, संगठित तस्करी करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पंजाब से सीखने का मौका
जाकर सरकार, प्रशासन और समाज एकजुट हुए। आज छत्तीसगढ़ के पास वही गलती दोहराने से बचने का मौका है। स्कूलों में जागरूकता, परिवारों की भूमिका, सामुदायिक निगरानी, नशा मुक्ति केंद्रों को मजबूती और राजनीतिक इच्छाशक्ति-इन सभी मोचों पर एक साथ काम करना होगा।
जब्ती, नष्टीकरण और बुलडोजर
पंजाब ने अपनी गलती की कीमत चुकाई है। चहां नते ने पूरे समाज को झकझोर दिया, तबछत्तीसगढ़ में नशे के खिलाफ कार्रवाई केवल तस्करी तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि भंडारण केंद्रों को खत्म किया गया। अवैध कमाई से बने मकानों पर बुलडोजर चलाया गया। अंतरराज्यीय सिंडिकेट को बेनकाब किया गया और नशा करने वालों पर भी कानूनी शिकंजा कसा गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह रणनीति जानबूझकर अपनाई गई ताकि नशे की पूरी श्रृंखला-उत्पादन से लेकर सेवन तक-एक साथ टूटे।
9 साल का ज़हर एक दिन में खाक
महासमुंद जिले में पुलिस ने 2016 से 2024 के बीच जब्त किए गए 938.545 किलोग्राम गांजे को एक साथ नष्ट किया। करीब डेढ़ करोड़ रुपये कीमत का यह गांजा जिले के 33 एनडीपीएस मामलों में जब्त किया गया था। न्यायालय में सभी मामलों के अंतिम निर्णय और अपील अवधि समाप्त होने के बाद 1 जनवरी 2025 को नष्टीकरण की अनुमति मिली।
गांजे से बिजली, अपराध से ऊर्जा तक का सफर
जून 2022 में प्रदेश की न्यापधानी बिलासपुर के पॉवर प्लांट में पहली बार गांजे से बिजली उत्पादन किया गया है। उत्कालीन आईजी रतनलाल डांगी के निर्देश पर में जब्त 12 टन गांजा को बायोमास प्लॉट में जलाकर नष्ट किया गया है। ये करीब एक घंटे तक जलता रख जिससे 5 मेगावॉट बिजली का उत्पादन हुआ है राज्य में पहली बार ऐसा हुआ है कि गांजा नष्टीकरण को बिजली उत्पादन के लिए उपयोग किया गया। इससे नशीले पदार्थों का सुरक्षित नहीकरण हुआ, सरकारी खर्च में कमी आई है।
चार करोड़ का नशा भट्टी में झोंका
सूरजपुर में करीब 1162.67 किलो गांजा जिसे 2023 में पकड़ा गया था। इसके अलावा 1650 गांजा पौधे, 21.08 किलो डोडा को पावर प्लॉट में नष्ट किया गया। इनकी कुल बाजार कीमत 4 करोड़ 31 लाख आंकी गई। यह प्रक्रिया तत्कालीन आईजी अंकित गर्ग की अध्यक्षता में गठित समिति की निगरानी में की गई थी।
109 मामलों का नशा एक साथ खत्म
4 सितंबर 2025 को बिलासपुर में 697.692 किलो गांजा, 42,592 एम्पुल, 73,822 कैप्सूल, 5,678 इंजेक्शन को पावर प्लांट, मोहतराई में नष्ट किया गया। जिसकी कीमत 85.62 लाख रुपए थी, गांजे को भट्टी में जलाया गया, जबकि अन्य नशीली दवाओं को बुलडोजर से कुचलकर नष्ट किया गया।
साढ़े तीन साल का नशा साफ
सिंतबर 2024 में पुर्ण जिले में 1620.49 किलो गांजा हेरोइन, ब्राउन शुगर, हजारों टैबलेट, कैप्सूल और सिरप जब्त किए गए। 239 मामलों में 83 आरोपियों को सजा भी हो चुकी है। एसएसपी विजय अग्रवाल ने तब कहा था कि नशा युवाओं के भविष्य पर हमला है, और कानून इसका जवाब पूरी सख्ती से देता है।
तस्करों के ठिकानों पर बुलडोजर
सितंबर 2024 को राजधानी रायपुर में पुलिस और नारकोटिक्स विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 24,000 किलोग्राम गांजा सिलतरा स्थित निजी पावर प्लांट में नष्ट किया गया। यह गांजा महासमुंद, बलौदाबाजार, गरियाबंद और धमतरी जिलों से जब्त किया गया था।सितंबर 2025 को रायपुर के डेरापारा इलाके में 15 अवैध मकानों पर बुलडोजर चला। पुलिस की जांच में सामने आया था कि जमीन नगर निगम की थी। मकान अवैध रूप से बने थे। इन्हीं से गांजा और शराब की बिक्री होती थी। बिजली कनेक्शन भी चोरी का था। नगर निगम और चिजली विभाग की पुष्टि के बाद कार्रवाई की गई।
'न्यूड पार्टी' का खुलासाः 'अपरिचित क्लब' के 1016 फॉलोअर्स
21 सितंबर 2024 राजधानी रायपुर मेंसोशल मीडिया के जरिए प्रचारित की जा रही कथित 'न्यूड पार्टी' का मामला सामने आया था।' अपरिचित क्लब' नाम से बनाए गए इंस्टाग्राम पेज के उस समय 1016 फॉलोअर्स थे, जिनमें राजनेता कारोबारी, वकील और बॉडी मसाज से जुड़े लोग शामिल पाए गए थे। पुलिस के अनुसार, 21 सितंबर को भाठागांव स्थित एसएस फॉर्म हाउस में इस पार्टी के आयोजन की योजना थी। इसके लिए 21 लोगों ने बिना कपड़े के शामिल होने का रजिस्ट्रेशन कराया था। आयोजकों ने 40 हजार से 1 लाख रुपए तक एंट्री फीस तय की थी और पार्टी में ड्रग्स परोसने की तैयारी के भी इनपुट मिले थे। मामला सामने आते ही पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि दो आरोपी फरार रहे। साइबर यूनिट ने सोशल मीडिया अकाउंट और लेन-देन की तकनीकी जांच की थी।
नाइजीरियन नेटवर्क: विदेशी चेहरा, स्थानीय कैरियर
ड्रग्स तस्करी के मामलों में नाइजीरियन नागरिक पैट्रिक यूबीके बावको और मिस्टर इनोसेंट ओलोचुकु की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पुष्टि की। पूछताछ में सामने आया कि एमडीएमए की सप्लाई दिल्लीङ्कमुबई से रायपुर तक झलोकल कैरियर मॉडलऊ पर की जा रही थी। एसएसपी डॉ लाल उमेद सिंह के अनुसार विदेशी सप्लायर पीछे रहते हैं, डिलीवरी स्थानीय युवक करते हैं। इससे नेटवर्क जल्दी पकड में नहीं आता। पंजाब-पाकिस्तान रूट भी सक्रिय एक अन्य मामले में खुलासा हुआ कि पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए पंजाब लाई गई हैरोइन को रायपुर, बिलासपुर और धमतरी तक खपाया जा रहा था। इस नेटवर्क का सरगना रूपिन्दर सिंह उर्फ पिंदर था, जिसके पास से पाकिस्तान मेड पिस्टल और जिंदा कारतूस भी बरामद हुए।

रायपुर बना इंटर स्टेट व इंटरनेशनल ड्रग ट्रांजिट हब
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नशे का कारोबार अब केवल झुग्गी-बस्तियों या अपराधियों तक सीमित नहीं रहा। पुलिस और नारकोटिक्स विभाग की जांच बताती है कि यह नेटवर्क बीआईपी नाइट पार्टियों, क्लब-पब, फार्महाउस और निजी विश्वविद्यालयों तक गहराई से फैल चुका है। बीते एक वर्ष में हुई कार्रवाइयों ने रायपुर को इंटर स्टेट और इंटरनेशनल ड्रग ट्राजिट हब के रूप में उजागर कर दिया है। अगस्त 2024 में देवेंद्र नगर ओवरब्रिज के नीचे पकड़े गए तीन आरोपियों-हर्ष आहूजा, मोनू विश्नोई और दीप धनोरिया से पूछताछ के बाद मुंबई लिंक सामने आया। इसी कड़ी में इंटीरियर डिजाइनर नव्या मलिक की गिरफ्तारी हुई. जो नाइट पार्टियों के लिए एमडीएमए और एक्स्टसी मंगवाने का काम कर रही थी। पुलिस को नव्या के मोबाइल से 36 से अधिक युवाओं की चैट मिलो, जिनमें कॉलेज और निजी विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राएं शामिल थे। इससे साफ हो गया कि नशा अब 'अपराधियों का नहीं, शहरी युवाओं का संकट बन चुका है।
एमडीएमए सिंडिकेट का न्यू ईयर से पहले भंडाफोड़
न्यू ईयर इंव से पहले पुलिस ने एमडीएमए सप्लाई करने वाले अंतरराज्यीय सिडिकेट का पर्दाफाश किया। गिरफ्तार हुए नागपूर का तस्कर, एक इवेंट ऑर्गनाइजर, एक किशोरी सहित 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इग्स का भयावह जाल वीआईपी नाइट पार्टियों से कॉलेज, यूनिवर्सिटी तक फैला नेटवर्क, मुंबई, दिल्ली, पंजाब और विदेशी लिंक उजागर