मध्यप्रदेश में पदोन्नति नियम-2025 को लेकर आईटीआई एवं कौशल विकास विभाग के कर्मचारियों ने नए सिरे से सवाल उठाए हैं। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि 12 अंकों की अनिवार्यता के कारण बड़ी संख्या में पात्र कर
मध्यप्रदेश में पदोन्नति नियम-2025 को लेकर आईटीआई एवं कौशल विकास विभाग के कर्मचारियों ने नए सिरे से सवाल उठाए हैं। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि 12 अंकों की अनिवार्यता के कारण बड़ी संख्या में पात्र कर्मचारी पदोन्नति से वंचित हो गए हैं। उन्होंने नियम में संशोधन और पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि नए नियम का असर उन गोपनीय चरित्रावलियों (CR) पर डाला गया है, जो उस समय लिखी गई थीं जब 12 अंकों की अनिवार्यता लागू ही नहीं थी। उनका दावा है कि इसी वजह से प्रमोशन सूची में व्यापक विसंगतियां सामने आई हैं।
पांच साल की CR बनी विवाद की वजह
मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 के तहत पिछले पांच वर्षों की गोपनीय चरित्रावली के आधार पर अंक तय किए जाते हैं। उत्कृष्ट ग्रेड पर 4, बहुत अच्छा पर 3, अच्छा पर 2, औसत पर 1 और घटिया ग्रेड पर 0 अंक मिलते हैं। तृतीय श्रेणी के कई पदों पर पदोन्नति के लिए न्यूनतम 12 अंक अनिवार्य हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लगातार पांच वर्षों तक केवल "अच्छा" ग्रेड मिलने पर कुल 10 अंक ही बनते हैं, जिससे कर्मचारी प्रमोशन की पात्रता से बाहर हो जाते हैं।
2025 के नियम का असर पुराने रिकॉर्ड पर होने का आरोप
कर्मचारी संघों का आरोप है कि पदोन्नति के लिए 2020 से शुरू हुई गोपनीय चरित्रावलियों को आधार बनाया गया, जबकि उस समय कर्मचारियों को यह जानकारी नहीं थी कि भविष्य में 12 अंकों की अनिवार्यता लागू होगी। उनका कहना है कि अधिकांश अधिकारियों की CR सामान्य "अच्छा" श्रेणी में दर्ज हुई, जिसका असर अब पदोन्नति प्रक्रिया पर पड़ रहा है। इसी आधार पर संगठनों ने नियम में संशोधन या एक बार के लिए विशेष छूट देने की मांग की है।
वरिष्ठ प्रशिक्षण अधिकारी भी प्रमोशन से वंचित
संगठनों का दावा है कि विवाद केवल लिपिक वर्ग तक सीमित नहीं है। कई वरिष्ठ प्रशिक्षण अधिकारी भी पदोन्नति सूची से बाहर रह गए हैं। उनका कहना है कि विभाग में लंबे समय से उच्च पद खाली हैं, लेकिन मौजूदा नियमों के कारण उन्हें भरा नहीं जा पा रहा है। इससे विभागीय कामकाज और प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, संबंधित मंत्री और सामान्य प्रशासन विभाग को ज्ञापन सौंपकर न्यूनतम अर्हकारी अंक 12 से घटाकर 10 करने, एक बार के लिए One Time Relaxation देने, विभागवार पदोन्नति प्रक्रिया की समीक्षा कराने और वंचित कर्मचारियों के मामलों पर पुनर्विचार की मांग की है। कर्मचारी नेताओं का दावा है कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है, हालांकि राज्य सरकार की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल नियमों में बदलाव को लेकर भी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।