ट्विशा शर्मा केस की जांच में CBI ने क्राइम सीन रीक्रिएशन शुरू किया। डमी पुतला और बेल्ट के साथ पूरी घटना को दोबारा समझने की कोशिश की गई। मामला जांच के अहम मोड़ पर पहुंचा।
भोपाल में ट्विशा शर्मा केस की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। सीबीआई ने सोमवार को गिरिबाला सिंह के घर पहुंचकर पूरे घटनाक्रम को दोबारा समझने की कोशिश शुरू की। टीम अपने साथ डमी पुतला लेकर आई, जिसे ट्विशा शर्मा का प्रतिनिधित्व मानकर इस्तेमाल किया गया। इस दौरान पुलिस जवानों ने वेट के लिए डंबल भी उपलब्ध कराए ताकि स्थिति को वास्तविक रूप में दोहराया जा सके। जांच एजेंसियों का मकसद उन बयानों और परिस्थितियों को क्रॉस चेक करना है जो अब तक आरोपियों और गवाहों से सामने आए हैं।
गिरिबाला सिंह के घर पहुंची CBI
सीबीआई टीम सीधे गिरिबाला सिंह के घर पहुंची। यहां कथित घटना से जुड़े सभी पहलुओं को दोबारा खंगाला गया। समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह फिलहाल रिमांड पर हैं और उनसे पूछताछ जारी है। जांच टीम ने यह समझने की कोशिश की कि घटनास्थल पर किस तरह की परिस्थितियां बनीं और किस क्रम में घटनाएं आगे बढ़ीं। घर के भीतर और छत पर पूरा रीक्रिएशन प्लान लागू किया गया। इस दौरान सीबीआई ने उन बिंदुओं पर ज्यादा फोकस किया जो शुरुआती बयानों में अलग-अलग तरह से सामने आए थे।
डमी पुतला और बेल्ट से तैयार किया गया पूरा सीन
जांच को वास्तविकता के करीब लाने के लिए सीबीआई ने ट्विशा शर्मा का डमी पुतला इस्तेमाल किया। पुतले का वजन भी अनुमानित रूप से वास्तविक स्थिति के अनुसार सेट किया गया। टीम ने वह बेल्ट भी साथ लाई। जिसका जिक्र पहले ससुराल पक्ष की ओर से किया गया था। इसी बेल्ट की मदद से फंदे की स्थिति को दोबारा बनाया गया। इसके बाद पुतले को छत पर उसी प्रक्रिया से उतारने की कोशिश की गई, जैसा आरोपियों के बयानों में बताया गया था। इस रीक्रिएशन का उद्देश्य हर दावे की वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य जांच करना है।
रिमांड और जांच के बीच बढ़ा दबाव
समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह फिलहाल सीबीआई रिमांड में हैं। उनकी रिमांड 2 जून को दोपहर में खत्म हो रही है। सूत्रों के अनुसार पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर अब केस चार्जशीट की ओर बढ़ रहा है। इसके बाद मामला अदालत में सुनवाई के लिए जाएगा। सीबीआई का फोकस अब उन कड़ियों को जोड़ने पर है जो अब तक जांच में अधूरी या विरोधाभासी रही हैं।
फरारी और छिपने की कहानी भी जांच के दायरे में
जांच में यह भी सामने आया है कि समर्थ सिंह घटना के बाद फरार हो गया था। इस दौरान वह कुछ समय तक भोपाल में छिपा रहा और बाद में जबलपुर पहुंच गया। बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट में कानूनी प्रक्रिया के दौरान उसने सरेंडर किया था। यह पूरी अवधि अब जांच एजेंसियों के रडार पर है। सीबीआई यह भी पता लगा रही है कि फरारी के दौरान उसे किस तरह की मदद मिली और किन लोगों की भूमिका रही।