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Deputy Collector Sent to Jail in morena

रेप केस में डिप्टी कलेक्टर जेल पहुंचे, गिरफ्तारी के बाद बिगड़ी तबीयत; पुराने विवाद भी फिर चर्चा में

मुरैना में डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर की रेप केस में गिरफ्तारी के बाद उन्हें कोर्ट ने जेल भेज दिया। शिकायत में शादी का झांसा, धमकी और लंबे समय तक शोषण के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।


रेप केस में डिप्टी कलेक्टर जेल पहुंचे गिरफ्तारी के बाद बिगड़ी तबीयत पुराने विवाद भी फिर चर्चा में

MP SDM News |

मुरैना में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर की गिरफ्तारी ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। एक युवती की शिकायत पर दर्ज रेप केस में पुलिस ने बुधवार रात उन्हें हिरासत में लिया और गुरुवार को अदालत में पेश किया। गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। ब्लड प्रेशर बढ़ने पर पुलिस उन्हें तड़के अस्पताल लेकर पहुंची। 

प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से 19 जून तक न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया गया। मामला सिर्फ एक आपराधिक शिकायत तक सीमित नहीं है। आरोप ऐसे अधिकारी पर लगे हैं, जो पहले भी कई विवादों और प्रशासनिक कार्रवाई का सामना कर चुके हैं।

शादी के वादे से शुरू हुआ विवाद

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता युवती ने आरोप लगाया है कि उसकी पहचान अरविंद माहौर से फेसबुक के जरिए हुई थी। सोशल मीडिया पर शुरू हुई बातचीत बाद में फोन कॉल तक पहुंची और फिर शादी का प्रस्ताव सामने आया। युवती का दावा है कि विवाह का भरोसा मिलने के बाद उसने संबंध को गंभीरता से लिया। लेकिन बाद में हालात बदल गए और मामला थाने तक पहुंच गया।

एक साल से ज्यादा समय तक शोषण का आरोप

एफआईआर के मुताबिक, 30 मार्च 2025 को माहौर युवती को अपने साथ लेकर मुरैना के एक रेस्ट हाउस पहुंचे। यहां उसकी इच्छा के खिलाफ संबंध बनाए गए। शिकायत में कहा गया है कि इसके बाद सबलगढ़ स्थित सरकारी आवास और ग्वालियर के फ्लैट पर भी उसे ले जाया गया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि मार्च 2025 से जून 2026 तक यह सिलसिला जारी रहा।

अब शादी करने से इनकार किया जा रहा है और विरोध करने पर परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच जारी है।

थाने से कोर्ट तक क्या बोले माहौर

कोर्ट में पेशी से पहले अरविंद माहौर थाने परिसर में नजर आए। इस दौरान उन्होंने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में खुद को निर्दोष बताया। उन्होंने कहा कि शिकायत दर्ज होना और आरोप साबित होना अलग बात है। उनके मुताबिक, फिलहाल केवल एफआईआर दर्ज हुई है और कानूनी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। महिला मित्र डॉली गायक का नाम सामने आने पर भी उन्होंने कहा कि वह ऐसी किसी महिला को नहीं जानते।

एफआईआर में एक और नाम की एंट्री

शिकायतकर्ता ने अपनी रिपोर्ट में डॉली गायक नाम की महिला का भी जिक्र किया है। आरोप है कि उसने समझौते का दबाव बनाया और शिकायत वापस लेने के लिए धमकी दी। हालांकि, अरविंद माहौर ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने पहली बार यह नाम सुना है। इस पहलू को लेकर भी पुलिस जांच कर रही है।

पुराने मामलों ने बढ़ाए सवाल

यह पहला मौका नहीं है जब अरविंद माहौर विवादों में आए हों। इससे पहले महिलाओं के साथ कथित गलत व्यवहार को लेकर उनके खिलाफ शिकायतें सामने आ चुकी हैं। एक छात्रा से जुड़े मामले के बाद उसका परिवार जनसुनवाई में शिकायत लेकर पहुंचा था। सितंबर 2025 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर महिलाओं के प्रति कथित अनुचित आचरण के मामले में उन्हें निलंबित भी किया गया था। उस कार्रवाई ने उस समय प्रदेश स्तर पर काफी चर्चा बटोरी थी।

थप्पड़ कांड से भी जुड़ा रहा नाम

माहौर का नाम पिछले साल दो अलग-अलग घटनाओं में भी सुर्खियों में रहा। एक निजी कार्यक्रम में पार्किंग विवाद के दौरान सुरक्षा गार्ड को थप्पड़ मारने का वीडियो सामने आया था। इसके अलावा सबलगढ़ में एसडीएम रहते हुए जनसुनवाई के दौरान एक ग्रामीण के साथ कथित बदसलूकी और थप्पड़ मारने का वीडियो भी वायरल हुआ था। इन घटनाओं ने उनके कामकाज के तरीके पर सवाल खड़े किए थे।

बहाली के आदेश भी चर्चा में

निलंबन के बाद उन्हें बहाल करने संबंधी आदेश में उल्लेख किया गया था कि उन्होंने आरोप पत्र का जवाब प्रस्तुत कर दिया है। विभागीय जांच जारी रहने के बावजूद प्रारंभिक परीक्षण के आधार पर उन्हें सेवा में वापस लेने का निर्णय लिया गया था। अब नए आपराधिक मामले के सामने आने के बाद उनकी कार्यशैली, विभागीय निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।

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