योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में 8 नेताओं ने शपथ ली। बीजेपी ने 2027 चुनाव से पहले जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की बड़ी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में रविवार का दिन अहम रहा। लंबे इंतजार के बाद योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार पर मुहर लग गई और लखनऊ में आयोजित समारोह में 8 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। इस विस्तार को सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं माना जा रहा। बीजेपी ने साफ संकेत दिया है कि उसकी नजर अब पूरी तरह 2027 विधानसभा चुनाव पर है।
नए मंत्रियों के चयन में सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों का खास ध्यान रखा गया। शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ सरकार और संगठन के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। समारोह के तुरंत बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया।
किन नेताओं को मिली योगी कैबिनेट में जगह
मंत्रिमंडल विस्तार में कृष्णा पासवान, मनोज पांडेय, कैलाश राजपूत, सोमेंद्र तोमर, अजीत सिंह पाल, भूपेंद्र सिंह चौधरी, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री बनाया गया। इन नामों के जरिए बीजेपी ने अलग-अलग जातीय समूहों तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की है। खास तौर पर ओबीसी, दलित, जाट, लोधी, वाल्मीकि और पासी समाज को प्रतिनिधित्व देकर पार्टी ने सामाजिक संतुलन साधने का प्रयास किया।
भूपेंद्र सिंह चौधरी और मनोज पांडेय जैसे नेताओं को शामिल करना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। पश्चिमी यूपी और रायबरेली जैसे क्षेत्रों में इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।
बीजेपी की रणनीति में क्यों अहम है यह विस्तार
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक बीजेपी इस समय उत्तर प्रदेश में अपने पारंपरिक वोट बैंक के साथ नए सामाजिक समीकरण मजबूत करने पर फोकस कर रही है। 2024 लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी अब विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट चुकी है। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार को संगठन और सरकार के बीच तालमेल मजबूत करने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। नए मंत्रियों के विभागों का ऐलान अभी बाकी है, लेकिन माना जा रहा है कि कुछ नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।
अखिलेश यादव ने ट्वीट कर साधा निशाना
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लंबा पोस्ट लिखते हुए तंज कसा कि 'उधर से पर्ची आएगी, यहां सिर्फ पढ़ी जाएगी।' अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री की भूमिका को लेकर भी कटाक्ष किया और लिखा कि भाजपा राज में 'CM' का मतलब सिर्फ 'Courier-Messenger' रह गया है।
उन्होंने अपने पोस्ट में सत्ता, लालच और राजनीतिक नैतिकता को लेकर भी टिप्पणी की। साथ ही महाकाव्यों और ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ का जिक्र करते हुए बीजेपी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष निशाना साधा।
क्या 2027 से पहले बदलेगा यूपी का राजनीतिक समीकरण
बीजेपी ने इस विस्तार के जरिए साफ कर दिया है कि वह चुनावी तैयारी को अब और तेज करने जा रही है। पार्टी की कोशिश है कि हर बड़े सामाजिक वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत रखी जाए। दूसरी तरफ विपक्ष भी इस विस्तार को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। आने वाले महीनों में यही राजनीतिक खींचतान उत्तर प्रदेश की सियासत का बड़ा केंद्र बन सकती है।