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Maharajganj News: बिना डॉक्टर के चल रहे पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटर, उठने लगे सवाल

नौतनवा सोनौली हरदी डाली सहित पूरे जिले में संचालित कई पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटरों में पंजीकरण के मानकों और वास्तविक व्यवस्था के बीच बड़ा अंतर है।


maharajganj news बिना डॉक्टर के चल रहे पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटर उठने लगे सवाल

Maharajganj News: बिना डॉक्टर के चल रहे पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटर, उठने लगे सवाल |

राजेश जायसवाल, महराजगंज: नौतनवा सोनौली हरदी डाली सहित पूरे जिले में संचालित कई पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटरों में पंजीकरण के मानकों और वास्तविक व्यवस्था के बीच बड़ा अंतर है।  रजिस्ट्रेशन कराए गए  कागजों में डॉक्टरों की उपलब्धता दिखाकर सेंटरों का पंजीकरण करा लिया जाता है, लेकिन हकीकत में जांच के दौरान संबंधित डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं रहते। ऐसे में मरीजों की महत्वपूर्ण जांच कथित रूप से तकनीशियनों और कर्मचारियों के भरोसे संचालित की जा  रही है।

सेंटरों पर नही डॉक्टरों की मौजूदगी!

सूत्रों का दावा है कि अधिकांश पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर डॉक्टरों की नियमित मौजूदगी नहीं रहती। जांच रिपोर्ट पर डॉक्टरों की डिजिटल सिग्नेचर मार के रिपोर्ट दे दिया जाता है । मरीजों की जांच और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में डॉक्टर की भूमिका और निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।  जांच के लिए मरीजों को भेजने वाले कुछ चिकित्सकों को कमीशन दिए जाने की वजह से संबंधित सेंटरों पर मरीजों की संख्या बढ़ती है। जितना अधिक कमीशन, उतनी अधिक जांच कराने के लिए मरीजों को भेजा जा रहा है।

रिपोर्ट की गुणवत्ता बड़ा सवाल

सबसे गंभीर मामला यह है कि रिपोर्ट की गुणवत्ता को लेकर हैं। बताया जा रहा है कि कभी-कभी जांच रिपोर्ट में खामियां होने के बावजूद मरीज को रिपोर्ट सौंप दी जाती है और संबंधित चिकित्सक से आपसी स्तर पर मामला संभाल लिया जाता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

कागजों में डॉक्टर, मौके पर ज्यादातर नदारद 

अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी सेंटर के पंजीकरण के दौरान निर्धारित मानकों के अनुसार योग्य चिकित्सक अथवा संबंधित विशेषज्ञ की उपलब्धता से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए जाते हैं।  पंजीकरण के समय डॉक्टर की उपलब्धता दर्शाने के बाद सेंटर संचालित होने के दौरान उनकी नियमित मौजूदगी सुनिश्चित नहीं की जाती।

यदि स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन सेंटरों के सीसीटीवी कैमरों की नियमित रिकॉर्डिंग की जांच की जाए तो संबंधित अवधि में डॉक्टरों की वास्तविक उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। इससे यह भी पता लगाया जा सकता है कि पंजीकरण में दर्शाए गए चिकित्सक वास्तव में सेंटर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं या नहीं।

स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल

मरीजों की जांच से जुड़ी संस्थाओं में मानकों का पालन और योग्य चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि सेंटरों पर नियमित निरीक्षण किया जाता है तो डॉक्टरों की वास्तविक उपस्थिति की जांच कैसे होती है? स्वास्थ्य विभाग यदि जिले के पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटरों के पंजीकरण संबंधी दस्तावेजों, डॉक्टरों की उपस्थिति, सीसीटीवी फुटेज, जांच रिपोर्टों और मरीजों को रेफर किए जाने के पैटर्न की जांच करे तो कथित अनियमितताओं की तस्वीर सामने आ सकती है।

क्या कहते है सीएमओ?

अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए सेंटरों की जांच कराता है या फिर मामला कागजी खानापूर्ति तक ही सीमित रहता है। सीएमओ  एस के चौधरी का कहना है कि अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी पर रजिस्ट्रेशन के दौरान डॉक्टर की जो उपलब्धता  होनी चाहिए वह है या नही,  टीम गठित कर  जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

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