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Historic Mandate Reshapes Indian Politics

यह जनादेश, असाधारण है

पांच राज्यों के चुनाव परिणामों ने भारतीय राजनीति की दिशा बदलने का संकेत दिया है। यह जनादेश केवल सत्ता नहीं, बल्कि वैचारिक बदलाव और प्रदर्शन आधारित राजनीति की जीत माना जा रहा है।


यह जनादेश असाधारण है

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अतुल तारे

यह जनादेश सिर्फ सत्ता के चयन के लिए नहीं है।

यह जनादेश, भारतीय राजनीति की भविष्य की दिशा का जयघोष है।

यह जनादेश, प्रदर्शन के सम्मान के लिए है।

यह जनादेश, वामपंथ के आखरी किले के ढहने का भी संकेत है।

यह जनादेश, विभेदकारी द्रविड़ राजनीति के दरकने का भी जयघोष है।

और...

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यह जनादेश, भारतीय जनता पार्टी के वैचारिक अधिष्ठान के निर्णायक विजय का भी नाद है।

असाधारण है, यह जनादेश। भारतीय लोकतंत्र परिपक्व हो रहा है। पांचों राज्य की जनता जनार्दन का हार्दिक अभिनंदन। भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का हार्दिक अभिनंदन।

क्यों, असाधारण है, यह जनादेश?

आसाम, देश का सीमावर्ती राज्य। देश के इस पूर्वोत्तर राज्य में राष्ट्रीय विचार की स्थापना के लिए हजारों हजारों कार्यकर्ताओं ने अपना सर्वस्व बलिदान किया। आसाम में भाजपा की सरकार को अस्थिर करने के लिए कई षड्यंत्र हुए। पर, भाजपा ने प्रमाणित कर दिया कि वह सिर्फ सरकार बनाना ही नहीं जानती, वह प्रदर्शन से विश्वास कमाती है और सरकार बरकरार रखती है। यही परंपरा पुडुचेरी में भी कायम रखने में भाजपा सफल रही।

तमिलनाडु में डीएमके की पराजय एक सत्ताधारी पार्टी की पराजय मात्र नहीं है। हिंदू धर्म को डेंगू बताने वाली विभेदकारी द्रविड़ राजनीति की भी पराजय है। एआईडीएमके भी सत्ता में नहीं है। एक नए विजय की पटकथा को समझना होगा।

केरल, वामपंथ का अंतिम आशाबिंदु

था। आज वहां भी उसकी विदाई की घोषणा हो जाती है।

इन चार राज्यों के अलावा न सिर्फ देश की, अपितु देश के बाहर की भी निगाहें जिस राज्य पर थीं, वह था पश्चिम बंगाल।

रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, राजा राम मोहन राय, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, सुभाषचंद्र बोस और डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मभूमि पर हिंदू होना एक अपराध हो गया था। बांग्लादेशी मुसलमान के लिए यह स्वर्ग हो गया था। दुर्गा की भूमि पर नारी अस्मिता का चीरहरण हो रहा था। वामपंथ के अराजक तत्वों ने तृणमूल के कार्यकर्ताओं का चोला पहनकर आतंक बरपा रखा था।

देश के गृह मंत्री को चुनाव परिणाम के बाद रात 12 बजे तक बंगाल में रहने की चुनौती देने का दुस्साहस करना यह दर्शा रहा था कि अराजक तत्व ने किस प्रकार लोकतंत्र को बंधक बना दिया है।

भारतीय जनसंघ की स्थापना डॉक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने की थी और कश्मीर में देश के लिए बलिदान दिया।

संकल्प से सिद्धि की विजय है। आज उसी पश्चिम बंगाल में भाजपा की विजय एक अभूतपूर्व जीत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ठीक कहा कि यह

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली, मालदा, मुर्शिदाबाद का दर्द पूरे देश ने झेला है। एक अस्पताल में एक युवती के साथ हुई जघन्य वारदात ने देश को शर्मसार किया है। पश्चिम बंगाल ने एक बड़ी उम्मीद से वामपंथ के आतंक से मुक्ति के लिए तृणमूल को चुना था। पर भोगा ममता का निर्मम चेहरा।

भाजपा नेतृत्व ने एक स्पष्ट रणनीति के साथ पश्चिम बंगाल की शक्ति का आह्वान किया, परिणाम सामने है।

अतः प्रणाम है इस जनादेश के रचयिता को।

भाजपा के लिए यह जनादेश और अधिक दायित्व बोध लेकर आया है। नेतृत्व, इस बोध से सचेत होगा, ऐसा विश्वास करना चाहिए।

बिहार से गंगा जी का गंगा सागर में प्रवेश देश के लिए शुभ हो, यही कामना।

 

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