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असम में BJP की जीत का मंत्र क्या?

'जाति, माटी, भेटी' के दम पर भाजपा ने जीतीं 65 फीसदी सीटें

रिकॉर्ड: भाजपा के नेतृत्व में असम में जीत की हैट्रिक लगाने वाली इस बार बनेगी पहली सरकार। अस्मिता की रक्षा का भाव था, मतदाताओं को भाजपा और उसके गठबंधन के पीछे एकजुट कर दिया।


  जाति माटी भेटी के दम पर भाजपा ने जीतीं 65 फीसदी सीटें

राजदेव पांडेय

 भोपाल। भाजपा ने असम में 'जाति, माटी, भेटी' का भावनात्मक नारा बुलंद किया। इस नारे के जरिए भाजपा ने अवैध प्रवासियों के मुद्दे को उठाकर स्थानीय अस्मिता के भाव को मुखर दिया। इस नारे के केंद्र में स्थानीय समुदाय (जाति), भूमि (माटी) और मातृभूमि (भेटी) की अस्मिता की रक्षा का भाव था, जिसने मतदाताओं को भाजपा और उसके गठबंधन के पीछे एकजुट कर दिया। इस नारे की पृष्ठभूमि में भाजपा ने राज्य विधानसभा की कुल 126 सीटों में से करीब 65 फीसदी 82 सीटें अपनी दम पर हासिल कर लीं। भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन ने विधानसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक लगा दी है। यह स्वाधीनता के बाद असम में ऐसा पहला मौका होगा, जब वहां कोई गैर कांग्रेसी दल (भाजपा नेतृत्व वाला गठबंधन) लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रहा हो। अब चाहे तो भाजपा खुद अपनी दम पर सरकार बना सकती है।

दो दशकों की कहानी

राज्य में भाजपा का यह उत्कर्ष पिछले करीब दो दशकों की कहानी है। वर्ष 2006 से पहले हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा की विधानसभा में सदस्यों की संख्या कभी दहाई में नहीं पहुंची थी। पांच बार तो पार्टी अपना खाता तक नहीं खोल सकी थी। 2006 में पहली बार राज्य विधानसभा में दस विधायक चुने गए थे। शुरुआती पांच दशक के चुनाव में विधायकों की संख्या दहाई में भी नहीं पहुंची।

हिमंत बिस्व सरमा असम में भाजपा सरकार के शिल्पकार

राज्य में भाजपा की राजनीतिक विकास यात्रा उतार-चढ़ाव वाली रही है। राज्य में भाजपा की प्रभावी राजनीति की शुरुआत तब हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनी। विधानसभा चुनावों को जीतने के लिए आक्रामक मुहिम की रणनीति बनाई गई। इस रणनीति के तहत असम के लोकप्रिय स्थानीय चेहरे हिमंत बिस्व सरमा को भाजपा में लाया गया। हिमंत वर्ष 2015 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में हुए शामिल 2015 कांग्रेस में थे, केवल 10 साल में हिमंत बिस्व सरमा राज्य में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा बन गए। उन्होंने अपनी राजनीति से असम के कई सियासी खिलाड़ियों को मीलों पीछे छोड़ दिया है। हिमंत बिस्व सरमा के आने से पहले राज्य विधानसभा में भाजपा के पास केवल पांच विधायक थे। आते ही उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ आक्रामक रणनीति बनाई। कई कल्याण योजनाएं शुरू कीं। 

असम विधानसभा से जुड़े आंकड़ों की जुबानी भाजपा के राजनीतिक ग्राफ की कहानी

असम विधानसभा के पहले चुनाव से लेकर अब तक के आंकड़े बताते हैं कि असम में भाजपा को विधानसभा में लगातार जीत के लिए मशक्कत करनी पड़ी है। 

ग्राफ में क्या दिख रहा है:

हरी लाइन: कुल प्रत्याशी
नारंगी बार: जीते प्रत्याशी
धूसर डैश लाइन: वो चुनाव जहाँ जनसंघ/भाजपा ने हिस्सा नहीं लिया

मुख्य पड़ाव

चुनाव वर्ष

खास बात

1951, 1957, 1972, 1978, 1983

चुनाव नहीं लड़ा

1967

पहली बार 3 सीट जीतीं

1991

भाजपा को 10 सीट - पहला डबल डिजिट

2016

बड़ा ब्रेकथ्रू - 89 में से 60 सीट जीतीं

2021

फिर 60 सीट, सरकार रिपीट

2026

82 सीट - डेटा के अनुसार अब तक की सबसे बड़ी जीत

1996 और 2006 में 100+ उम्मीदवार उतारने के बाद भी जीत 4 से10 सीट तक रही। असली उछाल 2016 से दिखता है।

राजदेव पांडेय भोपाल स्वदेश के स्थानीय संपादक हैं।

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