मध्यप्रदेश में निगम-मंडल और एल्डरमैन नियुक्तियों को लेकर बीजेपी ने लगभग तैयारी पूरी कर ली है। प्रदेश अध्यक्ष ने संकेत दिए कि सूची जल्द जारी हो सकती है, लेकिन हारे हुए नेताओं और पूर्व मंत्रियों को प्रा
भोपाल में सियासत इन दिनों फिर से गरमा गई है। वजह वही पुरानी लेकिन अहम निगम-मंडल और एल्डरमैन की नियुक्तियां। लंबे समय से इस सूची का इंतजार कर रहे बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए अब कुछ हलचल दिख रही है। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संकेत दिया है कि पार्टी की ओर से नामों पर लगभग सहमति बन चुकी है, बस अब केंद्रीय नेतृत्व की अंतिम मुहर का इंतजार है। अगर सब ठीक रहा, तो सूची ज्यादा देर नहीं लगेगी। राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज है कि इस बार कई नए चेहरे सामने आ सकते हैं, जबकि कुछ पुराने दावेदारों को निराशा भी हाथ लग सकती है।
संगठन ने अपना काम लगभग पूरा किया
पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बताया कि प्रदेश संगठन अपने हिस्से की कसरत लगभग पूरी कर चुका है। नामों को लेकर लंबी चर्चा हुई है और अलग-अलग स्तर पर सुझाव भी लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अब अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर होना है। वहीं यह भी संकेत दिया कि पार्टी की प्राथमिकता फिलहाल संगठन की अन्य नियुक्तियों को पूरा करने की है, उसके बाद ही निगम-मंडल की सूची जारी की जाएगी। राजनीति में अक्सर ऐसा होता है कि संगठनात्मक संतुलन साधना पड़ता है, और यही वजह है कि प्रक्रिया थोड़ी लंबी खिंच जाती है।
एल्डरमैन नियुक्ति के बाद आएगी निगम-मंडल सूची
प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी साफ किया कि पहले एल्डरमैन की नियुक्तियां की जाएंगी। इसके बाद ही निगम-मंडल के पदों की घोषणा होगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह एक तरह से रणनीतिक कदम है, ताकि स्थानीय स्तर पर संगठन और प्रशासनिक संतुलन बना रहे। इससे यह भी संकेत मिलता है कि काफी समय से इंतजार कर रहे कई कार्यकर्ताओं को जल्द जिम्मेदारी मिल सकती है।
हारे हुए नेताओं और पूर्व मंत्रियों को प्राथमिकता नहीं
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने एक अहम बात और कही। उन्होंने साफ तौर पर संकेत दिया कि हारे हुए नेताओं और पूर्व मंत्रियों को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। पार्टी इस बार उन कार्यकर्ताओं को मौका देना चाहती है जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय हैं, और जिनकी छवि जमीनी काम करने वाले नेता की रही है। यानी, टिकट नहीं मिला या चुनाव हार गए इसका मतलब यह नहीं कि सीधे निगम-मंडल में जगह मिल जाएगी। हालांकि, एक दिलचस्प बात यह भी है कि कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए कुछ नेताओं को मौका मिल सकता है, बशर्ते वे संगठन की कसौटी पर खरे उतरते हों।
अप्रैल में होगी नई प्रदेश कार्यसमिति की पहली बैठक
प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष ने जानकारी दी कि नई प्रदेश कार्यकारिणी की पहली कार्यसमिति बैठक अप्रैल में आयोजित की जाएगी। इसके बाद हर तीन महीने में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक नियमित रूप से करने की योजना है। पार्टी का कहना है कि इससे संगठन की गतिविधियों की समीक्षा और राजनीतिक रणनीति तय करने में आसानी होगी।