मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 का फील्ड सर्वे 1 मई से शुरू हो गया है। 1.70 लाख अधिकारी-कर्मचारी घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। सरकार ने डेटा गोपनीय रहने का भरोसा दिया।
मध्यप्रदेश में जनगणना शुरू हो चुकी है। 16 अप्रैल से केंद्र सरकार के जनगणना विभाग द्वारा जारी वेबसाइट पर बुधवार तक 5.81 लाख परिवारों ने अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज करा दी है। आज शुक्रवार, 1 मई से प्रगणक और सुपरवाइजर घर-घर पहुंचकर जनगणना शुरू करेंगे।
पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल
यह जानकारी प्रभारी जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने गुरुवार को पत्रकारवार्ता में दी। गोयल छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस अधिकारी हैं, जो मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों में जनगणना कार्य देखेंगे। उन्होंने कहा कि स्वगणना की प्रक्रिया 16 अप्रैल से जारी है। इसे पूरा होने में समय लगेगा, लेकिन बुधवार तक 5 लाख 81 हजार 152 परिवारों ने अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज करा दी है।
मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का फील्ड कार्य 1 मई से प्रारंभ हो रहा है, जो 30 मई तक चलेगा। इस अभियान के दौरान राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जनगणना कर्मियों द्वारा घर-घर जाकर प्रत्येक मकान, परिवार और संरचना से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी।
केवल विकास योजनाओं में आंकड़ों का उपयोग
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जनगणना अधिनियम के अनुसार एकत्र किए गए आंकड़ों का उपयोग टैक्स, पुलिस या किसी जांच प्रक्रिया में नहीं किया जा सकता और न ही इन्हें किसी साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इन आंकड़ों का उपयोग केवल प्रदेश और देश की विकास योजनाएं तैयार करने के लिए किया जाएगा। इसलिए नागरिक घबराएं नहीं और घर पहुंचे प्रगणक को सही जानकारी दें।
1 लाख 37 हजार मकानों का सूचीकरण
जनगणना कार्य के लिए मध्यप्रदेश में करीब 1 लाख 70 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जिनमें 72 प्रमुख जनगणना अधिकारी, 440 जिला स्तरीय अधिकारी, 989 चार्ज अधिकारी, 3028 मास्टर और फील्ड ट्रेनर्स, 1 लाख 41 हजार प्रगणक और 24 हजार 300 सुपरवाइजर शामिल हैं। इस प्रक्रिया के लिए 1 लाख 37 हजार मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाए गए हैं। पत्रकारवार्ता में मुख्य सचिव अनुराग जैन भी उपस्थित रहे।
जनगणना निदेशक ने कहा- लापरवाही बर्दाश्त नहीं
निदेशक गोयल ने जनगणना 2027 के तहत मध्यप्रदेश में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के लिए व्यापक तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने सभी संभागायुक्तों, कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक ली। यह बैठक राज्य के मुख्य सचिव अनुराग जैन के निर्देश पर आयोजित की गई थी।
बैठक में मकान सूचीकरण कार्य की समीक्षा की गई। गोयल ने अभियान की कार्ययोजना, डेटा संग्रहण की प्रक्रिया, तकनीकी व्यवस्थाओं और निगरानी तंत्र पर चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गणना कार्य में किसी भी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। इस बार मकान सूचीकरण और जनगणना की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल माध्यमों और प्रगणकों के मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए की जाएगी।
अपार्टमेंट परिसरों के लिए विशेष रणनीति
शहरी क्षेत्रों, बंद गेट वाली कॉलोनियों और अपार्टमेंट परिसरों में गणना कार्य को लेकर विशेष रणनीति बनाई गई है। आवासीय समितियों और प्रबंधन समूहों को निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि उनके समन्वय और सहयोग से प्रगणकों को प्रवेश में किसी प्रकार की बाधा न हो और कोई भी परिवार गणना से वंचित न रहे।
वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में मुनादी आदि के माध्यम से जनगणना के महत्व और जागरूकता उत्पन्न करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और फेक न्यूज पर निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए।जनगणना संबंधी जानकारी और सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1855 भी उपलब्ध रहेगा। परिवारों द्वारा दी गई जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। इस आधार पर किसी को भी व्यक्तिगत रूप से कोई हानि नहीं होगी। उन्होंने स्थानीय मीडिया, रेडियो, सोशल मीडिया और जनसंपर्क माध्यमों के जरिए जनजागरूकता अभियान चलाने की अपील की। बिना अनुमति के कोई जानकारी मीडिया में वायरल करने पर प्रतिबंध रहेगा।
कॉलेज प्राध्यापकों ने की जनगणना कार्य से मुक्त रखने की मांग
मध्यप्रदेश प्राध्यापक संघ ने जनगणना कार्य में लगाई गई ड्यूटी से प्राध्यापकों को मुक्त रखने की मांग की है। अवर मुख्य सचिव को दिए ज्ञापन में कहा गया कि शासकीय महाविद्यालयों के सहायक प्राध्यापकों या प्राध्यापकों की ड्यूटी केवल स्तर-4 में फील्ड ट्रेनर के रूप में लगाई जा सकती है, जबकि नगर निगम जोन के चार्ज ऑफिसरों ने उनकी ड्यूटी स्तर-5 में प्रगणक और पर्यवेक्षक के रूप में लगा दी है, जो नियमानुसार नहीं है।संघ ने कहा कि मई में प्रदेश के महाविद्यालयों में परीक्षाएं और प्रवेश प्रक्रिया चलती हैं। पहले से ही कॉलेजों में शिक्षकों की कमी है। ऐसे में प्राध्यापकों की जनगणना ड्यूटी लगने से परीक्षा और प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित होगी।