शाजापुर में आयोजित संघ शिक्षा वर्ग के प्रकट उत्सव में अनुशासन और राष्ट्रीय भावना का प्रदर्शन हुआ। भारत को विश्वगुरु बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
संघ शिक्षा वर्ग के प्रकट उत्सव में दिखी संगठन शक्ति
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मालवा प्रांत के संघ शिक्षा वर्ग (व्यवसायी) का प्रकट उत्सव रविवार को स्थानीय छत्रपति शिवाजी स्टेडियम ग्राउंड, शाजापुर में अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ। प्रकट उत्सव में शिक्षार्थियों द्वारा पिछले 15 दिनों में सीखे गए विभिन्न शारीरिक एवं घोष कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई, जिसने उपस्थित जनसमूह को प्रभावित किया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सामाजिक चिंतक गोवर्धनलाल गुवाहाटिया तथा मुख्य वक्ता मध्य क्षेत्र के क्षेत्र कार्यवाह अशोक अग्रवाल थे। वर्ग कार्यवाह राधेश्याम पाटीदार ने 15 दिवसीय वर्ग का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
मुख्य अतिथि गोवर्धनलाल गुवाहाटिया ने अपने संबोधन में कहा कि संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने पर सभी को शुभकामनाएं। संघ स्थापना काल से ही राष्ट्रभक्ति और सामाजिक समरसता के लिए कार्य कर रहा है। मुझे विश्वास है कि संघ समाज में फैली वैमनस्यता को समाप्त कर समरस भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्य वक्ता अशोक अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्थापना काल से ही समाज को संगठित करने और व्यक्ति निर्माण का कार्य कर रहा है। संघ का उद्देश्य केवल संगठन खड़ा करना नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर संस्कार, चरित्र और राष्ट्रभक्ति का भाव जागृत करना है।उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति संस्कारित होगा, तब परिवार, समाज और राष्ट्र भी सशक्त बनेंगे। उन्होंने कहा कि विश्व कल्याण के लिए भारत का विश्वगुरु बनना आवश्यक है।
समाज ने मनाया संघ शताब्दी वर्ष : शास्त्री

मंदसौर:राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मालवा प्रांत के संघ शिक्षा वर्ग (विद्यार्थी) का प्रकट एवं समापन समारोह रविवार को आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 28 जिलों के 215 स्थानों से आए 297 शिक्षार्थियों ने सहभागिता की।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी डॉ. समरथमल जैन तथा मुख्य वक्ता के रूप में मालवा प्रांत के संघचालक डॉ. श्रीप्रकाश शास्त्री उपस्थित रहे। जिनेंद्र जैन और दशरथसिंह भी विशेष रूप से मौजूद थे।डॉ. समरथमल जैन ने कहा कि मंदसौर की पुण्य भूमि पर राष्ट्रभक्ति का महासागर उमड़ पड़ा है। आज सभी को विश्वास है कि देश का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। संघ पिछले 100 वर्षों से ‘राष्ट्र प्रथम’ के मंत्र को लेकर कार्य करता आ रहा है।मुख्य वक्ता डॉ. श्रीप्रकाश शास्त्री ने अपने बौद्धिक उद्बोधन में कहा कि संघ का शताब्दी वर्ष चल रहा है। सामान्यतः किसी संस्था के 100 वर्ष पूर्ण होने पर वह स्वयं उत्सव मनाती है, लेकिन संघ ने ऐसा नहीं किया। संघ के शताब्दी वर्ष को समाज ने स्वयं उत्सव के रूप में मनाया है। उन्होंने कहा कि यह संघ और समाज के बीच बढ़ते आत्मीय संबंधों का प्रमाण है।