रक्षाबंधन पर बुधादित्य, हंस और सुकर्मा योग समेत 5 शुभ संयोग बन रहे हैं। राहुकाल और यमगंड में राखी बांधने से बचने की सलाह दी गई है।
रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इस बार पर्व पर पांच शुभ संयोग बन रहे हैं। इनमें बुधादित्य राजयोग, हंस राजयोग, सुकर्मा योग, वरलक्ष्मी व्रत और शतभिषा नक्षत्र शामिल हैं। इन शुभ संयोगों के कारण इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।
बुधादित्य राजयोग
रक्षाबंधन के दिन सिंह राशि में सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य राजयोग बनेगा। ज्योतिष के अनुसार यह योग उन्नति, सुख और समृद्धि से जुड़ा माना जाता है।
हंस राजयोग
देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में मौजूद हैं। इससे हंस राजयोग बन रहा है, जिसका प्रभाव रक्षाबंधन के दिन भी रहेगा।
सुकर्मा योग
रक्षाबंधन के दिन सुबह 7 बजकर 28 मिनट से सुकर्मा योग शुरू होगा और पूरे दिन रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस योग में शुभ कार्य करना अच्छा माना जाता है।
वरलक्ष्मी व्रत और शतभिषा नक्षत्र
इस बार रक्षाबंधन शुक्रवार को पड़ रहा है। सावन पूर्णिमा के दिन शुक्रवार होने के कारण वरलक्ष्मी व्रत का संयोग भी बन रहा है। वहीं शतभिषा नक्षत्र पूरे दिन और रात रहेगा। यह 29 अगस्त को तड़के 3 बजकर 13 मिनट तक रहेगा।
रक्षाबंधन पर भद्रा नहीं, लेकिन इन समयों का रखें ध्यान
इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं है। हालांकि राखी बांधते समय राहुकाल और यमगंड का ध्यान रखना जरूरी बताया गया है। राहुकाल सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक रहेगा। वहीं यमगंड दोपहर 3:35 बजे से शाम 5:11 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं में यमगंड को अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।
राखी बांधने का शुभ समय
रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक बताया गया है। इसके बाद भी पूरे दिन पूर्णिमा रहने के कारण राहुकाल और यमगंड को छोड़कर राखी बांधी जा सकती है। परिवार के लोग शुभ समय का ध्यान रखते हुए भाई-बहन के इस पर्व को हर्षोल्लास से मना सकते हैं।