भोपाल के कलियासोत और भदभदा डैम में दुर्लभ स्किमर पक्षी दिखाई दिए हैं। विशेषज्ञों ने इसे जैव विविधता संरक्षण और स्वच्छ जलाशयों का सकारात्मक संकेत बताया।
भोपाल के कलियासोत और भदभदा क्षेत्र में दुर्लभ जलीय पक्षी स्किमर की मौजूदगी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह भोपाल के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है, क्योंकि इससे पहले इस पक्षी की उपस्थिति यहां दर्ज नहीं हुई थी।
वन विभाग ने इसे जैव विविधता संरक्षण और स्वच्छ जलाशयों की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया है। पिछले कुछ महीनों से स्किमर पक्षी नियमित रूप से इन क्षेत्रों में देखा जा रहा है।
स्वच्छ जल और शांत वातावरण का संकेत
स्किमर एक बेहद संवेदनशील जलीय पक्षी माना जाता है। यह केवल उन्हीं क्षेत्रों में निवास करता है, जहां स्वच्छ पानी, शांत वातावरण और सुरक्षित तटीय आवास मौजूद हों।विशेषज्ञों का कहना है कि स्किमर का भोपाल में दिखाई देना इस बात का प्रमाण है कि कलियासोत और भदभदा डेम क्षेत्र में पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण विकसित हुआ है।
वन विभाग ने संरक्षण प्रयासों को बताया वजह
वन विभाग के अनुसार यह सफलता लगातार किए जा रहे संरक्षण कार्यों, जलाशयों की सुरक्षा और हरित क्षेत्र बढ़ाने के प्रयासों का परिणाम है। विभाग ने स्थानीय नागरिकों और प्रकृति प्रेमियों की जागरूकता को भी इसका बड़ा कारण बताया।अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी आर्द्रभूमियों और पक्षियों के आवासों की सुरक्षा के लिए अभियान जारी रहेंगे, ताकि भोपाल “प्रकृति और पक्षी मित्र शहर” के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर सके।
प्रवासी पक्षियों की संख्या में आ रही कमी
पक्षी विशेषज्ञ Sudesh Waghmare ने बताया कि प्रवासी पक्षी भोजन, पानी और सुरक्षित वातावरण देखकर अपना ठिकाना चुनते हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में भोपाल में प्रवासी पक्षियों की संख्या में गिरावट देखी गई है।उन्होंने कहा कि बड़े तालाब के आसपास लगातार बढ़ते निर्माण कार्य, सैर-सपाटा और बोटिंग गतिविधियों से पक्षियों का शांत वातावरण प्रभावित हो रहा है। इसी कारण कई प्रजातियां धीरे-धीरे दूसरे स्थानों की ओर रुख कर रही हैं।
हजारों से घटकर सैकड़ों में पहुंची संख्या
विशेषज्ञों के मुताबिक पहले कुछ पक्षी प्रजातियां 10 से 15 हजार की संख्या में दिखाई देती थीं, लेकिन अब उनकी संख्या घटकर 100 से 150 तक रह गई है।उन्होंने कहा कि शहर के आसपास की वाटर बॉडी खत्म होने और अतिक्रमण बढ़ने से भी पक्षियों के लिए संकट बढ़ा है। यही कारण है कि कई प्रवासी पक्षी अब पुराने ठिकानों से दूर जा रहे हैं।
रूस-साइबेरिया से भोपाल पहुंचते हैं विदेशी पक्षी
भोपाल का बड़ा तालाब हर साल हजारों किलोमीटर दूर से आने वाले विदेशी पक्षियों का आशियाना बनता है। रूस, साइबेरिया, उज्बेकिस्तान, चीन और आर्कटिक क्षेत्रों से आने वाले पक्षी करीब 12 हजार किलोमीटर का सफर तय कर यहां पहुंचते हैं।विशेषज्ञों के अनुसार यूरोप से यूरेशियन वेगान, रूस और मंगोलिया से ब्लैक रेड स्टार्ट और लैसर वाइट थ्रोट जैसी प्रजातियां भोपाल आती हैं। वहीं विसलिंग टील और पूली नेट स्टार्क जैसी प्रजातियों ने यहां स्थायी ठिकाना भी बना लिया है।