MP के बड़े शहर भीषण गर्मी में ‘हीट आइलैंड’ बनते जा रहे हैं। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और सतना में तापमान 44°C पार पहुंचा, रातें भी गर्म बनी हुई हैं।
लंबी अवधि तक चल रही गर्म हवाएं बनीं परेशानी की वजह
पिछले तीन-चार दिनों में जिस तरीके से प्रदेश के अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी हुई है, उससे राज्य के अधिकतर बड़े शहर हीट आइलैंड (गर्म टापू) बनने की ओर बढ़ रहे हैं। दरअसल, ग्वालियर को छोड़कर भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, सतना और सागर का अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया है। यह पारा सामान्य से काफी ज्यादा है। इन शहरों का न्यूनतम तापमान भी सामान्य से ऊपर बना हुआ है।
खास बात यह है कि अधिकतर शहरों में दिन के समय डामर पिघलने की सूचनाएं मिल रही हैं। यह इस बात का संकेत है कि शहरी सड़कों के किनारे हरियाली काफी कम हो चुकी है।हरियाली के लिए पहचाने जाने वाले भोपाल और इंदौर जैसे खूबसूरत शहरों में अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है। मौसम विज्ञान विभाग की ओर से जारी आधिकारिक पूर्वानुमान सही साबित हुआ तो इस सप्ताह दिन का तापमान और बढ़ सकता है।
भोपाल और इंदौर में बढ़ी चिंता
भोपाल का अधिकतम तापमान सोमवार को 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से दो डिग्री अधिक है। इंदौर का अधिकतम तापमान सामान्य से 3.6 डिग्री अधिक, यानी 44.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। यहां रात का तापमान भी सामान्य से चार डिग्री अधिक बना हुआ है। इसी तरह उज्जैन का अधिकतम तापमान 44 डिग्री और सतना का तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। ग्वालियर का तापमान 43.7 डिग्री सेल्सियस रहा। हालांकि वहां भी गर्मी में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। जबलपुर का तापमान 42.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।
ग्वालियर को छोड़ दें तो शेष सभी बड़े शहरों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक ही रहा है। रात में भी गर्म हवाएं चल रही हैं। पिछले चार-पांच वर्षों में अधिकतम तापमान इतना लगातार ऊंचा कभी नहीं रहा।हालात यह हैं कि सुबह 9 बजे के बाद ही तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचने लगता है। गर्म हवाओं का दौर सुबह 9 बजे से लेकर रात 9 बजे के बाद तक बना रहता है।
हीट आइलैंड से आशय
हीट आइलैंड को “गर्म टापू” भी कहा जाता है। इसमें ऐसी मौसमी स्थिति बनती है, जब घनी आबादी वाले शहरी इलाके अपने आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक गर्म हो जाते हैं। इसकी वजह से दिन में पड़ी गर्मी देर शाम तक महसूस होती रहती है।
हीट आइलैंड बनने की प्रमुख वजहें
सड़कें और इमारतें
शहरों में सड़कें और इमारतें गहरे रंग की सामग्री से बनाई जाती हैं, जो सूरज की गर्मी को तेजी से सोख लेती हैं और धीरे-धीरे छोड़ती हैं। इसलिए देर तक तपिश महसूस होती है।
हरियाली और पेड़ों की कमी
पेड़ कम होने से वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे वातावरण ठंडा नहीं हो पाता।
ऊंची इमारतें
गगनचुंबी इमारतें हवा के प्राकृतिक बहाव को रोकती हैं और गर्मी को गलियों में फंसा देती हैं।
आधुनिक साधनों का असर
वाहनों के धुएं और एयर कंडीशनर जैसी मशीनों से निकलने वाली अतिरिक्त ऊष्मा भी शहरों का तापमान बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाती है।