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ब्रज में मांस-मदिरा बंद करने की मांग

ब्रज में मांस-मदिरा बिक्री पर संत प्रेमानंद महाराज का बड़ा बयान, उठी प्रतिबंध की मांग

संत प्रेमानंद महाराज के बयान के बाद ब्रज में मांस और शराब बिक्री पर बहस तेज हो गई है। दिनेश शर्मा फलाहारी ने सीएम को पत्र लिखकर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की है।


ब्रज में मांस-मदिरा बिक्री पर संत प्रेमानंद महाराज का बड़ा बयान उठी प्रतिबंध की मांग

मथुरा-वृंदावन के पवित्र ब्रज क्षेत्र में मांस, अंडा और शराब की बिक्री को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। संत प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो सामने आने के बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया है। वीडियो में वे ब्रज की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान का हवाला देते हुए मांस और मदिरा की बिक्री बंद करने की बात कहते दिखाई दे रहे हैं।

यही सवाल अब स्थानीय संत समाज और श्रद्धालुओं के बीच भी उठने लगा है कि आखिर ब्रज जैसे धार्मिक क्षेत्र में इस तरह की चीजों की खुलेआम बिक्री क्यों होनी चाहिए। वीडियो वायरल होने के बाद कई धार्मिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

सीएम को लिखा गया पत्र

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब संत दिनेश शर्मा फलाहारी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ब्रज क्षेत्र में मांस, अंडा और शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की पत्र में कहा गया है कि ब्रज करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में धार्मिक वातावरण बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जाने की जरूरत है।

वायरल वीडियो के बाद बढ़ी चर्चा

संत प्रेमानंद महाराज का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और व्यापार से जोड़कर भी देख रहे हैं दरअसल, ब्रज क्षेत्र में पहले भी समय-समय पर इस तरह की मांग उठती रही है। धार्मिक संगठनों का कहना है कि वृंदावन, मथुरा और आसपास के क्षेत्रों की पहचान आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी है। ऐसे में मांस और शराब की बिक्री को लेकर विवाद नया नहीं माना जा रहा, लेकिन इस बार मामला इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि इसमें बड़े संतों की खुली प्रतिक्रिया सामने आई है।

ब्रज क्षेत्र की धार्मिक पहचान पर जोर

ब्रज को भगवान श्रीकृष्ण की लीला स्थली माना जाता है। यही वजह है कि यहां की धार्मिक परंपराओं को लेकर संत समाज हमेशा सक्रिय रहता है संतों का कहना है कि तीर्थ स्थलों की पवित्रता बनाए रखना जरूरी है। वहीं दूसरी ओर कुछ लोग यह भी मानते हैं कि किसी भी फैसले से पहले स्थानीय व्यापार, पर्यटन और आम लोगों की जरूरतों को भी ध्यान में रखना होगा। फिलहाल सोशल मीडिया से लेकर धार्मिक मंचों तक इस मुद्दे पर चर्चा तेज है। 

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