समग्र शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य निगरानी के लिए काउंसलर नियुक्त किए जाएंगे। नई गाइडलाइन में छात्रों की काउंसलिंग और आत्महत्या रोकथाम पर विशेष ध्यान दिया गया है।
समग्र शिक्षा अभियान की ओर से जारी की गई 'मेंटल हेल्थ सेफगार्ड गाइडलाइन'
नए शैक्षणिक सत्र में स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षकों से कहा गया है कि वे विद्यार्थियों से इस तरह से जुड़ें कि वे अपनी छोटी-छोटी समस्याएं भी खुलकर साझा कर सकें। इससे न केवल उनका मानसिक संतुलन बेहतर होगा, बल्कि समस्याओं का समय रहते समाधान भी संभव हो सकेगा।
इसके साथ ही स्कूलों में काउंसलर (परामर्शदाता) की व्यवस्था भी की जाएगी। ये नियमित प्रैक्टिस करने वाले होंगे और उन्हें समय-समय पर स्कूल में विद्यार्थियों की काउंसलिंग के लिए बुलाया जाएगा। पिछले कुछ सालों में स्कूल के विद्यार्थियों की आत्महत्या करने की प्रवृत्ति बढ़ी है, इसलिए समग्र शिक्षा अभियान की ओर से मेंटल हेल्थ सेफगार्ड गाइडलाइन जारी की गई है। इस गाइडलाइन को भी स्कूलों में फ्लैक्स पर चस्पा किया जाना है।
यह व्यवस्थाएं की जाएंगी
- सभी विकासखंडों में मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाता या विशेषज्ञ की सेवाओं को सही तरीके से उपयोग कर अधिकतम शालाओं में विद्यार्थियों को उनकी सेवाएं दिलाना सुनिश्चित किया जाए।
- प्रदेश स्तर पर संचालित उमंग किशोर हेल्पलाइन का उपयोग करने के लिए विद्यार्थियों को सजग किया जाए।
- सभी हायर सेकंडरी स्कूलों के प्राचार्य जिन्होंने मानसिक स्वास्थ्य एवं पॉक्सो विषय पर प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वे अपने स्कूल के शिक्षकों को इसका प्रशिक्षण देंगे।
- सभी स्कूलों में प्रशिक्षित हेल्थ एवं वेलनेस एम्बेसडर के माध्यम से सभी कक्षा अध्यापकों को जिम्मेदारी देकर विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान रखने के लिए निर्देशित किया जाए।
- उत्पीड़न एवं शिकायत निवारण के लिए यूएनएफपीए के सहयोग से वितरित पोस्टर्स को उचित स्थान पर चस्पा किया जाए।
- उमंग प्रश्न पेटी के उपयोग को सुचारू किया जाए।
- प्रत्येक स्कूल में इस गाइडलाइन के पालन के लिए व्याख्याता या शिक्षक को नोडल अधिकारी के रूप में नामांकित किया जाए।
- स्कूल स्तर पर विद्यार्थियों के भावनात्मक एवं कुशलता में आने वाले परिवर्तनों को नियमित रूप से अभिभावकों के साथ बैठक कर साझा किया जाए।
- स्कूल स्तर पर समय-समय पर कॅरियर परामर्श सत्रों का आयोजन भी किया जाए।