ट्विशा मौत मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में तीखी बहस देखने को मिली। पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने गंभीर आरोप लगाए, जबकि अदालत ने दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
ट्विशा मौत मामले की सुनवाई मंगलवार को उस समय बेहद तनावपूर्ण हो गई जब आरोपी पूर्व जज गिरिबाला सिंह और पीड़ित पक्ष के वकील के बीच तीखी बहस छिड़ गई। अदालत के भीतर दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप इतने बढ़ गए कि माहौल कुछ देर के लिए असहज हो गया। सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह ने खुद भी अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने जांच प्रक्रिया, मीडिया कवरेज और कुछ घटनाओं को लेकर कई आपत्तियां दर्ज कराईं।
दूसरी तरफ पीड़ित पक्ष के वकील ने उनके दावों का जोरदार विरोध किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ को 16 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
अदालत में आरोपों ने बढ़ाया विवाद
सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह ने दावा किया कि पीड़िता पक्ष के वकील अनुराग श्रीवास्तव ने पहले जबलपुर हाईकोर्ट परिसर में उनके बेटे समर्थ को थप्पड़ मारा था। यह आरोप सामने आते ही कोर्ट रूम में माहौल गरमा गया। वकील अनुराग श्रीवास्तव ने इस आरोप को चुनौती देते हुए पूछा कि यदि ऐसी घटना हुई थी तो इसकी शिकायत कहां दर्ज कराई गई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
इनामी आरोपी को मिली शरण पर उठा सवाल
बहस के दौरान पीड़ित पक्ष के वकील ने समर्थ सिंह के जबलपुर में एक न्यायिक अधिकारी के कक्ष में मौजूद रहने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि 30 हजार रुपये के इनामी आरोपी को वहां तक पहुंच कैसे मिली। बचाव पक्ष ने जवाब दिया कि समर्थ को सुरक्षा प्राप्त करने का अधिकार था। वहीं पीड़ित पक्ष ने पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
मीडिया कवरेज पर जताई नाराजगी
गिरिबाला सिंह ने अदालत में मीडिया कवरेज को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना था कि मामले की रिपोर्टिंग लगातार उनके पीछे चल रही है और इससे उनके परिवार की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सीन रिक्रिएशन से जुड़े वीडियो और फुटेज मीडिया तक कैसे पहुंचे, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के दौरान उन्हें घर से कुछ दूरी पर वाहन से उतारकर पैदल ले जाया गया, जबकि वाहन सीधे घर तक पहुंच सकता था।
CBI ने नहीं मांगी पुलिस रिमांड
सुनवाई के दौरान CBI ने अदालत को बताया कि फिलहाल उसे पुलिस रिमांड की आवश्यकता नहीं है। जांच एजेंसी ने केवल न्यायिक रिमांड की मांग की और कहा कि जरूरत पड़ने पर आगे पुलिस रिमांड का आवेदन दिया जा सकता है। इसके बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। जानकारी के अनुसार दोनों को भोपाल केंद्रीय जेल में अन्य कैदियों से अलग रखा जाएगा।
क्या है पूरा मामला
12 मई को ट्विशा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। इसके बाद परिजनों ने पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज कराया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट की अनुमति से दोबारा पोस्टमॉर्टम कराया गया। फिलहाल पूरे प्रकरण की जांच CBI कर रही है। गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त होने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था, जबकि समर्थ सिंह पहले से जांच एजेंसी की हिरासत में था।
रिकॉर्ड के अनुसार ट्विशा की मौत के बाद समर्थ लगभग दस दिन तक फरार रहा था और बाद में उसे गिरफ्तार किया गया। पूर्व न्यायिक अधिकारी होने के कारण यह मामला कानूनी और प्रशासनिक हलकों में भी लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।