ज्योतिष के अनुसार शनि साढ़ेसाती 2026 से 2032 तक कई राशियों पर प्रभाव डालेगी। मेष, मीन और कुंभ राशि वालों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
नई दिल्ली: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार न्याय के देवता शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव लंबे समय तक कई राशियों पर बना रहेगा। यह अवधि लगभग साढ़े सात वर्षों की मानी जाती है, जिसमें जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं।
क्या है शनि साढ़ेसाती
ज्योतिष के अनुसार शनि साढ़ेसाती तब होती है जब शनि ग्रह किसी व्यक्ति की चंद्र राशि के आसपास से गुजरता है। यह अवधि तीन चरणों में विभाजित होती है, जिनमें प्रत्येक चरण लगभग ढाई साल का होता है। इसका दूसरा चरण सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
मेष राशि पर पहला चरण
मेष राशि के जातकों पर फिलहाल साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है, जो जून 2027 तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान जीवन में अचानक बदलाव, कार्यस्थल पर अस्थिरता, खर्चों में वृद्धि और पारिवारिक जिम्मेदारियों में बढ़ोतरी देखी जा सकती है। मानसिक तनाव और दबाव की स्थिति बन सकती है, ऐसे में धैर्य बनाए रखना आवश्यक बताया गया है।
मीन राशि पर सबसे कठिन दौर
मीन राशि पर साढ़ेसाती का दूसरा और सबसे कठिन चरण चल रहा है। इस दौरान करियर में उतार-चढ़ाव, आर्थिक दबाव और पारिवारिक जीवन में तनाव की स्थिति बन सकती है। मेहनत अधिक करनी पड़ती है, लेकिन परिणाम अपेक्षाकृत देर से मिलते हैं। जून 2027 के बाद तीसरा चरण शुरू होगा और 2032 तक साढ़ेसाती का प्रभाव धीरे-धीरे समाप्त होगा।
कुंभ राशि को राहत की ओर संकेत
कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का तीसरा चरण चल रहा है, जिसे अपेक्षाकृत कम कठिन माना जाता है। इस दौरान स्वास्थ्य और आर्थिक मामलों में कुछ चुनौतियां रह सकती हैं, लेकिन करियर में सुधार और नए अवसर भी मिलने की संभावना है। जून 2027 के बाद कुंभ राशि को साढ़ेसाती से पूरी तरह राहत मिलने की संभावना बताई गई है।
ज्योतिषीय सलाह और उपाय
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस अवधि में धैर्य, संयम और अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण हैं। शनि देव की पूजा, दान-पुण्य और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने से नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए 'स्वदेश' उत्तरदायी नहीं है।