ईरान-अमेरिका तनाव के बीच बीना स्थित बीपीसीएल रिफाइनरी में उत्पादन सामान्य बना हुआ है। गुजरात के वाडिनार क्रूड ऑयल टर्मिनल से पर्याप्त कच्चा तेल मिलने के कारण सप्लाई चेन पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ा है।
गुजरात के वाडिनार से आ रहा कच्चा तेल, जहां पर्याप्त स्टॉक है
ईरान-अमेरिका युद्ध की परिस्थितियों के बीच बीना स्थित बीपीसीएल रिफाइनरी में उत्पादन सामान्य रूप से जारी है। रिफाइनरी प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में क्रूड ऑयल की पर्याप्त उपलब्धता है और उत्पादन क्षमता पर किसी प्रकार का असर नहीं पड़ा है। रिफाइनरी के लिए कच्चा तेल गुजरात स्थित क्रूड आइल टर्मिनल (सीओटी) वाडिनार से आ रहा है।
रिफाइनरी के अधिकारियों ने बताया कि बीपीसीएल की देश में तीन प्रमुख रिफाइनरी संचालित हैं, इनमें एक बीना रिफाइनरी भी शामिल है। वर्तमान में बीना रिफाइनरी 7.8 मिलियन मेट्रिक टन प्रतिवर्ष (एमएमटीपीए) की क्षमता से उत्पादन कर रही है। मिडिल ईस्ट में जंग शुरू होने से अरब देश इसकी चपेट में आ गए हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए आशंका जताई जा रही थी कि यदि कच्चे तेल की सप्लाई चेन प्रभावित होती है तो बीना रिफाइनरी की उत्पादन क्षमता पर असर पड़ सकता है लेकिन अभी तक बीना रिफाइनरी में इसका कोई असर नहीं है।
अधिकारियों ने बताया कि तीनों रिफाइनरियों के लिए समुद्री मार्ग से आने वाले कच्चे तेल का पर्याप्त भंडारण गुजरात के वाडिनार सीओटी (क्रूड ऑयल टर्मिल) में उपलब्ध है। बीना रिफाइनरी को क्रूड ऑयल मुख्य रूप से गुजरात के वाडिनार से लगभग 750 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन के माध्यम से प्राप्त होता है। इससे सप्लाई निर्बाध बनी हुई है। बीना रिफाइनरी के पीआरओ केपी मिश्रा के अनुसार भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल अरब देशों से आयात करता है, यदि जंग लंबी चली तो भविष्य में कुछ हद तक कच्चे तेल की सप्लाई पर प्रभाव पर सड़ता है। लेकिन अभी ऐसी स्थिति नहीं बनी। हमारे यहां कच्चे तेल की सप्लाई कम नहीं हुई। हमें जितने कच्चे तेल की जरूरत है, वह गुजरात से आ रहा है।
बढ़ाई जा रही क्षमता
वीना रिफाइनरी में वर्तमान में विस्तार कार्य जारी है। इसकी क्षमता 11 एमएमटी की जानी है। अभी यहां सालाना 7.8 मिलियन मेट्रिक टन उत्पादन होता है। इसका अर्थ है कि यहां साल भर में करीब 78 लाख टन कच्चा तेल प्रोसेस किया जाता है। दैनिक स्तर पर देखें तो रिफाइनरी में लगभग 21 से 22 हजार टन क्रूड ऑयल प्रतिदिन रिफाइन होता है। इसके बाद पेट्रोलियम उत्पादों के साथ-साथ पेट्रोकेमिकल उद्योग के लिए कच्चा माल भी यहां तैयार किया जाएगा।
रिफाइनरी में एलपीजी का भी उत्पादन रिफाइनिंग प्रक्रिया के दौरान बीना रिफाइनरी में कच्चे तेल को अलग-अलग पेट्रोलियम उत्पादों में बदला जाता है। बीना रिफाइनरी में प्रतिदिन के हिंसाब से डीजल (एचएसडी) लगभग 12,000 टन, पेट्रोल (एमएस)लगभग 3,600 से 3,700 टन, केरोसिन और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) करीब 1,500 टन, लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लगभग 700 से 750 टन, पेटकोक करीब 1,550 टन, सल्फर लगभग 340 टन तैयार की जा रही है। यदि सिर्फ एलपीजी उत्पादन को ही देखें तो बीना रिफाइनरी से रोज करीब 700 टन गैस निकलती है, जो लगभग 50 से 60 हजार घरेलू गैस सिलेंडरों के बराबर होती है। यह एलपीजी कई राज्यों तक पहुंचती है, जिसका ईंधन के रूप में उपयोग होता है।
अंतरराष्ट्रीय संकटों में भी अहम भूमिका
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति अक्सर अतरराष्ट्रीय राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित होती रही है। विशेषकर मध्य-पूर्व क्षेत्र में तनाव और ईरान से जुड़े संभावित संकटों का असर दुनिया के तेल बाजार पर पड़ता है। ऐसे समय में देश के भीतर मजबूत रिफाइनिंग क्षमता होना ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीना रिफाइनरी जैसी परियोजनाएं भारत को ईंधन आपूर्ति के मामले में आत्मनिर्भर और स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मध्य भारत की ऊर्जा जीवनरेखा
कुल मिलाकर बीना रिफाइनरी आज मध्य भारत की ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ बन चुकी है। यहां प्रतिदिन बनने वाले हजारों टन पेट्रोल-डीजल और हजारों सिलेंडर गैस न केवल प्रदेश बल्कि देश के कई हिस्सों की ईंधन जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
उत्पादन पर कोई असर नहीं
बीना रिफाइनरी में अभी तक उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ा है। रिफाइनरी के लिए कच्चा तेल गुजरात स्थित कूड आइल टर्मिनल (सीओटी) वाडिनार से आ रहा है। जहां पर्याप्त स्टॉक है। कच्चे तेल की सप्लाई कम नहीं हुई। हमें जितने कच्चे तेल की जरूरत है, वह मिल रहा है। उत्पादन पहले पूर्व की क्षमता के अनुसार ही चल रहा है।
- केपी मिश्रा, जनसंपर्क अधिकारी, बीना रिफाइनरी