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MPPSC की 25,000 रुपये लेट फीस का नियम जारी रहेगा: मप्र हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, खारिज की याचिका

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी (ADPO) परीक्षा में ली जा रही 25,000 रुपये की लेट फीस के खिलाफ दायर याचिका को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (इंदौर पीठ) ने खारिज कर दियाहै।


mppsc की 25000 रुपये लेट फीस का नियम जारी रहेगा मप्र हाई कोर्ट का बड़ा फैसला खारिज की याचिका

इंदौर: मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे प्रदेश के लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी और प्रशासनिक खबर सामने आई है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने MPPSC द्वारा ली जा रही 25,000 रुपये की लेट फीस को पूरी तरह से वैधानिक और सही ठहराया है। अदालत ने लेट फीस की इस व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि अभ्यर्थियों के पास निर्धारित समय-सीमा में फॉर्म न भरने का कोई ठोस या जायज कारण मौजूद नहीं था।

मामला और विवाद की पृष्ठभूमि

यह संपूर्ण कानूनी विवाद MPPSC द्वारा आयोजित की जाने वाली सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी (ADPO) परीक्षा के आवेदन पत्र भरने से जुड़ा हुआ है। आयोग ने इस परीक्षा के लिए 10 मार्च 2026 को आधिकारिक विज्ञापन जारी किया था, जिसमें उम्मीदवारों के लिए 8 मई 2026 तक 500 रुपये का सामान्य आवेदन शुल्क तय किया गया था। नियत समय बीत जाने के बाद 9 मई से 15 मई तक 3,000 रुपये की लेट फीस निर्धारित थी, जिसे 16 मई से बढ़ाकर सीधे 25,000 रुपये कर दिया गया था। इसी 25,000 रुपये के अत्यधिक विलंब शुल्क के प्रावधान को याचिकाकर्ता मोहम्मद रिजवान द्वारा हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

याचिकाकर्ता और आयोग की दलीलें

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता न अदालत के समक्ष तर्क दिया कि इतनी अत्यधिक लेट फीस वसूलना आर्थिक आधार पर भेदभावपूर्ण है और इसकी वजह से कई उम्मीदवार फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं। याचिका में राजस्थान, केरल और उत्तर प्रदेश जैसे अन्य राज्यों के लोक सेवा आयोगों का हवाला भी दिया गया जहां अधिकतम लेट फीस इतनी अधिक नहीं ली जाती। वहीं, MPPSC की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने याचिका खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि 3,000 और 25,000 रुपये की लेट फीस का कड़ा प्रावधान जानबूझकर किया गया है ताकि अभ्यर्थी अंतिम तिथि का इंतजार न करें और परीक्षाएं समय पर आयोजित की जा सकें।

हाई कोर्ट का अंतिम फैसला

दोनों पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने याचिका को आधारहीन मानते हुए निरस्त कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के पक्ष में कोई उचित कानूनी आधार नहीं मिला और तय समय में आवेदन न भरने का भी कोई ठोस कारण पेश नहीं किया गया। इस फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि MPPSC का लेट फीस संबंधी नियम यथावत लागू रहेगा, इसलिए अभ्यर्थियों को समय रहते आवेदन करने की सलाह दी जाती है।

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