मध्यप्रदेश परिवहन मुख्यालय में अटैच कर्मचारी दफ्तर से गायब, फर्जी हाजिरी के आधार पर हर माह वेतन निकलने के आरोप। जांच के आदेश
मध्यप्रदेश परिवहन विभाग के प्रदेश मुख्यालय ग्वालियर तथा जिला और संभागीय कार्यालयों में अटैच किए गए प्रवर्तन अमले के अधिकांश कर्मचारी नियमित रूप से उपस्थित नहीं हो रहे हैं। आरोप है कि महीने में केवल एक-दो बार हाजिरी रजिस्टर पर हस्ताक्षर कराकर उनका पूरा वेतन आहरित किया जा रहा है।
नियम कुछ और, हकीकत कुछ और
नियमों के अनुसार प्रवर्तन अमले की पदस्थापना छह-छह माह के रोटेशन पर मुख्यालय कार्यालय और मैदानी क्षेत्र में की जाती है। अनियमितता या शिकायतों के मामलों में भी कर्मचारियों को मैदानी ड्यूटी से हटाकर मुख्यालय में अटैच किया जाता है। वर्तमान में मुख्यालय और आरटीओ कार्यालयों में बड़ी संख्या में कर्मचारी अटैच हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इनमें से कई कर्मचारी वास्तविक रूप से चेकपॉइंट पर ड्यूटी कर रहे हैं या फिर निजी कार्यों में लगे हुए हैं।
मुख्यालयों में अटैच कर्मचारियों के लिए हाजिरी रजिस्टर रखे गए हैं, लेकिन अधिकांश कॉलम माह के अंतिम दिनों तक खाली रहते हैं। इसके बाद एक साथ हस्ताक्षर कराए जाने की बात सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया में अवैध लेनदेन की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रवर्तन अमले की ई-हाजिरी क्यों नहीं?
मुख्यालयों में पदस्थ अन्य कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक (थंब मशीन) के जरिए उपस्थिति अनिवार्य की गई है, जबकि अटैच प्रवर्तन अमले की हाजिरी अब भी रजिस्टर के माध्यम से ही ली जा रही है। इससे व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
रोजनामचा व्यवस्था का अभाव
पुलिस थानों की तर्ज पर परिवहन विभाग के चेकपॉइंट पर रोजनामचा संधारित किया जाता है, जिसमें ड्यूटी और दैनिक गतिविधियों का विवरण दर्ज रहता है। लेकिन मुख्यालय में अटैच प्रवर्तन कर्मचारियों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। विभागीय सूत्रों के अनुसार पूर्व में मुख्यालय स्तर पर रोजनामचा लागू करने की पहल जरूर हुई थी, लेकिन वह अमल में नहीं आ सकी।
इनका कहना है
“मुख्यालय में अटैच कर्मचारियों की अनुपस्थिति और फर्जी हस्ताक्षर की जानकारी आपके माध्यम से मिली है। मामले की जांच कराई जाएगी। यदि गड़बड़ी पाई गई तो संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। रोजनामचा के प्रावधान को लेकर भी जानकारी ली जाएगी।”
- विनोद भार्गव, उपायुक्त (स्थापना शाखा), परिवहन आयुक्त कार्यालय, ग्वालियर
स्थापना शाखा पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
करीब तीन माह पहले स्थापना शाखा के तत्कालीन प्रभारी बाबू पर फर्जी हस्ताक्षर और विभागीय परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप लगे थे। इस मामले में विभागीय जांच भी कराई गई थी। सूत्रों का कहना है कि यदि कर्मचारियों की गतिविधियों का विधिवत और नियमित रिकॉर्ड संधारित किया जाए, तो इस तरह की गड़बड़ियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।