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Ladoo Gopal Gets KG Admission in Satna

अनूठा प्रवेश: प्राइवेट स्कूल में लड्डू गोपाल का केजी-1 में एडमिशन,बैग-टिफिन लेकर रोज पहुंचेंगे स्कूल

सतना के प्राइवेट स्कूल में सात वर्षीय आयुषी के आग्रह पर लड्डू गोपाल का KG-1 में एडमिशन हुआ। अब उनके लिए बैग, टिफिन और पानी की बोतल भी रखी गई है।


अनूठा प्रवेश प्राइवेट स्कूल में लड्डू गोपाल का केजी-1 में एडमिशनबैग-टिफिन लेकर रोज पहुंचेंगे स्कूल

laddoo gopal School Admission in Satna |

अमन शुक्ला, सतना। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर जहां हर कोई लड्डू गोपाल की भक्ति में डूबा हुआ है वहीं सतना से एक अनोखी भक्ति का रंग देखने को मिला। यहां के एक प्राइवेट स्कूल में लड्डू गोपाल का केजी -1 में प्रवेश कराया गया है। यह कार्य लड्डू गोपाल पर अगाध श्रद्धा रखने वाली सात वर्षीय छात्रा ने किया। छात्रा गुरुवार यही जन्माष्टमी से ठीक एक दिन पहले अपने साथ श्रीकृष्ण की मूर्ति लेकर पहुंची और स्कूल संचालक सूर्यप्रकाश सिंह से लड्डू गोपाल के प्रवेश का आग्रह किया। तकनीकी रूप से संभव नहीं होने के बावजूद उन्होंने कृष्ण की अनन्य भक्त मासूम छात्रा के लिए भगवान का प्रवेशोत्सव कराया।

भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल का प्रवेश होने के बाद अब इस बच्ची और स्कूल की चारों तरफ चर्चा है। खास बात यह है कि लड्डू गोपाल केवल पूजा स्थल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एक विद्यार्थी की तरह रोज स्कूल आते हैं। उनके लिए स्कूल बैग, टिफिन, पानी की बोतल और अन्य जरूरी सामान भी रखा गया है।

आयुषी के ‘लल्ला’ हैं लड्डू गोपाल 

अनोखी प्रवेश के पीछे धवारी निवासी नरेंद्र और रेखा पाण्डेय की सात वर्षीय बेटी आयुषी का लड्डू गोपाल के प्रति गहरा लगाव है। आयुषी के लिए कान्हा महज पूजा की प्रतिमा नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य और उसके ‘लल्ला’ हैं। वह उनके साथ खाना-पीना, खेलना और समय बिताना पसंद करती है।आयुषी मासूमियत से कहती है, “हमारा लल्ला बहुत नटखट है। हम उससे बहुत प्यार करते हैं।” उसका कहना है कि वह अपने लल्ला को खुद से अलग नहीं मानती। घर हो या स्कूल, वह हर जगह उन्हें अपने साथ रखना चाहती है।

सुबह से रात तक कृष्णमय रहती है आयुषी की दुनिया

आयुषी की मां रेखा पाण्डेय बताती हैं कि बेटी का लड्डू गोपाल से लगाव बचपन से ही बेहद गहरा है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक उसका अधिकांश समय लल्ला के साथ गुजरता है। वह उन्हें खिलाती है, उनके साथ समय बिताती है और उनकी देखभाल परिवार के किसी सदस्य की तरह करती है। रेखा के मुताबिक, स्कूल जाने के समय आयुषी लड्डू गोपाल को भी अपने साथ ले जाने की जिद करती थी। इसी भाव को देखते हुए परिवार ने उनके स्कूल प्रवेश का विचार रखा।

स्कूल प्रबंधन ने स्वीकार किया भावनात्मक आग्रह

जब पाण्डेय परिवार ने स्कूल संचालक के सामने लड्डू गोपाल के प्रवेश का प्रस्ताव रखा तो शुरुआत में स्कूल प्रबंधन के सामने भी यह सवाल था कि भगवान के बाल स्वरूप का स्कूल में प्रवेश किस तरह संभव होगा। हालांकि परिवार की श्रद्धा और आयुषी के निष्कपट प्रेम को देखते हुए प्रबंधन ने इस भावनात्मक आग्रह को स्वीकार कर लिया। अब लड्डू गोपाल रोज आयुषी के साथ स्कूल पहुंचते हैं और स्कूल की गतिविधियों का हिस्सा बनते हैं। उनके लिए बाकायदा बैग, टिफिन, पानी की बोतल और हैंकी जैसी चीजें भी रखी जाती हैं।

बच्चों के बीच कौतूहल का केंद्र बने कान्हा

स्कूल में लड्डू गोपाल की मौजूदगी दूसरे बच्चों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। बच्चे उन्हें एक तरह से अपने सहपाठी की तरह देखते हैं। जन्माष्टमी के मौके पर यह अनोखा प्रसंग स्कूल में भक्ति, वात्सल्य और बाल मन की मासूमियत को एक साथ सामने ला रहा है। मोबाइल और गैजेट्स के दौर में आयुषी का अपने ‘लल्ला’ के प्रति यह लगाव भारतीय संस्कारों और बाल मन की सहज आस्था की अलग तस्वीर पेश करता है। तक्षशिला मिडिल स्कूल के इस अनोखे ‘स्टूडेंट’ ने भले ही परीक्षा की कॉपी न लिखी हो, लेकिन उसने पूरे स्कूल को प्रेम, श्रद्धा और मासूमियत का अनोखा पाठ जरूर पढ़ा दिया है।

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