मध्य प्रदेश में शिक्षा घर योजना के तहत, ड्रॉपआउट बच्चों को वापस स्कूल में लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
मप्र में कक्षा आठ तक स्कूल छोड़ चुके विद्यार्थियों को वापस लाने की कवायद
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को अब वापस स्कूल से जोड़ने की कवायद की जा रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (यूडाइस) की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में वर्ष 2024-25 में सरकारी और निजी स्कूलों के 4.67 लाख विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ दी, जबकि वर्ष 2023-24 में यह संख्या 5.70 लाख थी। वहीं, नीति आयोग के जारी आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश उन राज्यों में शामिल है, जहां पिछले 15 वर्षों में लगभग 50.72 लाख से अधिक बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी, यानी ड्रॉपआउट हो गए।
बताया जाता है कि इन आंकड़ों के सामने आने के बाद प्रदेश का स्कूल शिक्षा विभाग चिंतित है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर अब प्रदेश में इसी सत्र से शिक्षा घर योजना लागू करने की मंजूरी दे दी गई है। दरअसल, स्कूल शिक्षा में लगातार गिरावट आने से प्रदेश में बेहतर शिक्षा और सरकारी स्कूलों के प्रति विद्यार्थियों के बढ़ते रुझान का दावा करने वाली सरकार खुद सवालों के घेरे में आ गई है। हालांकि सरकार यह भी जानती है कि इन लाखों ड्रॉपआउट बच्चों को वापस स्कूल लाना आसान नहीं होगा, लेकिन प्रयास करने से कुछ न कुछ सफलता अवश्य मिल सकती है।
पढ़ाई छोड़ने के ये कारण
नीति आयोग के अनुसार प्रदेश में जिन बच्चों ने कक्षा 8 के बाद पढ़ाई छोड़ दी, उसके कई कारण हैं। इनमें सरकारी स्कूलों के जर्जर भवन, बुनियादी सुविधाओं जैसे शौचालय और पेयजल की कमी, शिक्षकों का अभाव, गरीबी के कारण अभिभावकों का रोजगार के लिए दूसरे शहरों में पलायन तथा आर्थिक मजबूरियों के चलते बच्चों का पढ़ाई बीच में छोड़ देना शामिल है।
बता दें कि नामांकन में हर वर्ष भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में वर्ष 2010-11 में कक्षा 1 से 8 तक सरकारी स्कूलों में 1.05 करोड़ बच्चे अध्ययनरत थे, जो वर्ष 2025-26 तक घटकर केवल 54.58 लाख रह गए हैं। इतना ही नहीं, पिछले 15 वर्षों में राज्य में 72,500 से अधिक सरकारी स्कूल बंद या अन्य स्कूलों में विलय कर दिए गए हैं। वर्ष 2024-25 में 1,290 स्कूल बंद या विलय किए गए।वर्ष 2024 में 1.54 करोड़ बच्चों का नामांकन हुआ था, जबकि इस बार 1.45 करोड़ बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया गया है। इसी प्रकार वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच सरकारी स्कूलों की संख्या 99,411 से घटकर 92,250 रह गई है। अकेले वर्ष 2024 में 1,292 स्कूल बंद या विलय किए गए।
शिक्षा घर योजना शुरू कर रहे हैं
मध्य प्रदेश में ड्रॉपआउट हो चुके स्कूली बच्चों को फिर से शिक्षा से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर शिक्षा घर योजना लागू की जा रही है। इस योजना के तहत कक्षा आठवीं के बाद ड्रॉपआउट हो चुके और मुख्यधारा से दूर बच्चों को घर बैठे या विशेष केंद्रों के माध्यम से दोबारा शिक्षा से जोड़ा जाएगा तथा उन्हें कौशल विकास आधारित शिक्षा का लाभ भी दिया जाएगा।इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
- राव उदय प्रताप सिंह,स्कूल शिक्षा मंत्री, मध्य प्रदेश
शिक्षा घर योजना से ड्रॉपआउट बच्चों को लाने का प्रयास
स्कूल शिक्षा विभाग बच्चों की नामांकन संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षा घर योजना इसी सत्र से लागू कर रहा है। इसके लिए शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पिछले कुछ वर्षों में पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को घर-घर जाकर स्कूल लौटने के लिए प्रेरित करें। योजना का क्रियान्वयन राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा किया जाएगा। ऐसे ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान कर उन्हें पुनः हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी शिक्षा पूरी करने का अवसर प्रदान किया जाएगा।