मध्य प्रदेश में मासूम बच्चों को कुपोषण से बचाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से लागू की गई 'पूरक पोषण आहार' योजना ग्वालियर जिले में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है।
Gwalior Anganwadi Scam: आंगनबाड़ियों में पोषण आहार पर ठेकेदारों का डाका, बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर |
Gwalior Anganwadi Scam: मध्य प्रदेश में मासूम बच्चों को कुपोषण से बचाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से लागू की गई 'पूरक पोषण आहार' योजना ग्वालियर जिले में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। प्रदेश सरकार द्वारा ठेकेदारी व्यवस्था खत्म कर भोजन आपूर्ति की जिम्मेदारी महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपी गई थी। लेकिन धरातल पर ठेकेदारों ने समूहों की आड़ में अपना कब्जा जमा रखा है। दैनिक समाचार पत्र 'स्वदेश' के खुलासे के अनुसार, ग्वालियर के शहरी क्षेत्र की 598 आंगनबाड़ियों पर फर्जीवाड़े के जरिए मासूमों का पोषण गटकने का खेल खुलेआम जारी है।
कमीशन पर समूहों का सौदा
ग्वालियर शहरी क्षेत्र की 5 परियोजनाओं में दर्ज करीब 1 लाख बच्चों के हिस्से का खाना आज भी ठेकेदार अपने निजी ठिकानों पर तैयार करवा रहे हैं। ठेकेदारों ने कागजों पर स्व-सहायता समूह बनाकर या वास्तविक समूहों को 10 से 20 हजार रुपये का मासिक कमीशन देकर ठेके पर ले लिया है। सरकारी खजाने से पोषण आहार का भुगतान तो समूहों के खातों में होता है, लेकिन राशि निकलते ही सीधे ठेकेदारों के पास पहुंच जाती है।
4 चम्मच दलिया-खिचड़ी, गायब हुआ मीनू
आंगनबाड़ियों में निर्धारित मीनू (लप्सी, सब्जी, रोटी, वेज पुलाव, सांभर आदि) को पूरी तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। ठेकेदार के कर्मचारी रोजाना ऑटो से 4 चम्मच दलिया व पतली दाल-चावल डालकर औपचारिकता पूरी कर देते हैं। सोमवार को 'स्वदेश' की पड़ताल में गुढ़ा क्षेत्र (परियोजना शहरी क्र.-5) की आंगनबाड़ियों में दोपहर 12 बजे के बाद सुबह का नाश्ता और भोजन एक साथ पहुंचता मिला, जिसमें से सब्जी और रोटी पूरी तरह गायब थी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि महीने में 15 दिन भी बच्चों का भोजन आंगनबाड़ी नहीं पहुंचता।
फर्जी उपस्थिति, अफसरों का दबाव
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने नाम न छापने की शर्त पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि 3 से 6 वर्ष के 80% बच्चे निजी स्कूलों में जाते हैं, लेकिन सहायक परियोजना अधिकारियों (APO) और वरिष्ठ अधिकारियों के दबाव में उनकी 95% उपस्थिति दर्ज करनी पड़ती है। जब कार्यकर्ताओं द्वारा भोजन की खराब गुणवत्ता या कम मात्रा पर सवाल उठाए जाते हैं, तो अधिकारी उन्हीं पर कार्रवाई की धमकी देते हैं।
अधिकारी देने से बच रहे जवाब
सीएजी (CAG) की वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट में भी मध्य प्रदेश की आंगनबाड़ियों में चल रही ठेकेदारी व्यवस्था, भोजन की मात्रा, बैंक खातों के संचालन और फर्जी उपस्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए गए थे। बावजूद इसके, महिला एवं बाल विकास विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
स्वदेश के खुलासे से मचा हड़कंप
'स्वदेश' द्वारा इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किए जाने के बाद विभाग में हड़कंप मचा है। जब इस घोटाले पर प्रतिक्रिया और स्व-सहायता समूहों की सूची मांगी गई, तो जिला कार्यक्रम अधिकारी उपासना राय ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि, मैं न तो किसी तरह की जानकारी दूंगी और न ही कोई प्रतिक्रिया दूंगी।