Breaking News
  • BRICS सम्मेलन: 20 देशों के कृषि मंत्री और विशेषज्ञ इंदौर में जुटे
  • पटाखा दुकान में लगी आग, लगातार होते रहे धमाके, भोपाल के बैरागढ़ रोड पर हादसा, 70 फीट तक ऊपर उठी लपटें
  • दिल्ली में आधी रात 70kmph की रफ्तार से आंधी चली: MP-राजस्थान समेत 22 राज्यों में बारिश का ऑरेंज अलर्ट
  • भारत में 2024 में सड़क हादसों से 1.77 लाख लोगों की मौत, हर घंटे 20 लोगों ने गंवाई जान
  • प्रख्यात शूटर जसपाल राणा का निधन, अस्पताल में चल रहा था इलाज

होम > धर्म

Jagannath Temple: 4 घंटे बंद रहेंगे दर्शन

पुरी जगन्नाथ मंदिर जाने वाले ध्यान दें! आज 4 घंटे बंद रहेंगे दर्शन, जानें वजह

पुरी के जगन्नाथ मंदिर में आज विशेष बनकलागी अनुष्ठान के कारण शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक दर्शन बंद रहेंगे। जानें श्रीमुख श्रृंगार की परंपरा और इसका महत्व।


पुरी जगन्नाथ मंदिर जाने वाले ध्यान दें आज 4 घंटे बंद रहेंगे दर्शन जानें वजह

Jagannath Darshan ban for 4 hours |

ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में बुधवार को श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था चार घंटे के लिए बंद रहेगी। मंदिर प्रशासन के अनुसार, विशेष धार्मिक अनुष्ठान 'बनकलागी' के आयोजन के चलते शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक आम भक्त भगवान के दर्शन नहीं कर सकेंगे। यह अनुष्ठान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दिव्य स्वरूप से जुड़ा मंदिर की महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक माना जाता है।

क्या है बनकलागी अनुष्ठान?

जगन्नाथ मंदिर की परंपरा में 'बनकलागी' को 'श्रीमुख श्रृंगार' के नाम से भी जाना जाता है। इस विशेष सेवा के दौरान भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के मुखमंडल को नए सिरे से सजाया और रंगा जाता है। मान्यता है कि समय के साथ विग्रहों के चेहरे पर किया गया रंग फीका पड़ने लगता है। ऐसे में इस अनुष्ठान के माध्यम से भगवान के स्वरूप को पुनः आकर्षक और पूर्ण रूप प्रदान किया जाता है।

प्राकृतिक रंगों से किया जाता है श्रृंगार

बनकलागी अनुष्ठान की सबसे खास बात यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक रंगों का उपयोग नहीं किया जाता। भगवान के श्रीमुख श्रृंगार के लिए कस्तूरी, कपूर और विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। धार्मिक दृष्टि से इसे भगवान की महत्वपूर्ण सेवाओं में शामिल माना जाता है।

दत्ता महापात्र सेवायत निभाते हैं विशेष जिम्मेदारी

जगन्नाथ मंदिर की परंपरा के अनुसार प्रत्येक सेवा का अधिकार एक विशेष सेवायत समुदाय को दिया गया है। बनकलागी अनुष्ठान का दायित्व 'दत्ता महापात्र' सेवायतों के पास होता है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और मंदिर की प्राचीन धार्मिक व्यवस्थाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

अनुष्ठान के दौरान गर्भगृह में प्रवेश रहता है प्रतिबंधित

विशेष श्रृंगार के दौरान केवल अधिकृत सेवायतों को ही गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति होती है। इसी कारण शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए दर्शन पूरी तरह बंद रहेंगे। अनुष्ठान संपन्न होने के बाद मंदिर के द्वार दोबारा खोल दिए जाएंगे और नियमित दर्शन शुरू हो जाएंगे।

रथ यात्रा से पहले बढ़ जाता है इस अनुष्ठान का महत्व

जगन्नाथ मंदिर में होने वाले पारंपरिक अनुष्ठानों का महत्व रथ यात्रा के समय और अधिक बढ़ जाता है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ से जुड़ी इन प्राचीन परंपराओं और धार्मिक सेवाओं के प्रति विशेष आस्था रखते हैं। बनकलागी भी उन्हीं महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक माना जाता है।

Related to this topic: