शिवपुरी के नरवर किले से सिंधिया रियासत की 400 साल पुरानी ऐतिहासिक तोप हथियारबंद बदमाश लूट ले गए। 12 दिन पहले मिले संकेत के बाद भी सुरक्षा नहीं बढ़ाई गई।
शिवपुरी। ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिवपुरी के नरवर किले से सिंधिया रियासत की करीब 400 साल पुरानी ऐतिहासिक तोप हथियारबंद बदमाशों के गिरोह ने उठा ली। सबसे बड़ी बात यह रही कि घटना से 12 दिन पहले इसी तोप को निशाना बनाने की कोशिश हो चुकी थी, लेकिन चेतावनी के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई।
15 और 16 जुलाई की दरम्यानी रात 25 से 30 बदमाश लोडिंग वाहनों के साथ किले के पिछले रास्ते से अंदर पहुंचे। वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों को जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया और ऐतिहासिक तोप लेकर फरार हो गए। अब पुलिस को आशंका है कि वारदात के पीछे अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह भी हो सकता है।
सुरक्षा में बड़ी चूक उजागर
किले की सुरक्षा व्यवस्था घटना के बाद सवालों के घेरे में है। ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी बाल किशन के मुताबिक उनके पास सुरक्षा के नाम पर केवल डंडा था। टॉर्च तक उपलब्ध नहीं थी। किले में पर्याप्त रोशनी और सीसीटीवी कैमरों का अभाव भी बदमाशों के लिए मददगार साबित हुआ। हथियारबंद गिरोह ने इसी कमजोरी का फायदा उठाकर पूरी वारदात को अंजाम दिया।
12 दिन पहले मिला था साफ संकेत
यह चोरी अचानक नहीं हुई। 5 जुलाई को बदमाश इसी तोप को नीचे गिराकर ले जाने की कोशिश कर चुके थे, लेकिन भारी वजन के कारण सफल नहीं हो पाए। उस घटना के बाद भी पुरातत्व विभाग और प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाने की बजाय मामले को सामान्य चोरी मानकर छोड़ दिया। यही लापरवाही अब ऐतिहासिक धरोहर के गायब होने की बड़ी वजह बनती दिखाई दे रही है।
सिंधिया रियासत की विरासत पर डाका
नरवर किले में रखी गई तोपें सिंधिया राजवंश के दौर की विरासत मानी जाती हैं। पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु से बनी इन तोपों पर राजचिह्न के साथ फारसी और देवनागरी लिपि के शिलालेख भी अंकित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार 16वीं शताब्दी की ऐसी ऐतिहासिक तोपें अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट में दो से पांच करोड़ रुपये तक की कीमत हासिल कर सकती हैं। इसी वजह से संगठित एंटीक तस्कर गिरोह पर शक गहराया है।
जांच तेज हुई लेकिन सवाल बाकी
16 जुलाई को किले के केयरटेकर ने नरवर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस को पिछले दुर्गम रास्ते पर वाहनों के टायरों के निशान भी मिले हैं, जिससे माना जा रहा है कि तोप को लोडिंग वाहन में ले जाया गया। शुरुआती स्तर पर सामान्य चोरी मानकर चल रही जांच अब कई जिलों तक पहुंच चुकी है। पुलिस ने नाकाबंदी कर वाहनों की जांच शुरू कर दी है। राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया ने मामले को गंभीर बताते हुए किले का निरीक्षण और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की बात कही है। वहीं करैरा एसडीओपी प्रशांत शर्मा ने भरोसा दिलाया है कि आरोपियों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी।