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MP Colleges to Adopt Anganwadis

MP के उच्च संस्थानों को मिली नई जिम्मेदारी: अब कॉलेज और विश्वविद्यालय गोद लेंगे आंगनवाड़ियां

In a new initiative in Madhya Pradesh, government and private higher education institutions are directed to adopt local Anganwadis to improve child welfare and development.


mp के उच्च संस्थानों को मिली नई जिम्मेदारी अब कॉलेज और विश्वविद्यालय गोद लेंगे आंगनवाड़ियां 

मध्यप्रदेश में आंगनवाड़ियों के विकास और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए एक नई पहल शुरू होने जा रही है। मुख्य सचिवों की पांचवीं राष्ट्रीय बैठक में लिए गए निर्णय के बाद राज्य सरकार ने सभी शासकीय और निजी विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों को अपने क्षेत्र की आंगनवाड़ियों को गोद लेने के निर्देश जारी किए हैं। इस पहल का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों को समाज और बाल विकास से सीधे जोड़ना है, ताकि बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सके।

उच्च शिक्षा विभाग ने जारी किए निर्देश

महिला एवं बाल विकास विभाग की आयुक्त ने इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया था। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने सभी शासकीय एवं निजी महाविद्यालयों, राज्य सार्वजनिक विश्वविद्यालयों और निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग को निर्देश जारी करते हुए आंगनवाड़ियों को गोद लेने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है।

शिक्षक और विद्यार्थी भी निभाएंगे सामाजिक जिम्मेदारी

योजना के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षक और विद्यार्थी आंगनवाड़ियों में पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता, प्रारंभिक शिक्षा और जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों में सहयोग करेंगे। साथ ही बच्चों के लिए संसाधन उपलब्ध कराने और नवाचार आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने में भी भागीदारी करेंगे। सरकार का मानना है कि इससे उच्च शिक्षण संस्थान केवल शिक्षा के केंद्र नहीं रहेंगे, बल्कि सामाजिक बदलाव के भागीदार भी बनेंगे।

प्रदेश में 97 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्र

मध्यप्रदेश में वर्तमान में 84,650 मुख्य आंगनवाड़ी और 12,670 उप-आंगनवाड़ी सहित कुल 97,320 आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हैं। ये सभी 313 विकासखंडों में महिला एवं बाल विकास विभाग की एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना के तहत संचालित किए जाते हैं। यहां छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं, टीकाकरण और प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है। सरकार को उम्मीद है कि उच्च शिक्षण संस्थानों की भागीदारी से इन केंद्रों की गुणवत्ता और बच्चों के सर्वांगीण विकास में सकारात्मक बदलाव आएगा।

 

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