NFHS-6 रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में 26.5% महिलाएं और 28.3% पुरुष दुबलेपन से प्रभावित हैं। महिलाओं और पुरुषों दोनों में बढ़ी पोषण की समस्या, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति अधिक गंभीर है।
मध्य प्रदेश में कुपोषण की समस्या केवल बच्चों तक सीमित नहीं रह गई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के वयस्कों में भी दुबलापन तेजी से बढ़ रहा है। प्रदेश की 26.5% महिलाएं और 28.3% पुरुष सामान्य वजन से कम हैं। यह राष्ट्रीय औसत 19.7% से काफी अधिक है। आंकड़ों के अनुसार महिलाओं में दुबलेपन की दर राष्ट्रीय औसत से 6.8 प्रतिशत अंक और पुरुषों में 8.6 प्रतिशत अंक ज्यादा है। यानी मध्य प्रदेश में लगभग हर चौथा या पांचवां वयस्क पर्याप्त पोषण नहीं मिलने के कारण कम वजन की श्रेणी में है।
पुरुषों में तेजी से बिगड़ी स्थिति
NFHS-6 के अनुसार प्रदेश के 28.3% पुरुष दुबलेपन से प्रभावित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या और गंभीर है, जहां 30.7% पुरुषों का वजन सामान्य से कम है। शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 21.9% दर्ज किया गया है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि NFHS-5 में दुबले पुरुषों की हिस्सेदारी 20.8% थी, जो अब बढ़कर 28.3% हो गई है। यानी पांच वर्षों में 7.5 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई है। यह बढ़ोतरी महिलाओं की तुलना में दोगुने से भी अधिक है।
महिलाओं का पोषण स्तर भी हुआ कमजोर
महिलाओं के पोषण सुधार के लिए कई सरकारी योजनाएं संचालित होने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं दिख रहा। NFHS-6 के मुताबिक प्रदेश की 26.5% महिलाएं दुबलेपन से प्रभावित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है, जहां 29.9% महिलाएं सामान्य वजन से कम हैं। इसके मुकाबले शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 17.4% है। पिछले सर्वेक्षण NFHS-5 में 23% महिलाएं दुबलेपन का शिकार थीं। अब यह बढ़कर 26.5% पहुंच गई हैं, यानी पांच वर्षों में 3.5 प्रतिशत अंकों की वृद्धि दर्ज हुई है।
गांवों में कुपोषण, शहरों में बढ़ता मोटापा
सर्वेक्षण से प्रदेश में पोषण की दोहरी चुनौती सामने आई है। एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी आबादी पर्याप्त भोजन और पोषण के अभाव में दुबलेपन का शिकार है, वहीं दूसरी ओर शहरी क्षेत्रों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। शहरी महिलाओं में 36.1% ओवरवेट या मोटापे की श्रेणी में हैं, जबकि 17.4% महिलाएं अभी भी दुबली हैं। दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में 29.9% महिलाएं कम वजन की हैं और 17.1% मोटापे से प्रभावित हैं। पुरुषों में भी यही तस्वीर दिखाई देती है। शहरों में 26.9% पुरुष ओवरवेट या मोटापे के शिकार हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 14.1% है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि दुबलापन केवल भोजन की कमी का संकेत नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, पोषण जागरूकता, आय स्तर और जीवनशैली से भी जुड़ा हुआ है। लगातार बढ़ता दुबलापन कार्यक्षमता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और उत्पादकता पर सीधा असर डाल सकता है। NFHS-6 के आंकड़े संकेत देते हैं कि मध्य प्रदेश में कुपोषण अब केवल बच्चों का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि वयस्क आबादी के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।