जून 2026 में आने वाली निर्जला एकादशी और परमा एकादशी की तिथि, पूजा मुहूर्त, व्रत पारण समय और धार्मिक महत्व जानिए। भक्तों के लिए यह महीना विशेष आध्यात्मिक महत्व रखने वाला माना जा रहा है।
सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत आध्यात्मिक साधना, पुण्य और मनोकामना पूर्ति के लिए रखा जाता है। जून 2026 का महीना भी श्रद्धालुओं के लिए खास रहने वाला है, क्योंकि इस दौरान निर्जला एकादशी और परमा एकादशी दोनों का संयोग बन रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी का व्रत रखने से पापों का क्षय होता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। ऐसे में बड़ी संख्या में श्रद्धालु अभी से जानना चाह रहे हैं कि जून 2026 में निर्जला एकादशी और परमा एकादशी कब है, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और व्रत का पारण किस समय किया जाएगा।
निर्जला एकादशी 2026 कब है?
Nirjala Ekadashi हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इसे वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक माना जाता है जून 2026 में निर्जला एकादशी 27 जून, शनिवार को पड़ने की संभावना है। इस दिन भक्त बिना जल ग्रहण किए व्रत रखते हैं। मान्यता है कि इस एक व्रत का फल वर्ष भर की सभी एकादशियों के समान प्राप्त होता है।
निर्जला एकादशी पूजा मुहूर्त
सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है।
व्रत पारण समय
व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद किया जाता है। पारण का समय स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना उचित माना जाता है।
परमा एकादशी 2026 कब मनाई जाएगी?
Parama Ekadashi अधिक मास या पुरुषोत्तम मास में आने वाली विशेष एकादशी मानी जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए रखा जाता है हालांकि, परमा एकादशी केवल अधिकमास के दौरान आती है। इसलिए जून 2026 के संदर्भ में श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्रीय पंचांग की पुष्टि अवश्य कर लेनी चाहिए, क्योंकि इसकी तिथि पंचांग गणना के आधार पर निर्धारित होती है।
क्यों खास मानी जाती है निर्जला एकादशी?
दरअसल, सभी श्रद्धालु वर्ष की 24 या 26 एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते। ऐसे में निर्जला एकादशी को विशेष महत्व दिया गया है। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि इस व्रत के पालन से सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल प्राप्त हो सकता है। यही कारण है कि देशभर के मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और दान-पुण्य के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई श्रद्धालु जलदान, अन्नदान और जरूरतमंदों की सहायता को भी इस दिन विशेष पुण्यकारी मानते हैं।
व्रत रखने वाले भक्त किन बातों का रखें ध्यान?
एकादशी व्रत में सात्विक आहार, भगवान विष्णु का स्मरण और मन की शुद्धता को महत्वपूर्ण माना गया है। निर्जला व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य संबंधी स्थिति को ध्यान में रखते हुए व्रत करना चाहिए। फिलहाल, जून 2026 की इन महत्वपूर्ण एकादशियों को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है। सही तिथि, मुहूर्त और पारण समय की पुष्टि के लिए स्थानीय पंचांग या ज्योतिषीय गणना का संदर्भ लेना सबसे बेहतर रहेगा।