ज्येष्ठ अधिक मास और भीषण गर्मी के बीच शिवलिंग पर ठंडा जल चढ़ाने की परंपरा फिर चर्चा में है। जानिए इसका धार्मिक महत्व, पौराणिक कथा और पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
ज्येष्ठ अधिक मास के दौरान देशभर में शिव मंदिरों में जलाभिषेक का दौर तेज हो गया है। भीषण गर्मी के बीच श्रद्धालु सुबह-सुबह मंदिर पहुंचकर भगवान शिव को ठंडा जल अर्पित कर रहे हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस समय शिवलिंग पर जल चढ़ाने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और मन को शांति मिलती है।
दरअसल, ज्येष्ठ मास को तप और साधना का महीना माना जाता है। ऐसे में भगवान शिव की पूजा का महत्व और बढ़ जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, अगर श्रद्धा भाव से शिवलिंग पर ठंडा जल या गंगाजल अर्पित किया जाए तो आरोग्य, दीर्घायु और पुण्य की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि इन दिनों मंदिरों में जलाभिषेक के लिए भक्तों की भीड़ बढ़ रही है।
समुद्र मंथन की कथा से जुड़ी है परंपरा
शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा का संबंध समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से माना जाता है। कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले कालकूट विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था।
विष के प्रभाव से उनके शरीर में तेज जलन होने लगी थी। तब ऋषि-मुनियों और देवताओं ने भगवान शिव को शीतलता पहुंचाने के लिए जल अर्पित किया। मान्यता है कि तभी से शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। अब समझिए, इसी वजह से गर्मियों में ठंडे जल और गंगाजल से अभिषेक को विशेष शुभ माना जाता है।
शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय किन बातों का रखें ध्यान?
शिव पूजा में कुछ नियमों का पालन बेहद जरूरी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्योदय से पहले पूजा करना अधिक शुभ रहता है। हालांकि अगर ऐसा संभव न हो तो सुबह जल्दी पूजा कर लेना चाहिए।
पूजा से पहले स्नान कर तन की शुद्धता और सकारात्मक विचारों से मन की शुद्धता बनाए रखने की सलाह दी जाती है। शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए तांबे या चांदी के पात्र का उपयोग शुभ माना गया है। प्लास्टिक या लोहे के बर्तन से जल अर्पित करने से बचना चाहिए।
ऐसे में एक और बात महत्वपूर्ण मानी जाती है कि जल धीरे-धीरे और शांत भाव से चढ़ाया जाए। शिव पूजा में पूरी परिक्रमा नहीं की जाती, बल्कि आधी परिक्रमा का विधान बताया गया है।
शिव पूजा में क्या चढ़ाएं और क्या नहीं?
भगवान शिव की पूजा में बिल्व पत्र, धतूरा, भांग, चंदन और आंकड़े के फूल खास माने जाते हैं। वहीं केतकी का फूल और तुलसी चढ़ाने की मनाही बताई गई है।
अगर संभव हो तो जल में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाकर अभिषेक करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
फिलहाल, ज्येष्ठ अधिक मास और बढ़ती गर्मी के बीच शिवलिंग पर ठंडा जल चढ़ाने की परंपरा को लेकर लोगों में खास श्रद्धा दिखाई दे रही है। मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लग रही हैं और “ॐ नमः शिवाय” का जाप माहौल को भक्तिमय बना रहा है।
पूजा के दौरान भक्त महामृत्युंजय मंत्र और “ॐ नमः शिवाय” का जप भी कर रहे हैं। मान्यता है कि इन मंत्रों के जाप से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।