Breaking News
  • देश के 10 राज्यों में इस हफ्ते तेज गर्मी, मौसम विभाग के मुताबिक 24 मई तक सभी राज्यों में हीटवेव का असर
  • काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भीड़, 1KM लंबी लाइन लगी
  • भोपाल में पेट्रोल ₹110.75 प्रति लीटर, इंदौर में ₹110.79 हुआ; 5 दिन में दूसरी बार बढ़ी कीमतें
  • IPL- हैदराबाद प्लेऑफ में पहुंची, चेन्नई को 5 विकेट से हराया
  • पेट्रोल-डीजल 90 पैसे महंगा: दिल्ली में पेट्रोल 98.64 और डीजल 91.58 रुपए लीटर हुआ

होम > विशेष

Dark Side Of BPO Corporate Culture

कॉर्पोरेट चमक के पीछे का अंधेराः बीपीओ सेक्टर में जबरन कन्वर्जन और यौन उत्पीड़न का कड़वा सच

बीपीओ और कॉर्पोरेट सेक्टर में कार्यस्थल सुरक्षा, यौन उत्पीड़न और जबरन कन्वर्जन जैसे गंभीर आरोपों ने नई बहस छेड़ दी है। जानिए रिपोर्ट में उठाए गए बड़े सवाल।


कॉर्पोरेट चमक के पीछे का अंधेराः बीपीओ सेक्टर में जबरन कन्वर्जन और यौन उत्पीड़न का कड़वा सच

डॉ. राकेश शर्मा 

वीपीओ और कॉर्पोरेट सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, लेकिन इनकी सफलता तभी सार्थक है जब कार्यस्थल सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वतंत्र हो। जबरन कन्वर्जन और यौन उत्पीड़न जैसी घटनाएं न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि मानव अधिकारों पर भी सीधा हमला हैं। एक सुरक्षित और न्यायपूर्ण कार्यस्थल बनाना केवल कानून का नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी का भी विषय है.

आधुनिक भारत के कॉर्पोरेट और डिजिटल परिवर्तन का एक उदाहरण माना जाता है, जो प्राचीन भारतीय अर्थव्यवस्था (कृषि, हस्तशिल्प, स्थानीय व्यापार) से आगे बढ़कर सेवा-आधारित अर्थव्यवस्था की और संक्रमण को दर्शाता है। वर्ष 2018 के आसपास इस केंद्र की स्थापना भारत सरकार की डिजिटल योजनाओं के अंतर्गत की गई थी, जिसका उद्देश्य छोटे शहरों में रोजगार सृजन करना और युवाओं को आईटी तथा बीपीओ सेक्टर में जोड़ना था। शुरुआत में लगभग 150 युवाओं को रोजगार मिला, जिसे धीरे-धीरे 1000 तक बढ़ाने की योजना थी। यह परिवर्तन इस बात का संकेत है कि भारत का कॉर्परिट सेक्टर अब महानगरों से निकलकर टियर-2 शहरों तक फैल चुका है।

कॉर्पोरेट सेक्टर में बीपीओ उद्योग का मुख्य कार्य बैंक ऑफिस सेवाएं, ग्राहक सेवा डेटा प्रोसेसिंग और अंतरराष्ट्रीय क्लाइंट्स के लिए आउटसोर्सिंग सेवाएं प्रदान करना है। नासिक जैसे शहरों में इस प्रकार के केंद्र स्थापित होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह बढ़ा, युवाओं को रोजगार मिला और वैश्विक कंपनियों के साथ जुड़ने का अवसर मिला। यह भारत के 'सेवा क्षेत्र आधारित विकास मॉडल' को मजबूत करता है, जो प्राचीन उत्पादन आधारित अर्थव्यवस्था से बिल्कुल अलग है।

आज के आधुनिक भारत में बीपीओ और कॉर्पोरेट सेक्टर युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा स्रोत बन चुके हैं। इन क्षेत्रों ने आर्थिक विकास को गति दी है, लेकिन इसके साथ कुछ गंभीर सामाजिक और नैतिक चुनौतियों भी सामने आई हैं। जबरन कन्वर्जन और यौन उत्पीड़न जैसे मुद्दे न केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला करते हैं, बल्कि कार्यस्थल की गरिमा और सुरक्षा को भी प्रभावित करते हैं।

बीपीओ और कॉर्पोरेट जगत की चकाचौंध के पीछे कभी-कभी कुछ ऐसे काले सच छिपे होते हैं, जो मुख्यधारा की चर्चाओं से दूर रह जाते हैं। हाल के वर्षों में जबरन कन्वर्जन और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर मुद्दों ने 'इनसाइट स्टोरीज' के जरिए कॉर्परिट कल्चर की नैतिकता पर सवाल खड़े किए हैं। नासिक स्थित चीपीओ यूनिट में जबरन कन्वर्जन और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसकी जांच वर्तमान में महाराष्ट्र पुलिस की एसआईटी और एटीएस कर रही है.

चमकती खिड़कियां, अंधेरे केबिन' कांच की दीवारों के पीछे का 'पावर गेम' बीपीओ सेक्टर की चकाचौंध, नाइट शिफ्ट्स और 'फ्रेंडली वर्क कल्चर' के नाम पर जो कुछ नासिक में हुआ, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए चेतावनी है। जांच में सामने आया है कि यहां यौन उत्पीड़न केवल व्यक्तिगत दुराचार नहीं, बल्कि एक संगठित दबाव का हिस्सा था। क्वायड प्रो क्यों (कुछ के बदले कुछ): रिपोर्ट बताती है कि करियर की रेटिंग्स, प्रोबेशन पीरियड का डर और प्रमोशन को ढाल बनाकर जूनियर महिला कर्मचारियों का मानसिक और शारीरिक शोषण किया गया। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और एचआर की पीओएसएच (आंतरिक शिकायत कमेटी) चुप्पी साथ ले, तो कार्यस्थल एक 'टॉक्सिक हब' में बदल जाता है। जो होगा 'शुद्धिकरण' का नया कॉर्पोरेट मॉडल ?

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू है-जबरन कन्वर्जन। यह कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी मनोवैज्ञानिक रणनीति थी सॉफ्ट टार्गेटिंग पहले शोषण के जरिए कर्मचारी का आत्मसम्मान तोड़ना। फेक काउंसलिंग 'स्ट्रेस मैनेजमेंट' और 'पीस ऑफ माइंड' के नाम पर विशेष धार्मिक सभाओं में ले जाना। गिल्ट ट्रैप पीड़ित को यह अहसास कराना कि वह 'अपवित्र' हो चुका है और उसको पुरानी आस्था उसे नहीं बचा पाएगी। कन्वर्जन ही समाधान अंततः एक नए धर्म को 'सुरक्षा कवच' और 'करियर ग्रोथ' की गारंटी के रूप में पेश करना। 'यह कन्वर्जन श्रद्धा से नहीं, बल्कि भय और होन भावना की नींव पर खड़ा किया गया एक सुनियोजित 'कन्वर्जन सिंडिकेट' प्रतीत होता है।

कॉर्पोरेट संस्कृति का वास्तविक परिदृश्य बीपीओ और मल्टीनेशनल कंपनियां अक्सर 24×7 काम करती है, जहां नाइट शिफ्ट, विविध सांस्कृतिक माहौल और उच्च दवाव का वातावरण होता है। ऐसे माहौल में कर्मचारी मानसिक और भावनात्मक रूप से अधिक संवेदनशील हो सकते है पावर डायनामिक्स (सीनियर जूनियर संबंध) का दुरुपयोग संभव होता है निगरानी और शिकायत तंत्र की कभी कई बार समस्याओं को बढ़ा देती है। भारत का बीपीओ और कॉर्पोरेट सेक्टर खुद को आधुनिकता, प्रोफेशनलिज्म और 'सेफ वर्कप्लेस' का चेहरा बताता है। लेकिन इस चमकदार सतह के नीचे एक ऐसा अंधेरा भी है, जिसके बारे में खुलकर बात नहीं की जाती जबरन कन्वर्जन और यौन उत्पीड़न। यह केवल अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि सिस्टम की खामियों और जवाबदेही की कमी का नतीजा है.

यौन उत्पीड़न 'ऑफिस कल्चर' के नाम पर अपराध 'थोड़ा फ्रेंडली रही', 'ये तो मजाक था' ऐसे वाक्य अक्सर उस व्यवहार को छुपाने के लिए इस्तेमाल होते हैं जो स्पष्ट रूप से यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आता है। कॉर्पोरेट जगत में कन्वर्जन की प्रक्रिया अक्सर सीधी नहीं होती, बल्कि बहुत ही सूक्ष्म होती है। करियर ग्रोथ का लालच कुछ मामलों में यह देखा गया है कि पदोन्नति या बेहतर इंसेंटिव्स के लिए किसी विशेष धार्मिक समूह का हिस्सा बनने का दबाव बनाया जाता है। प्रार्थना सभाएं और वर्कशॉप 'स्ट्रेस मैनेजमेंट' या 'स्पिरिचुअल हीलिंग' के नाम पर ऐसी सभाएं आयोजित की जाती हैं जहां धीरे-धीरे किसी खास धर्म की श्रेष्ठता स्थापित की जाती है। सामाजिक बहिष्कार का डर जो कर्मचारी इस विचारधारा को नहीं अपनाते, उन्हें अक्सर टीम में अलग-थलग कर दिया जाता है।

यौन उत्पीड़न 'पॉवर डायनामिक्स' का खेल बीपीओ यूनिट्स में यौन उत्पीड़न की घटनाएं अक्सर 'क्वायड प्रो क्यो' (कुछ के बदले कुछ) के सिद्धांत पर चलती हैं। नाइट शिफ्ट का फायदा नाइट शिफ्ट्स के दौरान सुरक्षा और निगरानी की कमी का फायदा उठाकर सुपरवाइजर्स द्वारा शोषण की खबरें सामने आती रही हैं। शिकायत तंत्र की विफलता हालांकि हर कंपनी में पीओएसएच कमेटी होती है, लेकिन कई बार पीड़ित करियर खत्म होने के डर से या कंपनी की साख बचाने के दबाव में शिकायत नहीं कर पाते। कन्वर्जन और यौन शोषण का गठजोड़ कुछ भयावह मामलों में यह भी देखा गया है कि यौन शोषण के शिकार व्यक्ति को 'पाप मुक्ति' या 'शुद्धिकरण' के नाम पर कन्वर्जन के लिए मजबूर किया गया।



 

Related to this topic: