मध्यप्रदेश में जुलाई की भारी बारिश ने पश्चिमी क्षेत्रों में वर्षा की कमी को पूरा किया है, लेकिन पूर्वी क्षेत्र अभी भी 30% वर्षा की कमी का सामना कर रहा है।
मध्यप्रदेश में बारिश का आंकड़ा सामान्य की ओर, केवल सात फीसदी की रह गई कमी
प्रदेश में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है, लेकिन बारिश का वितरण अभी भी असमान बना हुआ है। एक जून से 4 जुलाई तक मध्यप्रदेश में 154 मिमी (मिलीमीटर) वर्षा दर्ज हुई है। हालांकि सामान्य 164.7 मिमी के मुकाबले यह 7 प्रतिशत कम है। खास बात यह है कि पश्चिमी मध्यप्रदेश में सामान्य औसत से 17 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है। जुलाई की झमाझम बारिश के चलते यहां जून में हुआ बरसात का घाटा पूरा हो गया है, जबकि पूर्वी मध्यप्रदेश अब भी 30 प्रतिशत वर्षा की कमी झेल रहा है। हालांकि जुलाई में यहां भी बारिश का घाटा तेजी से घट रहा है।
पूर्वी मध्यप्रदेश में अब भी बारिश की दरकार
पूर्वी मध्यप्रदेश में अब तक 129.5 मिमी वर्षा हुई है, जबकि इस अवधि तक यहां सामान्य वर्षा 186.1 मिमी है। यहां सबसे अधिक कमी मैहर में 81 प्रतिशत दर्ज की गई है। इसके अलावा टीकमगढ़ में 73 प्रतिशत, रीवा में 70 प्रतिशत, मऊगंज में 60 प्रतिशत, सीधी में 55 प्रतिशत, छतरपुर में 49 प्रतिशत, नरसिंहपुर में 46 प्रतिशत, मंडला में 45 प्रतिशत, अनूपपुर और सिंगरौली में 43-43 प्रतिशत, पन्ना में 36 प्रतिशत, कटनी में 34 प्रतिशत, सतना और उमरिया में 31-31 प्रतिशत, डिंडौरी में 30 प्रतिशत, जबलपुर में 28 प्रतिशत, शहडोल में 25 प्रतिशत, सागर में 21 प्रतिशत, दमोह में 20 प्रतिशत, छिंदवाड़ा में 14 प्रतिशत, निवाड़ी में 10 प्रतिशत तथा बालाघाट में 9 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं पांढुर्णा में सामान्य से 15 प्रतिशत और सिवनी में 5 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है।
पश्चिमी मध्यप्रदेश में बारिश का कोटा पूरा
पश्चिमी मध्यप्रदेश में अब तक 172.8 मिमी वर्षा हुई है, जो सामान्य 148.2 मिमी से 17 प्रतिशत अधिक है। यहां सबसे अधिक बारिश देवास में सामान्य से 125 प्रतिशत अधिक दर्ज हुई है। इसके बाद इंदौर में 90 प्रतिशत, भोपाल में 60 प्रतिशत, सीहोर में 59 प्रतिशत, नीमच में 57 प्रतिशत, हरदा में 54 प्रतिशत, राजगढ़ में 39 प्रतिशत, बुरहानपुर में 36 प्रतिशत, खंडवा में 35 प्रतिशत, गुना में 33 प्रतिशत, आगर-मालवा में 31 प्रतिशत, अशोकनगर में 29 प्रतिशत, बैतूल में 25 प्रतिशत, ग्वालियर और खरगोन में 23-23 प्रतिशत, शाजापुर में 22 प्रतिशत, मंदसौर में 17 प्रतिशत तथा उज्जैन और बड़वानी में 8-8 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है। वहीं श्योपुर में सामान्य से 3 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।
हालांकि पश्चिमी क्षेत्र के कुछ जिले अब भी सामान्य से पीछे हैं। इनमें अलीराजपुर में 83 प्रतिशत, दतिया में 53 प्रतिशत, भिंड और झाबुआ में 49-49 प्रतिशत, नर्मदापुरम में 27 प्रतिशत, मुरैना में 20 प्रतिशत, शिवपुरी में 14 प्रतिशत तथा रायसेन में 12 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।
इन जिलों में अब भी अच्छी बारिश का इंतजार
कुल मिलाकर प्रदेश का वर्षा घाटा अब घटकर 7 प्रतिशत रह गया है, लेकिन पूर्वी मध्यप्रदेश के विंध्य, बुंदेलखंड, चंबल और महाकौशल अंचल के कई जिलों में अब भी अच्छी बारिश का इंतजार बना हुआ है। पश्चिमी अंचल में हुई जोरदार बारिश ने ही प्रदेश के कुल वर्षा आंकड़ों को संतुलित करने में अहम भूमिका निभाई है।