Breaking News
  • भारत फिर बना टी20 किंग:इतिहास रचते हुए भारत तीसरी बार टी20 वर्ल्ड चैंपियन
  • International Women’s Day Special: भोपाल से बिलासपुर तक दौड़ी ‘नारी शक्ति’ की ट्रेन
  • क्रिकेट फैंस के लिए खुशखबरी: 28 मार्च से शुरू होगा IPL 2026, शेड्यूल में बदलाव
  • हाई कोर्ट का अहम फैसला: हिंदू रीति अपनाने वाले आदिवासी भी हिंदू विवाह अधिनियम के दायरे में
  • इंडिया की टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में धुंआधार बैटिंग, 12 ओवर में 1 विकेट के नुकसान पर 161
  • T20 वर्ल्ड कप फाइनलः न्यूज़ीलैंड ने टॉस जीतकर फील्डिंग चुनी, भारत की पहले बैटिंग
  • केरल में विदेशी जहाज से टक्कर के बाद मछुआरों की नाव डूबी, 2 लापता
  • 1 से 7 मार्च 2026 के बीच 52,000 से ज्यादा भारतीय सुरक्षित रूप से खाड़ी देशों से भारत लौटे
  • इजराइल ने ईरानी तेल ठिकानों पर मिसाइलें गिराईं: 3 डिपो और 30 फ्यूल टैंक तबाह, ईरान ने 5 देशों पर हमले किए

होम > धर्म

84 Mahadev of Ujjain: Chaurasi Kalp and Path to Mo

बाबा महाकाल की नगरी में चौरासी कल्प के महादेव

उज्जैन की धरती पर विराजमान चौरासी कल्प के 84 महादेव। मान्यता है कि इनके दर्शन से 84 लाख योनियों के पाप कटते हैं और मोक्ष का मार्ग खुलता है


बाबा महाकाल की नगरी में चौरासी कल्प के महादेव

अनुराग उपाध्याय, उज्जैन

चौरासी कल्प, चौरासी महादेव और चौरासी लाख जन्मों के पापों से मुक्ति

84 का अपना महत्व है, लेकिन जब 84 के साथ महादेव जुड़ जाएं, तो यह ब्रह्मांड की सबसे बड़ी शक्ति बन जाता है। भूतभावन भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में चौरासी महादेव विराजमान हैं। मान्यता है कि अब तक 84 कल्प हो चुके हैं और हर कल्प के एक महादेव हैं।

काल गणना का आरंभ भी महादेव हैं और अंत भी। ऐसी मान्यता है कि यदि कोई श्रद्धालु 84 महादेवों की परिक्रमा कर उनके दर्शन कर ले, तो उसे 84 लाख जन्मों के पापों से मुक्ति के साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है। सृष्टि में देवता अनेक हैं, पर महादेव केवल एक हैं। अगर महादेव के चौरासी रूपों के दर्शन हो जाएं, तो मोक्ष ही मोक्ष है।

वैसे शिव का अर्थ ही कल्याण है। महादेव साक्षात् कल्याणमूर्ति हैं। वे शंकर रूप में शांति प्रदान करने वाले हैं, तो दुष्टों के लिए रुद्र स्वरूप में भयानक भी हैं। वहीं भक्तों के लिए वे आशुतोष हैं, जो बड़ी जल्दी प्रसन्न होकर भोले बाबा बन जाते हैं। शिव देवाधिदेव भी हैं, पशुपतिनाथ भी और भूतनाथ भी।

हर महादेव की अपनी एक कथा

इन चौरासी महादेवों में से हर एक की अपनी अलग कथा है। हर कथा में किसी न किसी ऋषि का जुड़ाव, महादेव का चमत्कार और उससे जुड़ी सीख सम्मिलित है। शिव उपासकों के लिए 84 महादेव एक विशेष उपासना स्थल माने जाते हैं। इन्हें 84 कल्पों के महादेव भी कहा जाता है, क्योंकि यहां हर कल्प के एक महादेव विराजमान हैं।

वर्तमान में 85वां कल्प चल रहा है। हिंदू काल गणना के अनुसार एक कल्प ब्रह्मा जी का एक दिन होता है, जो 4 अरब 32 करोड़ यानी 4.32 बिलियन मानव वर्षों के बराबर है। यह 1,000 महायुग या 14 मन्वंतर के योग से बनता है। एक कल्प में सृष्टि की रचना होती है और इसके अंत में महाप्रलय आता है, जिसके बाद उतनी ही लंबी ब्रह्मा की रात्रि होती है। परंपरागत कालक्रम के अनुसार हम वर्तमान में श्वेत वराह कल्प में जी रहे हैं।

श्री ब्रह्मेश्वर महादेव

84 महादेव मनुष्य की 84 लाख योनियों के चक्र को काटने वाले माने जाते हैं। इन प्राचीन मंदिरों की चौखट पर जो शांति मिलती है, वह कहीं और नहीं मिलती। जीवन में एक बार इन 84 महादेवों के दर्शन जरूर करना चाहिए। मेरा महादेव तुम्हारी झोली खुशियों से भर देगा, बस उस पर अटूट भरोसा रखो।

- पंडित प्रदीप मिश्रा, पीठाधीश्वर, कुबेरेश्वर धाम

जब भगवान शिव स्वयं 84 रूपों में प्रकट हुए

पुराणों के अनुसार, जब दूषण नामक राक्षस ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया था, तब उसे नष्ट करने के लिए भगवान शिव ने 84 रूपों में दर्शन दिए और महाकाल वन में 84 स्थानों पर विराजमान हुए।शिव महापुराण और स्कंद पुराण के अवंती खंड के अनुसार, दूषण नामक असुर को यह वरदान प्राप्त था कि उसके रक्त की बूंदें जहां गिरेंगी, वहां वह 84 रूपों में पुनर्जीवित हो जाएगा। जब भगवान शिव ने उसका वध किया, तो उन्होंने अपनी बहन सीप्रिया, यानी शिप्रा नदी से कहा कि वह तुरंत जल रूप में आए, ताकि रक्त पानी में मिलकर निष्प्रभावी हो जाए।

शिप्रा के आने में थोड़ी देरी हुई और दूषण के रक्त की 84 बूंदें धरती पर गिर गईं। इन 84 रूपों का संहार करने के लिए भगवान शिव स्वयं 84 रूपों में प्रकट हुए। जिन स्थानों पर शिव के ये अंश स्थापित हुए, वे ही आगे चलकर ‘84 महादेव’ कहलाए।

इनका कहना है

महादेव कभी एकादश रुद्रों के रूप में अवतरित हुए, तो कभी भैरव, हनुमान, दुर्वासा और पिप्पलाद जैसे अवतार धारण किए। महादेव दिगंबर हैं। दस दिशाओं के साथ एक ग्यारहवीं दिशा होती है आभ्यंतर, अर्थात् मध्य। इन्हीं ग्यारह दिशाओं में एकादश रुद्र व्याप्त हैं।महादेव के हर नाम, हर लिंग और हर अवतार का अपना एक वैशिष्ट्य और अपना विज्ञान है। इसी तरह 84 कल्पों के महादेवों का भी अपना विशेष महत्व और विज्ञानसम्मत अवधारणा है।वे तो भुजगेन्द्रहार भी हैं, सर्प की माला पहनते हैं। देव, दानव, मानव सभी महादेव को पूजते हैं और महादेव सृष्टि के हर प्राणी को अपनाते हैं, क्योंकि वो करुणावतार हैं।

- श्रीराम तिवारी, निदेशक, विक्रमादित्य शोध पीठ

महाकाल की नगरी उज्जैयनी में 13 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र महाकाल वन के रूप में जाना जाता था। इस क्षेत्र में महाकाल के अलावा 84 महादेव दिव्य अखंड शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। हालांकि अब ये सभी महादेव उज्जैन नगर का हिस्सा हैं। यहाँ 84 महादेव के साथ आठ भैरव, 11 रुद्र, छह विनायक, 12 आदित्य और 24 मातृकाएँ विराजमान हैं। शिव पुराण में वर्णित है कि माँ पार्वती ने भगवान शिव से इन शक्तिशाली 84 शिवलिंगों से सम्बंधित महिमा का वर्णन विस्तार से पूछा था। तब इनका महत्व सामने आया। उज्जैन अकेला शहर है जहाँ महाकाल के साथ 84 महादेव विराजमान हैं।

असीम ऊर्जा के भण्डार हैं 84 शिवलिंगः देवाधिदेव महादेव के ये 84 शिवलिंग

असीम ऊर्जा के भण्डार हैं। श्रवण या पुरुषोत्तम मास में इन महादेव मंदिरों की परिक्रमा करने का विधान है। मान्यता है कि 84 महादेव 84 लाख योनियों के दोषों से मुक्ति, मोक्ष और सांसारिक दुखों का नाश करते हैं। इनकी परिक्रमा शिव के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन कराती है, जिसमें 84 महादेव यात्रा का आरम्भअगस्त्येश्वर महादेव से होता है और इस परिक्रमा को यहीं संपन्न किया जाता है।