सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव का 38 साल की उम्र में निधन हो गया। राजनीति से दूर रहने वाले प्रतीक की जिंदगी रिश्तों, कारोबार और विवादों के बीच चर्चा में रही।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव का बुधवार को निधन हो गया। 38 साल की उम्र में आई इस खबर ने राजनीतिक और कारोबारी दोनों हलकों को चौंका दिया। परिवार के करीबी सूत्रों के मुताबिक वह लंबे समय से पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे।
यादव परिवार का हिस्सा होने के बावजूद प्रतीक ने खुद को हमेशा राजनीति से दूर रखा। वह न मंचों पर दिखे, न चुनावी रणनीति का हिस्सा बने। उनकी पहचान एक बिजनेसमैन, फिटनेस प्रेमी और निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में रहने वाले शख्स की रही। पिछले कुछ सालों में पत्नी अपर्णा यादव के साथ रिश्तों में तनाव, कारोबारी विवाद और अचानक सोशल मीडिया पोस्ट्स ने उन्हें चर्चा में रखा। लेकिन सार्वजनिक जीवन से दूरी के कारण उनकी निजी लड़ाईयों की जानकारी सीमित लोगों तक ही रही।
तीन साल की उम्र में टूटा परिवार, फिर बदली जिंदगी
प्रतीक यादव का जन्म 7 जुलाई 1987 को फर्रुखाबाद में हुआ था। उनके पिता चंद्रप्रकाश गुप्ता व्यवसायी थे और मां साधना गुप्ता नर्स थीं। बचपन में ही माता-पिता अलग हो गए और 1990 में दोनों का तलाक हो गया। इसके बाद साधना गुप्ता की जिंदगी में मुलायम सिंह यादव आए।
सैफई मेडिकल कॉलेज में काम के दौरान एक घटना ने दोनों को करीब ला दिया। बताया जाता है कि साधना ने मुलायम सिंह यादव की मां मूर्ति देवी को गलत इंजेक्शन लगने से बचाया था। यही मुलाकात आगे रिश्ते में बदल गई। 2007 में मुलायम सिंह यादव ने सार्वजनिक रूप से साधना को पत्नी और प्रतीक को अपना बेटा स्वीकार किया। आय से अधिक संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल शपथपत्र में भी उन्होंने इसका जिक्र किया था।
राजनीति नहीं, बिजनेस और फिटनेस चुना
लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल से पढ़ाई करने के बाद प्रतीक ने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीकॉम किया। इसके बाद वह ब्रिटेन गए और यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स से एमबीए की पढ़ाई पूरी की। भारत लौटने पर मुलायम सिंह चाहते थे कि वह राजनीति में सक्रिय हों, लेकिन प्रतीक ने अलग रास्ता चुना। उन्होंने रियल एस्टेट कारोबार में कदम रखा और धीरे-धीरे खुद को बिजनेस की दुनिया में स्थापित करने की कोशिश की।
फिटनेस को लेकर उनका जुनून भी काफी चर्चा में रहा। एक समय उनका वजन 103 किलो तक पहुंच गया था। पिता मुलायम सिंह के चैलेंज के बाद उन्होंने करीब 36 किलो वजन कम किया। इसके बाद उन्होंने लखनऊ के गोमतीनगर में जिम शुरू किया और बॉडी बिल्डिंग में दिलचस्पी बढ़ती गई। लग्जरी कारों के प्रति उनका शौक भी अक्सर चर्चा में रहा। उनके पास लैंबोर्गिनी और पोर्शे जैसी महंगी गाड़ियां थीं।
अपर्णा यादव से दोस्ती प्यार में बदली
प्रतीक और अपर्णा यादव की कहानी राजनीति से अलग एक निजी रिश्ते की तरह देखी जाती रही। दोनों की मुलाकात स्कूल के दिनों में एक दोस्त की बर्थडे पार्टी में हुई थी। वहीं से दोस्ती शुरू हुई और लंबे रिलेशनशिप के बाद दोनों ने 2011 में शादी कर ली। सैफई में हुई इस शादी में कई बड़े राजनीतिक और फिल्मी चेहरे शामिल हुए थे। अमिताभ बच्चन भी मेहमानों में मौजूद रहे। दोनों की दो बेटियां हैं।
हालांकि बीते महीनों में रिश्तों में तनाव की खबरें भी सामने आईं। जनवरी में प्रतीक ने सोशल मीडिया पर तलाक का ऐलान कर दिया था और अपर्णा पर गंभीर आरोप लगाए थे। लेकिन नौ दिन बाद दोनों के बीच सुलह हो गई। इसके बाद उन्होंने परिवार के साथ तस्वीर साझा कर रिश्ते सामान्य होने का संकेत दिया।
कारोबारी विवादों ने भी बढ़ाई सुर्खियां
प्रतीक यादव का नाम कई कारोबारी विवादों में भी सामने आया। करीब 10 महीने पहले उन्होंने रियल एस्टेट कारोबारी कृष्णानंद पांडेय के खिलाफ पांच करोड़ रुपए की रंगदारी मांगने का मामला दर्ज कराया था। कृष्णानंद कभी उनके कारोबारी पार्टनर रहे थे। प्रतीक के ज्यादातर कारोबार उनके साले चंद्रशेखर सिंह बिष्ट के जरिए संचालित कंपनियों से जुड़े बताए जाते रहे।
साल 2012 के बाद कई रियल एस्टेट कंपनियां रजिस्टर हुईं। जिनमें चंद्रशेखर डायरेक्टर या डिज़िग्नेटेड डायरेक्टर रहे। इन कारोबारी गतिविधियों ने कई बार राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा पैदा की, क्योंकि परिवार का नाम सीधे तौर पर समाजवादी राजनीति से जुड़ा रहा है।
सोशल मीडिया तक सीमित हो गई थी दुनिया
करीबी लोगों का कहना है कि पिछले कुछ समय से प्रतीक यादव ने सामाजिक दायरा काफी सीमित कर लिया था। वह सार्वजनिक आयोजनों से दूरी बनाए रखते थे और बहुत कम लोगों से संपर्क में रहते थे। हालांकि उन्होंने ‘जीव आश्रय फाउंडेशन’ नाम से एक संस्था भी शुरू की थी, जो पशु कल्याण और जरूरतमंदों की मदद से जुड़े काम करती थी। राजनीति से दूरी के बावजूद समाज सेवा के जरिए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की।