दिल्ली के सैदुल्लाजाब में सात मंजिला इमारत ढहने के मामले में शुरुआती जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जर्जर चार मंजिला ढांचे पर अतिरिक्त निर्माण को हादसे की वजह माना जा रहा है। छह लोगों की मौत के बाद जांच
दिल्ली के साकेत इलाके से सटे सैदुल्लाजाब में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सात मंजिला निर्माणाधीन इमारत के मलबे में दबकर अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। हादसे के बाद सामने आई शुरुआती जांच रिपोर्ट ने मामले को और गंभीर बना दिया है। संकेत मिल रहे हैं कि जिस इमारत पर अतिरिक्त मंजिलें बनाई जा रही थीं, उसकी मूल संरचना पहले से कमजोर और जर्जर हालत में थी। इसी एंगल को अब पुलिस, प्रशासन और एमसीडी की जांच का केंद्र माना जा रहा है।
जर्जर ढांचे पर बढ़ता गया निर्माण का दबाव
प्रारंभिक जांच के अनुसार करीब 400 वर्ग गज क्षेत्र में बनी इमारत पहले से चार मंजिला थी। बाद में इस पर तीन और मंजिलें जोड़ने का काम शुरू किया गया। सूत्रों के मुताबिक दो अतिरिक्त मंजिलें तैयार हो चुकी थीं, जबकि सातवीं मंजिल पर निर्माण कार्य जारी था। जांच में यह आशंका जताई गई है कि पुराना ढांचा इतने अतिरिक्त भार को सहन नहीं कर सका और पूरी इमारत भरभराकर गिर गई। विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि निर्माण से पहले संरचनात्मक सुरक्षा का आकलन किया गया था या नहीं।
अवैध निर्माण की आशंका ने बढ़ाई मुश्किलें
हादसे के बाद अवैध निर्माण का मामला भी चर्चा में है। शुरुआती स्तर पर यह आरोप सामने आया है कि इमारत में नियमों से अधिक निर्माण कराया जा रहा था। सूत्रों का दावा है कि स्थानीय स्तर पर निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले कुछ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इसी बीच एमसीडी ने कार्रवाई करते हुए दो इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है। अब यह जांच का अहम हिस्सा होगा कि निर्माण को मंजूरी किन परिस्थितियों में मिली और निगरानी में कहां चूक हुई।
मलबे में अब भी लोगों के फंसे होने की आशंका
शनिवार शाम करीब 7:40 बजे हुए हादसे के बाद से राहत एजेंसियां लगातार मौके पर डटी हुई हैं। दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, एनडीआरएफ, डीडीएमए और अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से अभियान चला रही हैं। अब तक 12 लोगों को मलबे से बाहर निकाला जा चुका है। इनमें कई घायल हैं, जिनका इलाज एम्स ट्रॉमा सेंटर और अन्य अस्पतालों में चल रहा है। अधिकारियों का मानना है कि मलबे के भीतर अभी भी कुछ लोगों के फंसे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए सर्च ऑपरेशन जारी रखा गया है।
छह मौतों के बाद पुलिस ने दर्ज किया केस
हादसे में जान गंवाने वालों में छात्र, नौकरीपेशा युवक और अन्य नागरिक शामिल हैं। मृतकों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। दिल्ली पुलिस ने मामले में गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर लिया है। जांच एजेंसियां अब इमारत के मालिक, निर्माण से जुड़े लोगों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस जल्द ही बिल्डिंग मालिक और निर्माण कार्य से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ कर सकती है।
CM के आदेश के बाद कई स्तरों पर जांच
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा कर पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जिला प्रशासन को हादसे के कारणों और जिम्मेदार लोगों की पहचान करने का निर्देश दिया गया है। एक तरफ बचाव अभियान जारी है, तो दूसरी तरफ जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या नियमों की अनदेखी और कमजोर निगरानी ने इस हादसे को जन्म दिया। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट कई बड़े खुलासे कर सकती है।