छत्तीसगढ़ के चर्चित करोड़ों के महादेव सट्टा ऐप मामले में कोर्ट ने बैंक खाता अनफ्रीज करने से इनकार किया। आरोपी न होने पर भी राहत नहीं दी।
महादेव सट्टा ऐप से जुड़े मामलों में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर कोर्ट ने एक अहम और सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि सिर्फ इस आधार पर बैंक खाता अनफ्रीज नहीं किया जा सकता कि व्यक्ति केस में सीधे आरोपी नहीं है। 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आदित्य जोशी की अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए याचिकाकर्ता की पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया।
बैंक खाते को लेकर क्या था मामला
यह मामला ऑनलाइन सट्टेबाजी और संदिग्ध लेन-देन से जुड़ा है। जांच के दौरान पुलिस ने कई बैंक खातों को फ्रीज किया था, जिनमें याचिकाकर्ता विकास कुमार सिंह का खाता भी शामिल था। इस खाते में करीब 90751 रुपये की राशि जमा थी, जिसे डेबिट फ्रीज कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने पहले निचली अदालत में और फिर सत्र न्यायालय में खाते को अनफ्रीज करने की मांग की थी।
कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि आर्थिक अपराधों में सिर्फ आरोपित होना या न होना ही निर्णायक नहीं होता। अगर किसी खाते का उपयोग संदिग्ध वित्तीय लेन-देन या अपराध से जुड़ी गतिविधियों में हुआ है, तो उसे जांच पूरी होने तक फ्रीज रखा जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण मनी ट्रेल और सबूतों की सुरक्षा होती है। इसलिए जांच के दौरान बैंक खातों को खोलना उचित नहीं माना जा सकता।
फर्जी कंपनियों और बड़े नेटवर्क का खुलासा
जांच एजेंसियों के मुताबिक, महादेव ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क के लिए कई फर्जी कंपनियां और बैंक खाते तैयार किए गए थे। आरोप है कि इस नेटवर्क में बैंक कर्मचारियों की भी भूमिका सामने आई। इन्हीं खातों के जरिए करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ, जिसकी जांच अभी जारी है।
व्यक्तिगत परेशानी से बड़ा सबूतों का संरक्षण
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि भले ही किसी व्यक्ति को खाते में फंसी राशि की वजह से परेशानी हो सकती है, लेकिन जब मामला बड़े आर्थिक अपराध से जुड़ा हो तो जांच और साक्ष्य का संरक्षण ज्यादा अहम होता है। इसलिए फिलहाल खाते को अनफ्रीज करने का कोई आधार नहीं बनता।
ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया
सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश को भी सही माना और कहा कि मजिस्ट्रेट ने उपलब्ध साक्ष्यों और पुलिस रिपोर्ट के आधार पर उचित निर्णय लिया था। इसके साथ ही कोर्ट ने पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए मामले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
जांच जारी, नेटवर्क पर नजर
महादेव सट्टा ऐप केस में जांच एजेंसियां अभी भी पूरे नेटवर्क और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को खंगाल रही हैं। कोर्ट का यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों में बैंक खातों की फ्रीजिंग को लेकर एक अहम कानूनी मिसाल माना जा रहा है।