ध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकारों ने पेंशनर्स के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब महंगाई राहत बढ़ाने से पहले दूसरे राज्य की मंजूरी नहीं लेनी होगी,जिससे लाखों पेंशनर्स को समय पर लाभ मिलेगा।
भोपाल। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की राज्य सरकारों ने महंगाई राहत जारी करने से पहले दूसरे राज्य की सहमति लेने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। इस संबंध में शुक्रवार को आदेश भी जारी कर दिया है। इस फैसले के बाद दोनों राज्य अपने स्तर पर कार्यकारी आदेश जारी कर महंगाई राहत बढ़ा सकेंगे। इससे मध्यप्रदेश और छग के लाखों पेशनर्स को राहत मिली है।
यह निर्णय प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाने और पेंशनर्स को समय पर महंगाई राहत का लाभ दिलाने के उद्देश्य से लिया गया है। आदेश 17 जुलाई से प्रभावी माना जाएगा। वित्त विभाग के जारी आदेश के अनुसार अब महंगाई राहत घोषित करने के लिए दूसरे राज्य की मंजूरी लेना जरूरी नहीं होगा। दोनों राज्य सीधे आदेश जारी कर पेंशनर्स को बढ़ी हुई महंगाई राहत का लाभ दे सकेंगे। हालांकि, कोई भी राज्य, केंद्र सरकार से घोषित दर से अधिक महंगाई राहत नहीं देगा। साथ ही बढ़े हुए वित्तीय भार की जानकारी दूसरे राज्य को पत्र के माध्यम से भेजी जाएगी।
पेंशनर्स ने किया स्वागत
मध्यप्रदेश के पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने इस फैसले का स्वागत करते हुए मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार का धन्यवाद किया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना ने कहा कि लंबे समय से इस व्यवस्था में बदलाव की मांग की जा रही थी। इसके लिए एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की थी। संगठन का दावा है कि अधिनियम में दूसरे राज्य की सहमति लेने का स्पष्ट प्रावधान नहीं था, फिर भी पिछले करीब 25 सालों से इसी आधार पर महंगाई राहत देने में देरी होती रही।
18 महीने के बकाया डीए की उठाई मांग
संगठन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी और भोपाल जिलाध्यक्ष सुरेश शर्मा ने सरकार से 18 महीने के बकाया महंगाई राहत का भुगतान जल्द करने की मांग की है। उनका कहना है कि पेंशनर्स को लंबे समय से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, इसलिए बकाया राशि का जल्द भुगतान किया जाना चाहिए।
चार लाख 40 हजार से ज्यादा पेंशनर्स को मिली राहत
मध्यप्रदेश पेंशन विभाग के मुताबिक सहमति खत्म होने से प्रदेश में दिसंबर 2025 तक कुल चार लाख 40 हजार से ज्यादा पेंशनर्स को लाभ मिलेगा, जो पेशंन के साथ मंहगाई राहत पाने के लिए इंतजार करते थे। इन पर एक नवंबर 2000 का वह इंटीग्रेटेड एमपी का नियम लागू नहीं होता, लेकिन फिर भी मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार उन्हें इसमें शामिल कर रही हैं।