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Madhya Pradesh Milk Production Rises to Second Ran

मध्य प्रदेश में दूध उत्पादन में 25% की बढ़ोतरी, देश में दूसरे नंबर पर पहुंचा राज्य

मध्य प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में 25% की वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य अब राजस्थान के करीब पहुंचकर देश में दूसरे स्थान पर आ गया है। कैबिनेट बैठक में गो-पालन योजनाओं और उत्पादन वृद्धि की रिपोर्ट दी।


मध्य प्रदेश में दूध उत्पादन में 25 की बढ़ोतरी देश में दूसरे नंबर पर पहुंचा राज्य

प्रमोद दुबे
भोपालः मध्य प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को लेकर बड़ी उपलब्धि सामने आई है। राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक वर्ष में दुग्ध उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस बढ़ोतरी के साथ मध्य प्रदेश अब राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान के लगभग बराबर पहुंचते हुए दूसरे स्थान पर आ गया है।

राजधानी भोपाल में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गई। इसमें बताया गया कि वर्ष 2024-25 में जहां राज्य का दुग्ध उत्पादन लगभग 9.4 लाख लीटर प्रतिदिन था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर करीब 12.4 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गया है। सरकारी अनुमान के अनुसार, पहले दो वर्षों में उत्पादन को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन यह लक्ष्य लगभग एक वर्ष में ही पार करते हुए 25 प्रतिशत तक पहुंच गया।

राष्ट्रीय स्तर पर दूध उत्पादन की स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार देश में दुग्ध उत्पादन के मामले में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर बना हुआ है, जिसका योगदान लगभग 16 प्रतिशत से अधिक बताया गया है। राजस्थान लगभग 14.5 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर था, जबकि अब मध्य प्रदेश भी इसी स्तर के करीब पहुंच गया है। वहीं गुजरात अभी चौथे स्थान पर मौजूद है। विशेषज्ञों के अनुसार मध्य प्रदेश की तेज़ वृद्धि से आने वाले समय में राष्ट्रीय डेयरी सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है। 

गो-पालन और डेयरी सेक्टर में सरकारी योजनाओं का असर

राज्य सरकार ने पिछले दो वर्षों में गो-पालन और डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। इनमें प्रमुख रूप से गो-शालाओं के लिए अनुदान बढ़ाना और बुनियादी ढांचे का विस्तार शामिल है। गो-शालाओं में गो-वंश के भरण-पोषण के लिए दी जाने वाली राशि 20 रुपये प्रति गो-वंश प्रतिदिन से बढ़ाकर 40 रुपये कर दी गई है। इसके लिए बजट में भी बड़ा बदलाव किया गया है, जो 90 करोड़ रुपये से बढ़कर 600 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से यह राशि सीधे गो-शालाओं के खातों में भेजी जा रही है, जिससे व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ी है।

गो-शालाओं का विस्तार और नई संरचना

प्रदेश में वर्तमान में लगभग 2900 गो-शालाएं संचालित हैं, जिनमें 4 लाख से अधिक गो-वंश का संरक्षण किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्यमंत्री गो-सेवा योजना के तहत 2200 से अधिक नई गो-शालाएं बनाई गई हैं। वहीं शहरी क्षेत्रों में इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर में बड़ी क्षमता वाली गो-शालाएं विकसित की गई हैं। भोपाल में 69 एकड़ भूमि पर 10,000 गो-वंश क्षमता वाली वृहद गो-शाला का निर्माण भी पूरा किया गया है, जिसकी लागत लगभग 45 करोड़ रुपये बताई गई है।

अनुसंधान और विकास केंद्रों का विस्तार

राज्य सरकार ने आगर-मालवा जिले के सालरिया में गो-अभ्यारण्य, अनुसंधान एवं उत्पादन केंद्र विकसित किया है, जहां हजारों गो-वंश का व्यवस्थापन किया जा रहा है। यह केंद्र डेयरी और पशुपालन अनुसंधान के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राज्य सरकार के अनुसार इन योजनाओं और निवेश के चलते ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और किसानों की आय में भी सुधार दर्ज किया जा रहा है।

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