मध्य प्रदेश में 1 जुलाई से सरकारी कर्मचारियों के लिए बायोमैट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य होगी। उपस्थिति दर्ज नहीं होने पर वेतन कट सकता है।
जीएडी का आदेश : प्रदेश के 5.50 लाख शासकीय कर्मियों के लिए 1 जुलाई से नई व्यवस्था लागू
मध्यप्रदेश शासन ने सरकारी कर्मचारियों की समयबद्धता और कार्यालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के सभी सरकारी कार्यालयों में 1 जुलाई से बायोमैट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य कर दी है।राज्य के करीब 5.50 लाख शासकीय कर्मचारियों पर यह व्यवस्था लागू होगी। जीएडी के सूत्रों के अनुसार, कार्यालयों में लेटलतीफी और बिना अनुमति अनुपस्थित रहने की शिकायतों को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।इसके तहत ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में स्थित सरकारी कार्यालयों में नई बायोमैट्रिक और स्मार्ट अटेंडेंस प्रणाली लागू की जाएगी। निर्धारित समय पर कार्यालय नहीं पहुंचने और बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं कराने पर कर्मचारियों के वेतन में कटौती की जा सकती है।
संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों पर भी सख्ती
जीएडी के अनुसार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और अन्य विभागों के संविदा कर्मचारियों, आशा कार्यकर्ताओं और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए भी 1 अप्रैल से बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य किया जा चुका है।विभागीय सूत्रों के मुताबिक सत्यापन पूरा नहीं होने पर संबंधित कर्मचारियों का मासिक वेतन रोका जा रहा है। इस पूरी व्यवस्था की निगरानी सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा की जा रही है।
सीट छोड़ते ही सिस्टम में दिखेगी जानकारी
जीएडी अधिकारियों के मुताबिक कर्मचारियों की कार्यशैली को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार नया आधुनिक सॉफ्टवेयर विकसित कर रही है।इस सॉफ्टवेयर के जरिए कर्मचारी के सीट छोड़ते ही उसकी जानकारी सिस्टम में दर्ज हो जाएगी। यदि कोई कर्मचारी लंबे समय तक अपनी सीट से अनुपस्थित रहता है, तो सिस्टम स्वतः आधे दिन की अनुपस्थिति या लघु अवकाश दर्ज कर सकता है।राज्य के नगर निगमों और नगर पालिकाओं में चेहरे की पहचान आधारित बायोमैट्रिक प्रणाली पहले ही लागू की जा चुकी है।