सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में इंटर्नशिप कर रहे मेडिकल छात्रों के सब्र का बांध सोमवार को आखिरकार टूट गया।
Hapur Medical Interns Strike: मानदेय बढ़ाने को सड़कों पर उतरे मेडिकल इंटर्न, DM दरबार में पहुंची आवाज |
प्रमोद शर्मा, हापुड़: सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में इंटर्नशिप कर रहे मेडिकल छात्रों के सब्र का बांध सोमवार को आखिरकार टूट गया। मासिक मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में इंटर्न छात्र संस्थान परिसर में एकत्र हुए और प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद की। छात्रों का कहना है कि अस्पताल में इंटर्नशिप के दौरान उन्हें विभिन्न जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं, लेकिन इसके मुकाबले मिलने वाला मानदेय बेहद कम है।
छात्रों के प्रदर्शन से कॉलेज परिसर में हलचल मच गई। इंटर्नों ने संस्थान प्रबंधन के समक्ष अपनी मांग रखते हुए मानदेय में उचित बढ़ोतरी की मांग की। छात्रों का कहना था कि अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में काम करते हुए वे मरीजों से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में उनके कार्यभार और जिम्मेदारियों को देखते हुए मानदेय में बढ़ोतरी जरूरी है।
पुलिस पहुंची, संभाला मोर्चा
छात्रों के प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने छात्रों से बातचीत कर स्थिति को शांतिपूर्ण बनाए रखा। इसके बाद छात्र प्रतिनिधियों और कॉलेज प्रबंधन के बीच बातचीत हुई। छात्रों को उम्मीद थी कि बातचीत के जरिए उनकी समस्या का समाधान निकल जाएगा, लेकिन मांग को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने पर छात्रों ने जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया।
कॉलेज से सीधे डीएम कार्यालय पहुंचे छात्र
प्रदर्शन के बाद इंटर्न छात्रों के प्रतिनिधि डीएम कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने डीएम को शिकायती पत्र सौंपकर मानदेय से जुड़ी समस्या से अवगत कराया। छात्रों ने जिला प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर उनकी मांग पर आवश्यक कार्रवाई कराने और उचित समाधान कराने की मांग की।
जिम्मेदारी बड़ी तो मानदेय भी बढ़े
इंटर्न छात्रों का कहना है कि इंटर्नशिप केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इस दौरान उन्हें अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। मरीजों की देखभाल से लेकर अस्पताल की विभिन्न व्यवस्थाओं में उनकी भूमिका रहती है। छात्रों का तर्क है कि जब जिम्मेदारियां बढ़ी हैं तो मानदेय में भी उसी के अनुरूप बढ़ोतरी होनी चाहिए। फिलहाल छात्रों की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि उनकी शिकायत पर प्रशासन और संस्थान प्रबंधन के स्तर से क्या कदम उठाया जाता है और लंबे समय से उठ रही मानदेय बढ़ोतरी की मांग का समाधान कब तक निकलता है।